क्षत्रिय-The Shield

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24/10/2024

जय चंद वाला प्रोपेगेंडा तो विफल हो गया, ये राघव चेतन कोन है ?
नोट : प्लीज़ डोंट ऑफ़ेंड, मेरा क्या ही विगड़ लोगे ?🤫🤭

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अनुज महाराज लक्ष्मण जी के विशुद्ध वंशज, अरब आक्रमणों के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रधान नायक, ...
18/10/2024

मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम के अनुज महाराज लक्ष्मण जी के विशुद्ध वंशज, अरब आक्रमणों के विरुद्ध प्रतिरोध के प्रधान नायक, गुर्जर प्रदेश के अधिपति क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज जी की जयंती पर उन्हें सादर नमन

#राजपूत_सम्राट_मिहिरभोज_प्रतिहार

राजपूतों ने मुगलों से अपनी बेटियों का विवाह किया। " इस पंक्ति की रट लगाने वाले तथाकथित बौद्धिक मुझे बता सकते हैं कि ऐसे ...
24/07/2024

राजपूतों ने मुगलों से अपनी बेटियों का विवाह किया। " इस पंक्ति की रट लगाने वाले तथाकथित बौद्धिक मुझे बता सकते हैं कि ऐसे व्यक्तियों की कुल संख्या कितनी होगी, जिन्होंने अपनी बहन-बेटियों का विवाह मुगल शासकों से किया ? पांच, दस, बीस, पच्चास या अधिक ? कितने होंगे ?
मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि
दस से अधिक नाम आपको याद नहीं होंगे।

लेकिन कुछ मानसिक अपाहिज इस तत्कालीन प्रवृत्ति को इतना बढ़ा चढ़ाकर बताते हैं, जैसे राजपूत केवल इसी के कारण अपना अस्तित्व बचाए हुए थे। राजपूत जाति की अदम्य जिजीविषा, त्याग, बलिदान, मुट्ठी भर होकर हजारों से लड़ने-भिड़ने का सामर्थ्य सब व्यर्थ ???

मुगलों को बेटियां दीं राजपरिवारों ने। क्या केवल राजपरिवार लड़ते थे ? लड़ने की जिम्मेदारी छोटे से छोटे राजपूत सामंत और ठाकुर तक की होती थी। कुछ लोग केवल इसलिए लड़े, क्योंकि वो राजपूत थे और जानते थे कि लड़ना अपना धर्म है; वरना न वो राजा थे,
न ठाकुर और न ही सामंत।

आपको मुगल शासकों को अपनी बेटी देने वाले पांच-दस राजपूत राजा याद हैं, लेकिन हजारों राजपूतों ने देश, धर्म के लिए अपने गले कटवा लिए, अपना पूरा परिवार हवन कर दिया,
उनका क्या ??

यदि राजपूतों का काम मुगलों को अपनी बेटी देने भर से चल रहा था, तो क्या जरूरत थी हजारों क्षत्राणियों को आग में कूद पड़ने की ?
यदि राजपूत चाकरी कर रहे थे,
तो एक हजार बरस से कौन लड़ रहा था कि
हम हिंदू बने रहे,
हमारे मंदिर बचे रहे ?

राजस्थान के गांव-गांव में भोमिया जी हुए हैं, जिन्होंने मातृभूमि, धर्म, गाय, ब्राह्मण, स्त्री और मंदिर के लिए अपने प्राणों का उत्सर्ग किया है। क्या इन सारे लोगों ने अपनी बेटियां मुगलों से ब्याही थी ?

राजपूत मुगल वैवाहिक संबंधों की व्याख्या आप चाहें वैसे करें, कोई आपत्ति नहीं। ऐसे संबंध मेरे गले भी नहीं उतरते। लेकिन इससे राजपूतों की वीरता, उनकी त्याग-वृत्ति धूमिल हो जाती है क्या ? और सबसे दुर्भाग्यपूर्ण यह हैं की राजपूतो ने जिनके लिए ये सब कीया वहीं आज राजपूतो का पल पल अपमान और उपहास उडा रहे हैं!

