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Khejara Express पर्यावरण से सम्बंधित सभी जानकारीया आ?

पर्यावरण, आध्यात्मिक एवं
समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य
रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व
का अग्रणी शास्त्र
खेजड़ा एक्सप्रेस पूरा पढ़ने से शास्त्र का
पूण्य मिलेगा

09/09/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 2 वर्ष 39दिंनाक 9-.9-26पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
वार्षिक 36 रुपये मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर _25_25_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृतिए माता.पिता. गुरु. प्रकृति
वनस्पतिए तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्मvकर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी विश्वविद्यालय से सम्मानित
24 अगस्त को पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के 39 वें सफर का शुभारंभ अंक का विमोचन पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस कार्यालय कर्मस्थली प्रकृति शक्ति पीठ में यज्ञ करके किया। इस संदर्भ में खेजड़ा एक्सप्रेस संपादक ने बताया किवर्षों से पर्यावरण संरक्षण कार्य कर रहे हैं
आप भी पर्यावरण संरक्षण कार्य के लिए आईए यज्ञ करें पेड़ पौधों को तैयार करें पेड़ पौधे लगाने का।
तुलसी पीपल नीम जामुन गिलोय आदि लगाएं।
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्म स्थल ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ की
वर्षों से चल रही सेवा से निशुल्क पेड़ पौधों का लाभ ले ।
भगवानाराम

ध्वनि प्रदूषण की पालना नहीं होती है तो कोई लाभ नहीं है पर
सुप्रीम कोर्ट आदेश 18 जुलाई 2025 की
ध्वनि प्रदूषण पढ़े तो पता चले लिखा है घर की टीवी कि आवाज पडोसी को नहीं सुनाई देनी चाहिए तो मंदिर मस्जिदों अदि धर्मस्थलो में स्पीकर क्यों बज रहे हैं ! किस शास्त्र में लिखा है?
जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है ध्वनि प्रदूषण से बहरापन ,गूंगापन, चिडचिडापन,अपंगता ,ब्लडप्रेषर अदि की गंभीर बीमारियाँ होती है तथा अनेक प्रकार के नुकसान बताये है !
ध्वनि प्रदूषण से पेड़ पौधों , पशु पक्षियों को भारी नुकसान होता है फिर भी रातभर विवाह ,समारोह ,आडम्बरी जागरण के साथ बारात में कर्कष आवाज के डीजे बजाते है तथा पटाखों के खतरनाक शोर से ओर भी भयावना प्रदूषण करते है !
कोरोना काल में ताली ,थाली ,दीपक में भी पटाखों का खूब इस्तेमाल हुवा था हमने खूब विरोध भी किया जिससे हमें गन्दी गालियाँ ही मिली पर सरकार चुप ही रहे क्योंकि इन्होने कभी ध्वनि प्रदूषण पढ़ा भी तो नहीं
जैसे निष्चलानंद जी शंकराचार्य
जी कहते है हिंदू शब्द ऋग्वेद में है क्योंकि उन्होंने ऋग्वेद पढ़ा नहीं पढ़ा होता तो यह नहीं कहते जहाँ तक देखा भी नहीं होगा !
हमने विरोध किया तो गालियां ,बस इनके पास ये ही एक साधन है सत्य को जानना चाहते ही नहीं इन्हें नहीं पता
शब्द में शक्ति होती है और जिस शब्द का मूल अर्थ होता है वो शब्द उसी अर्थ के अनुसार वातावरण को प्रभावित करता है !
हिंदुत्व के शब्दों में संसार के वातावरण को प्रदूशित कर रखा है हम इस वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित करेंगे ! किसी में साहस है तो खुले मंच पर शास्त्रार्थ को आ जावो !
माँ प्रकृति ईश्वर है ! बाकी सब आडम्बर है,
धर्म स्थल दुकाने है इसका ज्वलंत उदाहरण कोरोना में सभी मंदिर ,मस्जिद अदि दुकानों की तरह बंद हो गए इनमें ईश्वर
होता तो भक्तों की रक्षा हो जाती !
ओम शब्द में शक्ति है फिर भी मूल ओम की विकृत आकृति लिखी जा रही जिससे संसार प्रभावित हो रहा है क्योंकि ओम की ध्वनि से ब्रह्माण्ड की रचना हुई ओम ही संसार के धर्म सनातन का प्रवर्तक है ! बाकी धर्म नहीं संप्रदाय है जो मनुष्यों ने बनाया है !
