Chamba Tehri Garhwal Uttarakhand

Chamba Tehri Garhwal Uttarakhand चम्बा वाला सभी लोगु तक ये पेज का जरिया

चम्बा का बारा मा बहुत लोगुन ज्यादा नि सुनि होलू पर चम्बा एक अलग छाप रखन वालू टिहरी जिला कु एक मशहूर शहर छ .. चम्बा टिहरी का डूबना का बाद टिहरी की जगह लेण वालू शहर की भूमिका बखूबी निभोंन लग्युं ..चम्बा वाला सभी लोगु तक ये पेज का जरिया सभि भै-बन्ध अपड़ा विचार सेवा सत्कार अच्छी नखरी जू भी बात छ आपस मा साझा करला

★जनचेतना का एक गिलहरी प्रयास★हाईवे पर किसी सस्ते ढाबे में खाना खाइये, menu में कम से कम 6 आइटम  #पनीर के होंगे5स्टार होट...
17/12/2025

★जनचेतना का एक गिलहरी प्रयास★

हाईवे पर किसी सस्ते ढाबे में खाना खाइये, menu में कम से कम 6 आइटम #पनीर के होंगे

5स्टार होटल में जाइये, #वेजीटेरियन सेक्शन में 60% डिशेज़ पनीर की होती है

30 रु में 6 पनीर मोमोज मिलते हैं?
50 रु में पनीर पिज़्ज़ा?
100 रु में बटर पनीर ?
40 रु मे पनीर कुलचा?

आज से 10 साल पहले भी जब मैं कहता था कि मैं पनीर नही खाता तो लोग कहते थे इतनी हाई #प्रोटीन चीज़ नही खाते??

तब भी मुझे लगता था कि पनीर असली नही है

फिर मैंने घर पर मेरी माँ को फटे हुए दूध से पनीर बनाते हुए देखा क्योंकि उन्हें पनीर पसंद है
फिर हिसाब लगाया कि यदि मैं 70 रु में 1 लीटर #अमूल का full क्रीम दूध लेता हूँ जिसमे से करीब 200 ग्राम पनीर मिलता है
इस हिसाब से यदि 1किलो पनीर बनाना हो तो मुझे 5 लीटर दूध की आवश्यकता पड़ेगी जिसकी कीमत 350 रु होगी
यानी अगर असली #दूघ का पनीर बनाया जाए तो उसकी लागत कम से कम 350 रु तो होगी ही ,फुटकर रूप में
यदि ये मान लिया जाते कि दूध का फैक्ट्री मूल्य 50 रु प्रति लीटर भी हो तो भी 250 रु सिर्फ दूध की लागत होगी
अब यदि इसमें लेबर cost, गैस ,ईंधन जोड़ लिया जाए तो ये लागत 60 रु पहुंच जायेगी
अन यदि इसमें सप्लाई chain, लॉजिस्टिक भी जोड़ लिया जाए तो ये लागत 63 रु पहुंच जाती है

यानी कि कम से कम 315 रु का एक किलो पनीर

अब यदि कोई दुकानदार इसे 10% प्रॉफिट पर भी बेचे जो कि इससे कहीं ज्यादा पर बेचता है तो ग्राहक को ये लागत कम से कम 345 से 350 रु प्रति किलो पड़नी चाहिए

अब यदि आप कोई पनीर 200 रु किलो या 250 रु किलो के भाव से खरीदते हैं तो क्या दुकानदार ने दानखाता खोल रखा है जो लागत से भी 25% कम पर आपको पनीर बेचेगा?

असली पनीर की कीमत और मात्रा जाननी है तो घर पनीर बना कर देखिए अंदाज़ा हो जायेगा

फिर आता है एनालॉग पनीर ...यानी पनीर जैसा दिखने वाला और पनीर के टेक्सचर जैसा पदार्थ जिसके मूल इंग्रेडिएंट्स पाउडर का दूध, वनस्पति फैट, पाम आयल, अरारोट, स्टेबलाइजर और डेवलपिंग एजेंट्स होते हैं। अब चूंकि पाउडर मिल्क में फैट नही होता तो उसके लिए डालडा और पाम आयल मिलाया जाता है जिससे घनत्व बढ़ जाये। ये वही तेल हैं तो आर्टरी में जम जाते हैं । ये एनालॉग पनीर आपको बड़े बड़े 5 star होटल में भी मिलता है चाहे आप पनीर टिक्का खा रहे हों या पनीर दो प्याजा..

