Gau Putar Sena Punjab

Gau Putar Sena Punjab गौ पुत्र सेना पंजाब का यह पेज राष्ट्रीय स्तर पर पंजीकृत संस्था गौ पुत्र सेना का सहभागी पेज है।

गौ पुत्र सेना पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष गर्वित गोयल द्वारा सरकारों को गौ माता की रक्षा हेतु जगाने का एक सूक्ष्म प्रयास मिड...
04/07/2023

गौ पुत्र सेना पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष गर्वित गोयल द्वारा सरकारों को गौ माता की रक्षा हेतु जगाने का एक सूक्ष्म प्रयास मिडिया की नज़र से साभार

आप सभी मिडिया कर्मियों का अपने अपने समाचार पत्र में गौ पुत्र सेना पंजाब एवं प्रदेश अध्यक्ष गर्वित गोयल की आवाज को अपनी क़लम के माध्यम से बहुत ही खुबसूरती से लेखन कर प्रमुखता से प्रकाशित करवाने के लिए आप सभी का विषेश रूप से ह्रदय से कोटि कोटि धन्यवाद आभार ।

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

गौ पुत्र सेना के संस्थापक गोलोक वासी स्वर्गीय गौ पुत्र श्री सम्पत सिंह जी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में आज गौ पुत्र सेना...
01/07/2023

गौ पुत्र सेना के संस्थापक गोलोक वासी स्वर्गीय गौ पुत्र श्री सम्पत सिंह जी की जन्म जयंती के उपलक्ष्य में आज गौ पुत्र सेना फिरोजपुर पंजाब ने राष्ट्रीय कार्यालय द्वारा जारी दिशा निर्देशों के तहत देश भर में आयोजित पौधारोपण,रक्त दान शिविर,गौ माता की सेवा संभाल, गौ रक्षा व लोक कल्याण शिविरों के माध्यम से स्वर्गीय गोलोक वासी श्री संपत सिंह जी की जन्म जयंती पर उन्हें याद करते हुए गौ पुत्र सेना फिरोजपुर पंजाब के गौ पुत्रों ने आज फिरोजपुर शहर के माता रामिघां मंदिर देवी दवारा में हुई बैठक में उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई इसके उपरांत संपत सिंह जी की याद में फिरोजपुर शहर के गौ पुत्रों द्वारा मीठे ठंडे जल की सेवा की गई छबील में सैकड़ों राहगीरों द्वारा जल ग्रहण किया गया इस समय गौ पुत्र सेना फिरोजपुर के सिकंदर जोशी जी,पारस शर्मा जी,भारत भूषण शर्मा जी,रवि जी,काका जी,कपिल जी, दीपू जी,प्रदीप हांडा जी,नवीन शर्मा जी व करनैल सिंह जी आदि गौ पुत्र उपस्थित रहे।

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

गौ पुत्र सेना के संस्थापक स्वर्गीय गौ पुत्र सम्पत सिंह जी की जन्म जयंती की झलक हरियाणा के एक प्रमुख समाचार पत्र के माध्य...
29/06/2023

गौ पुत्र सेना के संस्थापक स्वर्गीय गौ पुत्र सम्पत सिंह जी की जन्म जयंती की झलक हरियाणा के एक प्रमुख समाचार पत्र के माध्यम से साभार।

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम
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 #अंतरराष्ट्रीय_योग_दिवस_की_हार्दिक_शुभकामनाएं। #करें_योग  #रहें_निरोग ्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम
20/06/2023

#अंतरराष्ट्रीय_योग_दिवस_की_हार्दिक_शुभकामनाएं।

#करें_योग
#रहें_निरोग

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

 #आद्य_गुरु_शंकराचार्य_जन्मोत्सव पर विषेश #वैशाख_शुक्ल_पञ्चमी_जन्मोत्सव                #आदि_गुरु_शंकराचार्यजी का जन्म वै...
25/04/2023