सनातन धर्म को 25 -08-14 से पहले सभी संत शंकराचार्य तथाकथित हिंदू धर्म बोलते थे हमारे अथक प्रयास से सनातन धर्म अगस्त चोदह से बोलना शुरू किया पर प्रचार प्रसार नहीं किया और न ही सनातन धर्म क्या है इसके बारे में जानकारी दी
नहीं दी है
इन्हे न तो सनातन धर्म संस्कृति का पूरा ज्ञान है और न ही इन्हे ये पता कि संसार का एक मात्र धर्म ईश्वर रचित सनातन धर्म है और बाकी मानव निर्मित सम्प्रदाय है।
सनातन धर्म क्यों पिछड़ गया है यह संत शंकराचार्य नहीं जानते।
इन्हे सनातन धर्म संस्कृति का पूर्ण ज्ञान हम जैसे वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक पुरुषों से लेना चाहिए और फिर प्रचार प्रसार करना चाहिए।
हम वर्षों से पूछ रहे हैं कि
संत शंकराचार्य अखाड़ा परिषद महामंडलेश्वर आदि को भगवा
सनातन धर्म ने दिया है
और इन्होंने भगवा से खूब मजे लिए हैं
पर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार नहीं किया और सनातन धर्म विश्व गुरु से सिमट कर अंतिम सांसे गिन रहा है क्यों क्यों
क्यों का उतर नहीं दे सकते तो अपने पद और भगवा का त्याग करें
और उतर हम देंगे।
दूसरा प्रश्न, संत पथ भ्रष्ट हो रहे झूठ कपट ठग बन रहे हैं क्यों इसका उतर दे नहीं तो पद भगवा से त्याग दे। उतर हम देंगे

महाभारत के बाद नाग वायरस फैला था और उसमें धरती पर पैर रखने से नाग का जहर चढ जाता था और मौत हो जाती थी ऐसे डरावने समय में ऋषि मुनियों कि सलाह ली गई थी और ऋशि मुनियों ने सलाह करके तीन सूत्र दिए ।
ऋशि मुनियों ने सूत्र दिए जिसमे पहले सूत्र से शस्त्रों
का इस्तेमाल बंद कर दिया ,
शस्त्र छुपा दिए थे ! और नाग वायरस से मुकाबला जावे
हां तो हम कह रहे थे शास्त्र छुपा दिए थे इन्ही शास्त्रों की खोज में भारत के मूल निवासियों यानि यदुवंषी जो भारत के यदुवंषी सुदूर चले गए थे उनके वंषज वापिस जब भारत आये तो उनके साथ यहूदी जासूस भी आये और यहाँ वो पढ़कर ब्राह्मण बने और उन्होंने संस्कृति का ज्ञान लेकर उन शास्त्रो की खोज करनी शुरू की जिन्हें नाग वायरस के समय छुपा दिए थे जिनमे षस्त्र निर्माण की विधियाँ लिखी हुई थी उन्हें खोज करके अपनी भाशा में बदलकर विदेष भेज दिए कुछ इस्लाम वालों को भी मिल गए थे !
आज भारत वर्श में भारत की आर्य संस्कृति सनातन धर्म के घटक व स्रोत बचाने वाला एक भी व्यक्ति नहीं है !
संत ,धार्मिक गुरु ,कथावाचक अदि भारतके षास्त्र संविधान की तो खुली धज्जियाँ उडा रहे है साथ ही गीता का भी घोर अपमान भी कर रहे है और ये ही आडम्बरी लोग गीता को राश्ट्र ग्रन्थ कराने का भी आडम्बर जोर षोर से कर रहे ताकि लोग इन्हें गीता भक्त कहते रहे पर हम खेजड़ा एक्सप्रेस तो इन्हें खुलेआम ललकारते है कि ये लोग गीता का घोर अपमान कर रहे है जिसे हम प्रमाणित कर सकते है कोई मंच इस पर खुली बहस करावे तो पता लगे ! गीता का अपमान से भी वायुमंडलमें प्रदूशण को बढ़ावा मिलता है !
यह संस्कृति के विनाषक ही पर्यावरण में जहर घोलते है और इनके षब्दों के प्रभाव से वायुमंडल प्रभावित होता है क्योंकि षब्द एक महाविज्ञान है इस समझना नितांत आवष्यक है !
!
जिसे ध्यान से पढोगे तो सूत्र का बहुत सा भाग आपको मिला जायेगा बाकी अपने विवेक से खोजो या हमारे पुराने अंक पढ़ो
!सुप्रीम कोर्ट को प्राणी कल्याण के लिए हमारे सूत्र के गुढ़ तत्व को वैज्ञानिकों को समझाने के लिए प्रार्थना पत्र स्वीकार करना चाहिए !
एक बात ओर जो बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसे सुप्रीम कोर्ट के साथ जनता को भी जान लेनी चाहिए !
हमने ऊपर लिखा भारत की मूल आर्य संस्कृति सनातन धर्म के घटक व स्रोत को बचाने वाला कोई नहीं है क्योंकि इन्हें पता ही नहीं है कारण साफ है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय,विष्वविद्यालय यह नहीं जानते कि ओम को शुद्ध आकृति कौनसी है ? सनातन और सनातन धर्म क्या है ? हिंदू ,हिंदू धर्म और हिंदुत्व क्या है ? भारत के चार नाम क्यों है ?