उससे भी निचली श्रेणी में आता है यूरिया ,डिटर्जेंट और मैदे के घोल से बना पनीर.. यानी वो पनीर जिसे आप 30 रु के 6 #मोमोज़ में स्वाद लेकर खाते है या फिर 50 रु में पनीर लोडेड #पिज़्ज़ा #बर्गर में खाते हैं
ये यूरिया सीधे आपकी किडनी और लीवर पर घात लगता है साथ ही लंबे समय तक खाने पर जानलेवा भी सिद्ध हो सकता है

भारत मे प्रति दिन दूध का उत्पादन 64 करोड़ लीटर होता है
यदि इस सारे दूध को फाड़कर यदि पनीर बना दिया जाए तो करीब 1 करोड़ 20 लाख किलो पनीर बन सकता है

लेकिन प्रति दिन पनीर की खपत करीब करीब 15000 टन है

क्या ये संभब है कि 1 करोड़ 50 लाख किलो पनीर 64 करोड़ लीटर दूध से बन पाए???

बाजार में मिलने वाला 80% से भी ज्यादा पनीर नकली है
इसने रोड साइड से लेकर 5स्टार होटल भी नकली पनीर खिला रहे हैं

क्या वजह है कि पिछले 30 सालों मे लीवर और किडनी की बीमारी में तेज़ी से इज़ाफ़ा हुआ है???

कभी जाकर देखिए छोटी छोटी गलियों के भीतर उबलते हुए उन भगोनों को जिनमे यूरिया उबल रहा है

जो लोग उसे बना रहे हैं उनसे कहिये की अपने बने पनीर को खाकर दिखाएं

अगली बार जब आप किसी होटल में पनीर की डिश आर्डर करें तो कहिएगा एक टुकड़ा कच्चा पनीर लाकर आपको दिखाएं
शर्त लगा सकता हूँ कि वो हज़ार बहाने बनाएंगे
इसे मैं आज़मा कर देख चुका हूँ
एक रेस्टोरेन्ट वाले ने तो ये भी कह दिया कि आपको खाना है तो खाओ वरना जाओ..लेकिन हम सैंपल नही दिखाएंगे

पनीर ही नही कमोबेश यही हाल मावे और मिठाइयों का है
एक किलो काजू की कीमत 1000 रु है । एक किलो काजू से एक किलो बर्फी नही बन सकती । उसमे यदि चीनी और मावा की मात्रा भी add कर दें तब भी ज्यादा से ज्यादा 600 ग्राम से ज्यादा dough नही निकल सकता । फिर आपको 1000 रु में काजू कतली कैसे मिल जाती है???

ये मावा भी उसी यूरिया ,डिटर्जेंट और अरारोट वाले दूध से बनता है जिसे बड़े बड़े शोरूम वालों से लेकर सड़क छाप हलवाई खरीदते हैं । फिर उसमें नाम मात्र का काजू डालकर बाकी मिठाई मूंगफली और कद्दू के बीज और मैदे से बनाई जाती है

#मिल्क_प्रोडक्ट सबसे बड़े scam हैं आज की तारिख़ में
दुर्भाग्य से सरकार भी कुछ नही कर पा रही
नकली प्रोडक्ट हर दिन पकड़े जाते हैं लेकिन हमारे कानून में उसके लिए कुछ जुर्माना या छोटी मोटी सज़ा होती है । उनसे होने वाली लाखों इनडाइरेक्ट मौतों का जिम्मेदार उन्हें नही माना जाता

सिर्फ एक ही उपाय है जागरूकता और इन्फॉर्मेशन शेयरिंग

वरना इंसान कीड़े मकोड़ों की तरह मरेंगे ओर कीड़े मकोड़े लंबे जिएंगे

07/11/2025

आज स्वामी रामतीर्थ परिसर बादशाहीथौल की यह स्थिति हो चुकी है कि परिसर के अंदर पार्किंग की व्यवस्था के लिऐ बना दिया गया है जिसमें सभी गाड़िया यू०पी०, हरियाणा, दिल्ली , चंडीगढ़ की नजर आ रही हैं जब निदेशक महोदय से वार्ता की गई तो उनका जवाब था कि जिलाधिकारी द्वारा निर्देश किया गया था