#आद्य_गुरु_शंकराचार्य_जन्मोत्सव पर विषेश

#वैशाख_शुक्ल_पञ्चमी_जन्मोत्सव


#आदि_गुरु_शंकराचार्यजी का जन्म वैशाख शुक्ल पंचमी को #दक्षिण_राज्य_केरल_के_कालड़ी नामक ग्राम में शिव भक्त भट्ट ब्राह्मण परिवार में हुआ था।इनके #पिता_जी_का_नाम_शिवगुरु_नामपुद्री और #माता_जी_का_नाम_विशिष्टादेवी था।गुरु शंकराचार्य जी के माता-पिता परम #शिव_भक्त थे।
गुरु शंकराचार्य के माता-पिता को यह आभास हो गया था कि उनका पुत्र कोई साधारण बालक नहीं है,बल्कि वह एक तेजस्वी बालक हैं।हालांकि बचपन में ही उनके पिता का साया उनके ऊपर से उठ गया था।
#आदि_गुरु_शंकराचार्य_विलक्षण_प्रतिभा_के_धनी_थे।शंकराचार्य जी को छोटी आयु में सारे वेदों,उपनिषदों, पुराणों,रामायण,महाभारत कंठस्थ हो गए थे।उनके इस ज्ञान को देखकर गुरुकुल में उनके गुरुजन हैरान हो गए थे।उन्हें भगवान शिव का अवतार भी माना जाता है।उन्होंने केवल #सात_वर्ष_की_आयु_में_सन्यास_ग्रहण कर लिया था।
आदि गुरु शंकराचार्य का जन्म भले ही दक्षिण भारत में हुआ हो लेकिन लेकिन उनका कार्यक्षेत्र संपूर्ण भारत रहा।उन्होंने #अद्वैत_वेदांत_के_दर्शन का विस्तार किया।सनातन धर्म का संरक्षण करने के लिए आदिगुरु ने #भारत_के_चारों_कोनों_में_चार_मठों_की_स्थापना की।जो आज भी #हिन्दू_धर्म_के_सबसे_पवित्र_मठ माने जाते हैं और आस्था के बड़े केन्द्र हैं।
जिस समय हिन्दू धर्म अपनी गरिमा खोता जा रहा था तथा अन्य धर्म हिन्दू धर्म को नष्ट करने के लिए प्रयासरत थे।उस समय आदि गुरु शंकराचार्य ने हिन्दू धर्म के उत्थान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई तथा हिन्दू धर्म को उसका गौरव पुन: दिलाया।
उन्होंने सनातन धर्म की प्रतिष्ठा के लिए भारत के 4 क्षेत्रों में चार मठ स्थापित किए तथा शंकराचार्य पद की स्थापना करके उन पर अपने चार प्रमुख शिष्यों को स्थापित किया। तबसे इन चारों मठों में शंकराचार्य पद की परम्परा चली आ रही है।
ये चार मठ इस प्रकार हैं-
1. #उत्तरामण्य_मठ_या_उत्तर_मठ_ज्योतिर्मठ_जो_कि_जोशीमठ में स्थित है।
2. #पूर्वामण्य_मठ_या_पूर्वी_मठ_गोवर्धन_मठ_जो_कि_पुरी में स्थित है।
3. #दक्षिणामण्य_मठ_या_दक्षिणी_मठ_शृंगेरी_शारदा_पीठ_जो_कि_शृंगेरी में स्थित है।
4. #पश्चिमामण्य_मठ_या_पश्चिमी_मठ_द्वारिका_पीठ_जो_कि_द्वारिका में स्थित है।
आदि गुरु शंकराचार्य अल्पायु के थे। उन्होंने #केवल_32_वर्ष_की_आयु_में_अपना_शरीर_त्याग_दिया था।उन्होंने #केदारनाथ ( #उत्तराखंड) के समीप अपने #जीवन_की_अन्तिम_सांसे लीं।अपनी इस छोटी सी यात्रा में उन्होंने कई बड़े महान कार्य किए, जिनके लिए उन्हें सदैव स्मरण किया जाता है।
ऐसे #महान्_ओजस्वी_तेजस्वी_एवं_विलक्षण_प्रतिभा_वाले_आद्य_गुरु_शंकराचार्य_जी_के_चरणों_में_शत्_शत्_नमन्।

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 #भगवान_परशुरामजी            #वैशाख_शुक्ल_तृतीया/  #प्रकटोत्सव पर विषेश                  भगवान परशुराम त्रेता युग (रामाय...
22/04/2023

