25/07/2024
*सुप्रीम कोर्ट ने आश्चर्य जनक ढंग से दिया एक हिम्मती फैसला*
*कैसे आया यह फैसला, प्रबुद्ध जनता में चर्चा का विषय बना है*
*आमतौर पर सुप्रीम कोर्ट तुरंत और सटीक फैसला नहीं देता*
*महीनो महीनों तक मामले को लटकाता है । बिना प्रधान आका के इशारे के जमानत तक नहीं देता*
*ईवीएम को हटाने के लिए दी गई याचिका , ताजा नीट परीक्षा रद्द करने की याचिका पर देखो कैसा ढुलमुल रवैया अपना रहा है*
*नेम प्लेट हटाने के मामले में तुरंत फैसला कैसे दिया, क्यों दिया । किसके प्रभाव में आकर दिया , सब जगह चर्चा का विषय है*
प्रबुद्ध लोगों में यह आम राय बन रही है कि मोदी शाह तथा योगी के बीच राजनीतिक लड़ाई, झगड़े के कारण ही यह फैसला जल्दी आया है। योगी को कट साइज में लाने के लिए दिया गया है। इस फैसले से 'आदित्यनाथ की नफ़रत की दुकान" का " तात्कालिक शटर डाउन" हो गया है .. इसे फिलहाल नफ़रती गैंग के मुंह पर तमाचा माना जा रहा है ... लेकिन वास्तव में ऐसी बात नहीं है। कहीं ना कहीं फैसले में कोई पेज है । लोचा है । एक गहरा रहस्य भी है।
◆ क्योंकि ऐसा 'एक्स पार्टी स्टे' सुप्रीम कोर्ट बिरले केसों में ही देता है, जिनमें संविधान और कानून का गंभीर उल्लंघन होता है। पिछले 10 साल में दो दर्जन से अधिक गंभीर और राष्ट्रहित वाले मुद्दे पर भी कोर्ट में कोई तेजी नहीं दिखाई। महीनों तक सुनवाई में ढुलमुल रवैया बनाए रखा।
सैकड़ो निर्दोष सामाजिक कार्यकर्ताओं को जमानत तक नहीं दी। याचिका पर सुनवाई तक नहीं की । सीएम केजरीवाल जेल में सड़ रहा है । उसके जमानत के मामले को कैसे लटकाया और टाला जा रहा है।
पूरी दुनिया देख रही है। फिर क्यों अचानक योगी के फैसले को पलटने के लिए कोर्ट इतना फुर्तीला हो गया। क्या वाकई योगी के दिन अब बहुत गिने चुने बच गए हैं।
◆ कोर्ट में फिलहाल तो बड़ा दिल दिखाया है। उसका कहना है कि "शिव ढाबा" हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई कोई भी चला सकता है ... किसी को अपना नाम लिखने की ज़रूरत नहीं है : कोर्ट में इस एक लॉजिक ने गुलामी के दौर वाले "नफ़रती हुक्म" को रोक दिया..
◆ क्योंकि भारत में "मैकडोनाल्ड", पित्ज़ा ब्रांड, कपड़ों का ब्रांड, परफ़्यूम, पैक्ड फ़ूड जैसे सैंकड़ों ब्रांड अलग अलग क़ौम बेचती है ... इस पर कभी किसी को आपत्ति नहीं हुई। हर कौम के लोग किसी भी ब्रांड के वस्तु को बेचते आए हैं ...
👉 सुप्रीम कोर्ट ने साफ साफ कहा है कि खाने वाले को खाने की गुणवत्ता का पता होना लाज़िमी है, लेकिन खाना बनाने वाले या बेचने वाले की पहचान जानने का नहीं ...
👉 व्यक्ति की पहचान जानने का कोई कानूनी आधार नहीं है ... ये बात सोशल मीडिया के उन चंगू मंगू को सुप्रीम कोर्ट / कानून का जवाब है जो उधम मचाए हुए थे कि पहचान क्यों छुपानी है, क्या दिक्कत है बताने में
● आदित्यनाथ ने सिर्फ़ मालिक का नाम नहीं होटल के कर्मचारियों का नाम भी लिखवाया था..
👉 मक़्सद एक ही था कि खाना कौन बना,परोस रहा है इस का पता चले ... या'नि टारगेट पर मुसलमान के आलावा SC/ST भी थे।
● सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद भी प्रगतिशील लोगों को सामान्य नागरिकों को ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि यह एक राजनीतिक चाल अधिक लगती है।
भविष्य में देश विक्रेता गैंग अधिक मजबूती के साथ नए कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत और भी कड़े सांप्रदायिक फैसले लेकर वापस आ सकता है।
यह भी संभव है कि जनता के मिजाज और मूड को भांपने लिए यह फैसला लिया गया। यह भी संभव है कि मोदी शाह योगी तीनों मिले हुए हैं । अंदर खाने में बिल्कुल कट्टर दोस्ती है। ऊपर से नूरा कुश्ती हो रही है।
सिर्फ सांप्रदायिक ऐजेंडे को लागू करने के लिए जनता के मिजाज को भांपा गया है। लेकिन जिस तरह से इस आदेश की चौतरफा निंदा हुई है । एनडीए के सहयोगी दल भी खिलाफत में उतर गए। उसी के कारण हार कर यह नया फैसला अदालत के कंधे से जारी किया गया है।
इसे नए कलेवर में पुनः जल्दी देश में खासकर यूपी में लागू किया जा सकता है ।
उस समय देखना कोर्ट भी खामोश रहेगी। अंदर खाने में सबकी साठ गांठ और मिली भगत है।
फिलहाल तमाम फ़र्ज़ी बाबाओं, और जो नेता इस नेम प्लेट आदेश की हिमायत कर रहे थे, उन्हें माफ़ी मांगनी चाहिए ..
👉 कांवड़ यात्रियों से गुज़ारिश है कि वे हिंदू विरोधी नेताओं के झांसे में ना आएं ... क्योंकि अधिकतर सांप्रदायिक दंगाई नेता ख़ुद के फ़ायदे के लिए पूरी हिंदू क़ौम को बदनाम कर रहे हैं ...
👉 भगवान शिव की अवधारणा में कोई भेदभाव नहीं है ... शिव हर वर्ग को साथ ले कर चलते हैं ... शिव सिर्फ़ इंसानों के ही नहीं बल्कि पशुओं के भी देवता हैं ... इसीलिए शिव को "पशुपतिनाथ" भी कहा गया है..
🔱 वैसे इतना तय है कि बीजेपी पर "शिव का प्रकोप" हो चुका है ... अब भगवान शिव जनता में समाएंगे और बीजेपी के राजनैतिक विनाश का "तांडव" होगा ! लेकिन अभी सबको सावधान रहना है क्योंकि सत्ता इनके पास है। सीट भले ही कम हुई है, लेकिन जहरीला दिमाग वही है। जहरीला दिमाग में कोई कमी नहीं है । यह लोग जनता को बांट कर आपस में लड़ाने के लिए नए-नए बारूद छोड़ते रहेंगे । नए-नए अपराधिक आदेश करते रहेंगे। इनसे हमेशा अलर्ट रहना है।
- आचार्य सुरेश्वरानंद सरस्वती, भरूच गुजरात ✍️
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