मुख्य बिन्दु

● जब परिसर के फील्ड को ठीक कराना था तब निदेशक महोदय के पास कोई जवाब नहीं था.।
● छात्र संघ के द्वारा स्ट्रीट लाइट लगवाने को कहा गया तब महोदय के पास कोई जवाब नहीं था ।
जिसमें निदेशक महोदय से वार्ता की गई तो निदेशक महोदय के द्वारा शासन प्रसाशन के द्वारा पार्किंग की सुविधा देने को कहा गया महोदय आपको अवगत होगा कि मुख्य गेट से लेकर महिला छात्रावास तक कोई भी लाइट की सुविधा नहीं है और जिस समय गाड़ी पार्किंग वहाँ की गई थी उस समय महिलाओं तथा पुरुषों का छात्रावास में जाने का समय था छात्र छात्राओं को जिन समस्याओं से गुजरना पड़ा उसकी भरपाई निदेशक महोदय को करनी पड़ेगी।
निदेशक महोदय से प्रश्न-
आज यदि इतनी पार्किंग की असुविधा छात्रावास के छात्र-छात्राओं के लिए आपके द्वारा उठायी जा रही है -
● तो यह असुविधा तब क्यों नहीं जब स्ट्रीट लाइट की कोई सुविधा नहीं
● जब बच्चों के लिए समय पर पानी की उपलब्धता नहीं
● जब छात्र छात्राओं की कक्षाओं का सुचारू रूप से न चलना
● शिक्षकों का समय से पहले घर चले जाना


छात्र छात्राओं के लिए किसी भी प्रकार की असुविधा बर्दाश्त नहीं कि जाएगी ।

टिहरी डीएम इवेंट मैनेजमेंट का‌म अच्छे से करतीं हैं, छात्र संगठन क्यों चुप है पता नहीं। अब वो आग नहीं जो मोहन सिंह रावत जी और न जाने कितने संघर्षशील युवाओं में हुआ करतीं थीं।

07/11/2025

सूत्रों से खबर है कि चम्बा में चल रहे अस्पताल में बुनियादी सुविधाओं के लिए जन आंदोलन को तोड़ने को तैयार है सरकार। इस सप्ताह आंदोलनकारियों जेल भेजने की है सम्भावना। राज्य की 25 वीं वर्षगांठ पर मिल सकती है सौगात।

04/11/2025

दिनांक: 4 नवम्बर 2025
सेवा में,

समस्त सम्मानित नागरिक/निवासी
चम्बा
टिहरी गढ़वाल
विषय: हमारे स्थानीय अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था और खराब सुविधाओं के विरुद्ध शांतिपूर्ण धरने हेतु जनसमर्थन के लिए अनुरोध।

आदरणीय नागरिकों/निवासियों,

हम यह पत्र आप सभी का ध्यान हमारे क्षेत्र के चम्बा सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र अस्पताल की दयनीय स्थिति और अपर्याप्त चिकित्सा सुविधाओं की ओर आकर्षित करने के लिए लिख रहे हैं । यह अस्पताल हमारे समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा संस्थान है, लेकिन वर्तमान में यह संतोषजनक सेवाएं प्रदान करने में पूरी तरह असमर्थ है।

हम निम्नलिखित प्रमुख समस्याओं का सामना कर रहे हैं:-
चिकित्सा कर्मचारियों की भारी कमी: डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी के कारण मरीजों को उचित देखभाल नहीं मिल पा रही है।
अपर्याप्त चिकित्सा आपूर्ति और खराब उपकरण: कई आवश्यक जीवन रक्षक दवाइयां उपलब्ध नहीं हैं और उपकरण अक्सर खराब रहते हैं।
साफ-सफाई की कमी: अस्पताल परिसर में स्वच्छता की स्थिति बेहद खराब है, जिससे संक्रमण का खतरा बना रहता है।
बुनियादी ढांचे का अभाव: मरीजों और उनके परिजनों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जिसमे खून की जांच, एक्सरे और अल्ट्रासाउंड मशीन एवं रेडियो लोजिस्ट की उचित व्यवस्था का न होना शामिल है।