#भगवान_परशुरामजी

#वैशाख_शुक्ल_तृतीया/ #प्रकटोत्सव पर विषेश

भगवान परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। जो भगवान विष्णु के छठा अवतार हैं। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ।
वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ।
तदनन्तर कैलाश गिरिश्रृंग पर स्थित भगवान शंकर के आश्रम में विद्या प्राप्त कर विशिष्ट दिव्यास्त्र विद्युदभि नामक परशु प्राप्त किया। शिवजी से उन्हें श्रीकृष्ण का त्रैलोक्य विजय कवच, स्तवराज स्तोत्र एवं मन्त्र कल्पतरु भी प्राप्त हुए। चक्रतीर्थ में किये कठिन तप से प्रसन्न हो भगवान विष्णु ने उन्हें त्रेता में रामावतार होने पर तेजोहरण के उपरान्त कल्पान्त पर्यन्त तपस्यारत भूलोक पर रहने का वर दिया।
वे शस्त्रविद्या के महान गुरु थे। उन्होंने भीष्म, द्रोण व कर्ण को शस्त्रविद्या प्रदान की थी। उन्होनें कर्ण को श्राप भी दिया था। उन्होंने एकादश छन्दयुक्त *शिव पंचत्वारिंशनाम स्तोत्र* भी लिखा। इच्छित फल-प्रदाता परशुराम गायत्री है- *ॐ जामदग्न्याय विद्महे महावीराय धीमहि, तन्नः परशुराम: प्रचोदयात्।* वे पुरुषों के लिये आजीवन एक पत्नीव्रत के पक्षधर थे।
उन्होंने अत्रि की पत्नी अनसूया, अगस्त्य की पत्नी लोपामुद्रा व अपने प्रिय शिष्य अकृतवण के सहयोग से विराट नारी-जागृति-अभियान का संचालन भी किया था। अवशेष कार्यो में कल्कि अवतार होने पर उनका गुरुपद ग्रहण कर उन्हें शस्त्रविद्या प्रदान करना भी बताया गया है। भगवान परशुराम जी को चिरंजीवी होने का वरदान भी प्राप्त है।
परशुरामजी का उल्लेख रामायण, महाभारत, भागवत पुराण और कल्कि पुराण इत्यादि अनेक ग्रन्थों में किया गया है। वे अहंकारी और धृष्ट हैहय वंशी क्षत्रियों का पृथ्वी से 21 बार संहार करने के लिए प्रसिद्ध हैं। वे धरती पर वैदिक संस्कृति का प्रचार-प्रसार करना चाहते थे। कहा जाता है कि भारत के अधिकांश ग्राम उन्हीं के द्वारा बसाये गये। जिस मे कोंकण, गोवा एवं केरल का समावेश है।
पौराणिक कथा के अनुसार भगवान परशुराम ने तिर चला कर गुजरात से लेकर केरला तक समुद्र को पिछे धकेल ते हुए नई भूमि का निर्माण किया। और इसी कारण कोंकण, गोवा और केरला मे भगवान परशुराम वंदनीय है। वे भार्गव गोत्र की सबसे आज्ञाकारी सन्तानों में से एक थे, जो सदैव अपने गुरुजनों और माता पिता की आज्ञा का पालन करते थे। वे सदा बड़ों का सम्मान करते थे और कभी भी उनकी अवहेलना नहीं करते थे।
उनका भाव इस जीव सृष्टि को इसके प्राकृतिक सौंदर्य सहित जीवन्त बनाये रखना था। वे चाहते थे कि यह सारी सृष्टि पशु पक्षियों, वृक्षों, फल फूल औए समूची प्रकृति के लिए जीवन्त रहे। उनका कहना था कि राजा का धर्म वैदिक जीवन का प्रसार करना है नाकि अपनी प्रजा से आज्ञापालन करवाना। वे एक ब्राह्मण के रूप में जन्में अवश्य थे लेकिन कर्म से एक क्षत्रिय थे। उन्हें भार्गव के नाम से भी जाना जाता है।
यह भी ज्ञात है कि परशुराम ने अधिकांश विद्याएँ अपनी बाल्यावस्था में ही अपनी माता की शिक्षाओं से सीख ली थीँ (वह शिक्षा जो 8 वर्ष से कम आयु वाले बालको को दी जाती है)। वे पशु-पक्षियों तक की भाषा समझते थे और उनसे बात कर सकते थे। यहाँ तक कि कई खूँख्वार वनैले पशु भी उनके स्पर्श मात्र से ही उनके मित्र बन जाते थे।
उन्होंने सैन्यशिक्षा केवल ब्राह्मणों को ही दी। लेकिन इसके कुछ अपवाद भी हैं जैसे भीष्म, कर्ण *गुरु द्रोण*, कौरव-पाण्डवों के गुरु व अश्वत्थामा के पिता।
कर्ण को यह ज्ञात नहीं था कि वह जन्म से क्षत्रिय है। वह सदैव ही स्वयं को शुद्र समझता रहा लेकिन उसका सामर्थ्य छुपा न रह सका। उन्होंने परशु राम को यह बात नहीं बताई की वह शुद्र वर्ण के है। और भगवान परशुराम से शिक्षा प्राप्त कर ली।
किन्तु जब परशुराम को इसका ज्ञान हुआ तो उन्होंने कर्ण को यह श्राप दिया की उनका सिखाया हुआ सारा ज्ञान उसके किसी काम नहीं आएगा जब उसे उसकी सर्वाधिक आवश्यकता होगी।इसलिए जब कुरुक्षेत्र के युद्ध में कर्ण और अर्जुन आमने सामने होते है तब वह अर्जुन द्वारा मार दिया जाता है क्योंकि उस समय कर्ण को ब्रह्मास्त्र चलाने का ज्ञान ध्यान में ही नहीं रहा।