राजपूत धर्म और संस्कृति के लिए
लड़ने वाली जाति है।
आप चाहें, गालियां दें;
लेकिन ज्यों गंगा में पत्थर फेंक देने से
उसकी पावनता भंग नहीं हो जाती,
वैसे ही राजपूतों को गालियां देने से उनकी तलवार और रक्त से लिखी
रणरंग आख्यायिका कलुषित नहीं होती।

यह डिफेंडर पूरी तरह से ख़ुद की मेहनत, लगन, परिश्रम के पैसे की है। बैशाखी के सहारे मिली सफलता से नहीं।गगन सर की लोकप्रियत...
03/07/2024

यह डिफेंडर पूरी तरह से ख़ुद की मेहनत, लगन, परिश्रम के पैसे की है। बैशाखी के सहारे मिली सफलता से नहीं।

गगन सर की लोकप्रियता, उनके रसूख से जलने वालों तुम अपनी जलन बनाए रखे, मैथ की दुनिया के बादशाह का जलवा बरकरार रहेगा।
्रताप

India🇮🇳
30/06/2024

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राम सिंह चौहान का नाम गिनीज़ बुक OF वर्ल्ड Record में दर्ज 🚩
29/05/2024

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अनूपशहर के संस्थापक राजा अनूप सिंह बड़गूजरमुगल बादशाह शाहजहां के दरबारी चित्रकार बालचंद द्वारा उनकी जीवनी 'पादशाहनामा' क...
28/05/2024

अनूपशहर के संस्थापक राजा अनूप सिंह बड़गूजर

मुगल बादशाह शाहजहां के दरबारी चित्रकार बालचंद द्वारा उनकी जीवनी 'पादशाहनामा' के लिए 1638 ई. में बनाया गया चित्र... चित्र में राजा अनूप सिंह बड़गूजर शेर का जबड़ा फाड़ रहे हैं और शाहजहां को पीठ पर वार करते दिखाया गया है |

जयपुर महाराज पद्मनाभ सिंह जी
28/05/2024

जयपुर महाराज पद्मनाभ सिंह जी

हल्दीघाटी युद्ध के बाद आमेर के राजा मानसिंह ने 23 जून, 1576 को गोगुन्दा पर अधिकार करके शाही सिपहसालारों को सौंप दिया। मह...
28/05/2024

हल्दीघाटी युद्ध के बाद आमेर के राजा मानसिंह ने 23 जून, 1576 को गोगुन्दा पर अधिकार करके शाही सिपहसालारों को सौंप दिया। महाराणा प्रताप कुम्भलगढ़ से कोल्यारी पहुंचे और वहां से गोगुन्दा की तरफ कूच किया।

बारिश के मौसम में महाराणा ने गोगुन्दा के महलों में तैनात मुगलों पर अचानक आक्रमण कर दिया। भीषण युद्ध के बाद महाराणा प्रताप ने अपने निवास स्थान गोगुन्दा पर विजय प्राप्त की और वहां मांडण कूंपावत को नियुक्त किया।

गोगुन्दा के पास मजेरा गाँव में राणेराव के तालाब के पास में महाराणा प्रताप ने सैनिक छावनी बनाई और वहाँ से मेवाड़ के मैदानी भागों में तैनात मुगल थाने उठाए। गोगुन्दा के इस युद्ध में कईं मुगल मारे गए और बहुत से भाग निकले।

महाराणा प्रताप चाहते थे कि अकबर स्वयं मेवाड़ आए, इसलिए उन्होंने कुछ शाही सिपहसालारों को छोड़ते हुए व्यंग भरे शब्दों में कहा कि "अपने बादशाह से कहना कि राणा कीका ने याद किया है"

गोगुन्दा की भीषण पराजय और महाराणा के व्यंग ने मुगल बादशाह अकबर को मेवाड़ आने के लिए विवश कर दिया और 11 अक्टूबर, 1576 को उसने मेवाड़ की तरफ रुख किया।

पोस्ट लेखक :- तनवीर सिंह सारंगदेवोत

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