हमारी शासन प्रशासन से अस्पताल सम्बंधित मांगे निम्नलिखित हैं:-

1- खून की जांच की उच्च तकनीकी गुणवत्ता की मशीनें जैसे CBC/TROPONIN टेस्ट मशीन / लिपिड़
प्रोफाइल टैस्टिंग मशीन तथा अन्य खून की जांच सम्बन्धी मशीनें।
2-नियमित सर्जन की नियुक्ति ।
3-महिला रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति।
5- बालरोग विशेषज्ञ की नियुक्ति।
4-दवाईयों की उपलब्धता मुख्य समस्या है। आमजन को समय-समय पर दवाईयों के लिए बाहर जाना पड़ा है।
5-पूर्व की भांति चम्बा में अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था की जाए एवं रेडियोलॉजिस्ट की भी व्यवस्था की जाए
6-विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में अस्पताल में जनरेटर की व्यवस्था की जाए।
7- P.H.C की विल्डींग को C.H.C मे परिवर्तन करना।
8- अस्पताल में रात्री के समय देखभाल हेतु सुरक्षाकर्मी की आवश्कता।
9- ब्लाक अस्पताल P.H.C से C.H.C तो कागजों में बन गया किन्तु अभी भी P.H.C की विलडिंग पर
C.H.C चल रहा है। आपसे निवेदन है कि C.H.C के मानको के तहत ब्लाक चम्बा को पूर्ण किया जाए।
10-मुख्य चौहाराये से ब्लॉक अस्पताल तक की सड़क पर मरम्मत कार्य किया जाऐ।
11- ब्लॉक रोड को one way road किया जाए ताकी 108 वा मरीजों को लाने में दिक्कतों का सामना ना
करना पड़े ब्लॉक रोड पर थाने चम्बा द्वारा एक पुलिस कार्य को व्यवस्था हेतु नियमित किया जाऐ।
12- DM टिहरी के पास DEIC का जो रेसकोर्स का प्रस्ताव है उस फाइल को आगे पास करना है
13- AIIMS Satellite centre को स्थापित किया जाए।
14- जिला अस्पताल और ब्लॉक अस्पताल में बच्चों के लिए एक NICU भी नही है।
15- ह‌ड्डियों के डॉक्टर की नियुक्ति।

उपरोक्त न होने के कारण मरीजों और चिकित्सा कर्मचारियों, दोनों को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों को बार-बार शिकायत करने के बावजूद, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है।
अतः, हमने इन ज्वलंत मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करने और उचित समाधान की मांग करने के लिए दिनांक 29 अक्टूबर 2024 से अनिश्चित कालीन धरना अस्पताल परिसर के बाहर एक शांतिपूर्ण धरना आयोजित करने का निर्णय लिया था जो कि चम्बा श्री देव सुमन स्मारक के पास स्थानांतरित कर दिया गया है।
यह आंदोलन हमारे और हमारे प्रियजनों के स्वास्थ्य के अधिकार के लिए है। इस प्रयास की सफलता के लिए आपकी उपस्थिति, समर्थन और भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। आपकी सक्रिय भागीदारी हमारे विरोध को मजबूत करेगी और अधिकारियों को कार्रवाई करने के लिए मजबूर करेगी।
हम आप सभी से अनुरोध करते हैं कि इस जनहित के कार्य में हमारा साथ दें।
धन्यवाद।

भवदीय,

चम्बा अस्पताल जन आंदोलन समिति

📢 चंबा के ब्लॉक अस्पताल की दुर्दशा के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना! आपका साथ जरूरी!​नमस्कार साथियों,​हम सभी जानते हैं कि शिक...
29/10/2025

📢 चंबा के ब्लॉक अस्पताल की दुर्दशा के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना! आपका साथ जरूरी!

​नमस्कार साथियों,
​हम सभी जानते हैं कि शिक्षा, स्वास्थ्य और जल किसी भी समाज की मूल आवश्यकताएं हैं, लेकिन आज पहाड़ों में स्वास्थ्य सेवाओं की दयनीय स्थिति किसी से छिपी नहीं है।
​चंबा, जो हज़ारों गाँवों के लिए एकमात्र बाज़ार है, यहाँ के ब्लॉक अस्पताल/उप-जिला अस्पताल की भयावह दुर्दशा से हम सब वाकिफ हैं। इस अस्पताल के हालात सुधारने के लिए बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई!
​हमने 21/10/2025 को ज़िला अधिकारी महोदय को ज्ञापन भेजा था।
​इससे पहले भी कई बार ज़िला अधिकारी महोदय को यहाँ की दुर्दशा से अवगत कराया गया।
​लेकिन प्रशासन ने कोई संतोषजनक कदम नहीं उठाया।
​इसी के विरोध में, हम सबने मिलकर कल यानी 29/10/2025 से अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है।
​यह लड़ाई सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि पूरे चंबा क्षेत्र के हर नागरिक के बेहतर स्वास्थ्य के अधिकार के लिए है।
​हमारा निवेदन है कि आप सभी इस संघर्ष में हमारा साथ दें, हमारा समर्थन करें, ताकि हम अपने हकों के लिए आवाज़ बुलंद कर सकें और चंबा के ब्लॉक/उप-जिला अस्पताल को एक बेहतर स्वास्थ्य केंद्र बना सकें!
​आइए, सब मिलकर इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपनी एकजुटता दिखाएं!