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

 #अक्षय_तृतीय            #वैशाख_शुक्ल_तृतीया/  #अक्षय_तृतीया पर विषेश                  अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास...
22/04/2023

#अक्षय_तृतीय

#वैशाख_शुक्ल_तृतीया/ #अक्षय_तृतीया पर विषेश

अक्षय तृतीया या आखा तीज वैशाख मास में शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को कहते हैं। पौराणिक ग्रन्थों के अनुसार इस दिन जो भी शुभ कार्य किये जाते हैं, उनका अक्षय फल मिलता है। इसी कारण इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है। वैसे तो सभी बारह महीनों की शुक्ल पक्षीय तृतीया शुभ होती है, किंतु वैशाख माह की तिथि स्वयंसिद्ध मुहूर्तो में मानी गई है।
मान्यता है कि इस दिन बिना कोई पञ्चाङ्ग देखे कोई भी शुभ व मांगलिक कार्य जैसे विवाह, गृह-प्रवेश, वस्त्र-आभूषणों की खरीददारी या घर, भूखंड, वाहन आदि की खरीददारी से सम्बन्धित कार्य किए जा सकते हैं। नवीन वस्त्र, आभूषण आदि धारण करने और नई संस्था, समाज आदि की स्थापना या उदघाटन का कार्य श्रेष्ठ माना जाता है।
पुराणों में लिखा है कि इस दिन पितरों को किया गया तर्पण तथा पिन्डदान अथवा किसी और प्रकार का दान, अक्षय फल प्रदान करता है। इस दिन गंगा स्नान करने से तथा भगवत पूजन से समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं। यहाँ तक कि इस दिन किया गया जप, तप, हवन, स्वाध्याय और दान भी अक्षय हो जाता है। यह तिथि यदि सोमवार तथा रोहिणी नक्षत्र के दिन आए तो इस दिन किए गए दान, जप-तप का फल बहुत अधिक बढ़ जाता हैं।
इसके अतिरिक्त यदि यह तृतीया मध्याह्न से पहले शुरू होकर प्रदोष काल तक रहे तो बहुत ही श्रेष्ठ मानी जाती है। यह भी माना जाता है कि आज के दिन मनुष्य अपने या स्वजनों द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों की सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा प्रार्थना करे तो भगवान उसके अपराधों को क्षमा कर देते हैं और उसे सदगुण प्रदान करते हैं, अतः आज के दिन अपने दुर्गुणों को भगवान के चरणों में सदा के लिए अर्पित कर उनसे सदगुणों का वरदान माँगने की परम्परा भी है।
बुंदेलखंड में अक्षय तृतीया से प्रारंभ होकर पूर्णिमा तक बडी धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है, जिसमें कुँवारी कन्याएँ अपने भाई, पिता तथा गाँव-घर और कुटुंब के लोगों को शगुन बाँटती हैं और गीत गाती हैं। अक्षय तृतीया को राजस्थान में वर्षा के लिए शगुन निकाला जाता है, वर्षा की कामना की जाती है, लड़कियाँ झुंड बनाकर घर-घर जाकर शगुन गीत गाती हैं और लड़के पतङ्ग उड़ाते हैं।
यहाँ इस दिन सात तरह के अन्नों से पूजा की जाती है। मालवा में नए घड़े के ऊपर ख़रबूज़ा और आम के पल्लव रख कर पूजा होती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन कृषि कार्य का आरम्भ किसानों को समृद्धि देता है।

े_जैसे_घटा,
#वैसे_ही_हो_धन_की_वर्षा,
#मंगलमय_हो_आपको_यह_त्यौहार,
#आपके_जीवन_में_बार_बार_आए_अक्षय_तृतीया_का_त्यौहार.

्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

भाई विजय शर्मा जी की कलम से दैनिक सवेरा टाईम्स समाचार पत्र के माध्यम से साभार। ्री_राम_वंदे_गौ_मातरम
20/04/2023

भाई विजय शर्मा जी की कलम से दैनिक सवेरा टाईम्स समाचार पत्र के माध्यम से साभार।
्री_राम_वंदे_गौ_मातरम

भाई निर्मलजीत अरोड़ा जी की कलम से दैनिक आगाज़ वीर समाचार पत्र के माध्यम से साभार। ्री_राम_वंदे_गौ_मातरम
18/04/2023

भाई निर्मलजीत अरोड़ा जी की कलम से दैनिक आगाज़ वीर समाचार पत्र के माध्यम से साभार।
्री_राम_वंदे_गौ_मातरम

पंजाब के फिरोजपुर शहर में गत छह दिनों से चल रही श्री सनातन धर्म प्रचार एंड वैलफेयर सोसाइटी फिरोजपुर शहर की और से आयोजित ...
17/04/2023

पंजाब के फिरोजपुर शहर में गत छह दिनों से चल रही श्री सनातन धर्म प्रचार एंड वैलफेयर सोसाइटी फिरोजपुर शहर की और से आयोजित श्रीमद्भागवत सप्ताह में वशिष्ठ अतिथि के तौर पर फिरोजपुर से गौ पुत्र सेना के कार्यकर्ता भी पहुंचे। वहां गौ पुत्रों ने व्यास पीठ पर सुशोभित सुप्रसिद्ध कथावाचक परम् आदरणीय पूज्य आचार्य श्री राम जी महाराज गोरेगांव जी का धाम आश्रम वृंदावन मथुरा वालों के मुखारविंद से उनकी मधुर वाणी में श्रीमद्भागवत कथा श्रवण की सभी गौ पुत्रों को आयोजन समिति के सदस्यों एवं व्यास पीठ पर सुशोभित परम् आदरणीय आचार्य श्री राम जी महाराज ने अपने शुभ हाथों से सम्मान चिन्ह भेंट कर आशीर्वाद दिया।गौ पुत्रों ने कहा कि हम इस सबके लिए श्री सनातन धर्म प्रचार एंड वैलफेयर सोसाइटी फिरोजपुर शहर का हार्दिक धन्यवाद एवं आभार व्यक्त करते हैं।

्री_राम_वंदे_गौ_मातरम
✍️

फूल नहीं चिंगारी हैं, यह भारत की नारी हैं।जो इनसे टकराएगा,वह चूर चूर हो जाएगा।"सृष्टि की रचना में,                    अग...
08/03/2023

फूल नहीं चिंगारी हैं,
यह भारत की नारी हैं।
जो इनसे टकराएगा,
वह चूर चूर हो जाएगा।

"सृष्टि की रचना में,
अगर साझेंदारी कर सकती है!
"इसका अर्थ है,
शक्ति शिव को अवतारी कर सकती है!
पुरुषों जैसा बनने में यूँ निज मौलिकता क्या खोना
कोई नही कर सकता है वह
जो भारतीय नारी कर सकती है

#अंतर्राष्ट्रीय_महिला_दिवस
की हार्दिक शुभकामनाएं।

्री_राम_वंदे_गौ_मातरम
✍️

आप सभी  #गौरक्षकों_गौसेवकों_व_गौभक्तों को  #प्रेम_सद्भाव_समाजिक_समरसता_के_प्रतीक एवं  #अन्याय_व_अधर्म_पर_सत्य_की_जीत के ...
07/03/2023

आप सभी #गौरक्षकों_गौसेवकों_व_गौभक्तों को #प्रेम_सद्भाव_समाजिक_समरसता_के_प्रतीक एवं #अन्याय_व_अधर्म_पर_सत्य_की_जीत के #महापर्व_होलिका_दहन की #हार्दिक_शुभकामनाएं।

#भक्त_प्रहलाद_की_जय
्री_कृष्ण_वंदे_गौ_मातरम

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