यह अपील भाई अंकित सजवाण Ankit Sajwan II एवं भाई रविंद्र रावत के द्वारा की गई एवं जनसहयोग के लिए अपील की गई है। दोनों भाइयों का इस कदम के लिए हार्दिक धन्यवाद। आप दोनों ने दलगत राजनीति से हटते हुए क्षेत्र की समस्याओं को सर्वोपरि रख शून्य विपक्ष की इस टिहरी विधानसभा में भाजपा से सम्बन्धित होने के बावजूद क्षेत्र के जनमानस के लिए एक महत्वपूर्ण मुहिम छेड़ी है आज क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों को इस आंदोलन में शामिल होकर अपनी और आने वाली पीढियां की स्वास्थ्य समस्याओं को दुरुस्त करने के लिए अग्रसर होना होगा।

02/08/2025
13/03/2025

हमारे देवी-देवताओं, पूर्वजों के नदी, जंगल, पहाड़ पर पुनः अधिकार कैसे मिलेगा?

उत्तराखंड पर्वतीय क्षेत्र में 5वीं अनुसूची (5th Schedule) पुनः लागू करने के तर्क

1) ऐतिहासिक रूप से उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में ट्राइबल कानून पहले से लागू थे:

1921: इसे Non-Regulation Area घोषित किया गया।
1931: Scheduled Districts Act लागू किया गया था।
1935: इसे Excluded Area (बहिष्कृत क्षेत्र) घोषित किया गया।
1950: भारत के संविधान में इन क्षेत्रों को 5वीं या 6वीं अनुसूची में शामिल किया गया और वहां के मूलनिवासियों को Tribe Status दिया गया।
1972: उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में 5वीं अनुसूची लागू करने के बजाय, ब्रिटिश काल के यह Tribal Laws हटा दिए गए और वनों का अधिकार वन विभाग को दे दिया गया।

1965 की लोकुर कमेटी (Lokur Committee) की परिभाषा के अनुसार, उत्तराखंड का पहाड़ी समुदाय जनजातीय मानकों पर खरा उतरता है:
लोकुर कमेटी के चार मुख्य मानक:
1. विशेष भौगोलिक स्थिति – दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र, कठिन जीवनशैली।
2. विशिष्ट संस्कृति – पारंपरिक देवी-देवता, खान-पान, रीति-रिवाज, भाषा।
3. सामाजिक एवं आर्थिक पिछड़ापन – सीमित संसाधन, कम रोजगार अवसर।
4. आदिम लक्षण व पारंपरिक कृषि प्रणाली – बिना मशीन, बिना केमिकल, बिना सिंचाई की खेती, कई बार बिना बैल के ही खेती होती है।

👉 इन्हीं मानकों पर जौनसारी, हिमाचल के गद्दी, कश्मीर के पहाड़ी समुदाय, कई नेपाली समुदायों को ट्राइब स्टेटस दिया गया। फिर गढ़वाल और कुमाऊं को क्यों नहीं?

3) उत्तराखंड का 85% हिस्सा वन क्षेत्र है – यह हमें स्वाभाविक रूप से “वनवासी” बनाता है।
-पहाड़ के लोगों का जीवन जंगलों से जुड़ा था, लेकिन 1972 में वन विभाग ने अधिकार छीन लिए।
-यदि अन्य राज्यों में जंगल से जुड़े समुदायों को ट्राइब स्टेटस मिला है, तो उत्तराखंड के लोगों को क्यों नहीं?

4) देश के अन्य हिमालयी राज्यों को ट्राइब स्टेटस मिला, लेकिन उत्तराखंड को नहीं!
-अरुणाचल, सिक्किम, लद्दाख, नागालैंड, मिज़ोरम, मेघालय जैसे सभी हिमालयी राज्यों के मूलनिवासियों को ST दर्जा और 5वीं अनुसूची का संरक्षण मिला।
-तो उत्तराखंड के गढ़वाल-कुमाऊं के मूलनिवासियों को यह हक क्यों नहीं?

5th Schedule की मांग करने वालों के लिए यह तर्क महत्वपूर्ण हैं:

1. हमारा क्षेत्र पहले से बहिष्कृत (Excluded) था।
2. हमारी संस्कृति और जीवनशैली आदिवासी मानकों पर खड़ी उतरती है।
3. हमारे अधिकार 1972 में छीने गए, जिन्हें वापस पाना जरूरी है।
4. हमारे जंगल, जमीन, संसाधन हमारे पूर्वजों और देवी-देवताओं की धरोहर हैं, जिन्हें पुनः पाना ही न्याय है।

“अगर हिमालय के अन्य राज्यों को ट्राइब स्टेटस मिला है, तो उत्तराखंड को क्यों नहीं?”
“5वीं अनुसूची लागू करो – पहाड़ के मूलनिवासियों को उनका अधिकार दो!”

—उत्तराखंड एकता जिन्दाबाद

चम्बा का मूल निवासी

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Chamba

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