उपरोक्त विशयों की जानकरी ही नहीं है फिर भी फार्मो में हिंदू धर्म का काॅलम आता है और राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के आगे हिंदू धर्म लिखा है और आरएसएस भी हिंदू धर्म का राग अलापता है तो सरकार के पास इसकी जानकारी क्यों नहीं है ? विष्वविद्यालयों के पास जानकारी क्यों नहीं है ?
अब हम सुप्रीम कोर्ट से पूछते है हिंदू धर्म का प्रवर्तक कौन है और कब से है ?
क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देष पर बनी है !
उपरोक्त जानकारी सरकार व सुप्रीम कोर्ट के पास तो नहीं है पर हमारे खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय में यह सब जानकारियाँ प्रमाण सहित उपलब्ध है !अत सुप्रीम कोर्ट सही जानकरी लेकर भारत कि जनता को बताने कि कृपा करे !
हमने लिखने में कोई त्रुटि कि है या कोई अपमानजनक षब्द भूलवष लिख दिया है तो हम माफी मांगते है पर ईष्वर कृपा से हमने पूर्णत सत्य ही लिखा है और ईष्वर की माया ईष्वर ही जाने !
पत्र को देखिये आप भी और जो लोग सूत्र पूछते है वो इस पढ़े और खेजड़ा एक्सप्रेस के पेज चार को भी पढ़े जो इस पत्र का संविधान है !
जरा सोचों शब्दों का प्रभाव! 90 के दशक से हिन्दूत्व का जोर-शोर से प्रचार हुआ! उसी के अनुसार हिन्दूत्व के अर्थ के अनुसार भारत ही नहीं संसार प्रभावित हुआ है। और अभी इन शब्दों के कारण जा ेवातावरण प्रदुषित हुआ है। जिसमें कोरोना के शवों के कफन की चोरी, दवाईयाँ, मिलावट आदि हो रहे हैं । जिससे कोरोना को भी शक्ति मिली है।। इन सब को हम प्रमाणित कर सकते हैं।
ओमशांति ! आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते !
पर्यावरण व अध्यात्म में अन्नय सम्बन्ध हैं
शब्द में शक्ति है। शब्द शांति करा सकते हैं और शब्द संघर्ष
करा देता है के सिद्धान्त पर आज का कोरोना वर्शों की जटिल प्रक्रिया के बाद इस रूप में विकसित हुआ है । महाभारत के बाद नाग वायरस विकसित हुआ था। जिसमे सांप का जहर चढ़ता था। जिसे पर्यावरण के ज्ञाताओं ऋशि मुनियों की सलाह से शांत किया ।
प्रदूशण के साथ मिलावट व अध्यात्म में आडम्बर , षास्त्रों का अपमान , संविधान का अपमान तथा पर्यावरण के साथ खिलवाड़ ,वैज्ञानिक विकास औद्योगिक विकास से प्रकृति के अतिदोहन से कोरोना सूक्ष्म रूप में जन्म लेकर विकराल रूप में आया था
डाॅलर का चिन्ह संस्कृत का है आज डाॅलर विकसित है और जब से रूपये के चिन्ह को र काटकर बनाया है जो अशुभ है तब से रूपया रसातल में जा रहा है
उपरोक्त तथ्यों पर दृश्टि डालने पर दर्पण की तरह साफ दिखाई दे रहा है, की मानव के क्रिया कलापों से ही पेड़ पोधे , पषु पक्षी प्रताड़ित हुवे और उनमें पीड़ा की तरंगे उठी जिससे माँ प्रकृति क्रोधित हो गई और मानव को समझाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं से चेतावनी दी पर मानव नहीं माना तो छोटे छोटे वायरसों के बवंडर रूपी थप्पड़ मारे फिर भी नहीं माना ।
जीवन रक्षक पेडों की अत्यधिक कटाई से पेड़ पौधों में दूशित वायु को षुद्ध करने की तंत्र प्रक्रिया अवरुद्ध हो गई पेड़ पौधे अवसाद में आ गए ।
मानव को आवष्यकता के अनुसार षुद्ध वायु मिलना बंद हो गया। मानव भी अवसाद में आने लगा
मानव 10 प्रतिशत अवसाद में आया था तब से हमने सरकार को लिखना षुरू किया कि हमारे पर्यावरण के षोध के सूत्र अपना लो , भारत सरकार ने हमारे पत्र जो कई लोगों के हस्ताक्षर कराकर भेजा था उस पत्र को यहाँ जाँच के लिए पुलिस को भेज दिया और वह जाँच क्या हुई आज तक पता नहीं चल पाया ! यह वाकया बड़ा ही हास्यास्पद है !
हम फिर भी लिखते रहे हंै कि हमारे षोध के पर्यावरण के सूत्र अपना लो वरना स्थिति गंभीर हो जायेगी और हो गई है ! पीएमओ हाउस ,स्वास्थ्य मंत्रालय को फोन भी किया, सारी बात बताई और जबाव भी हास्यास्पद
मिला। फोन पर पूरी बात सुनकर बोले आपको क्या सहयोग चाहिये और फोन काट दिया !
जबकि सब जानते है आज तक छः लाख से अधिक तुलसी के पौधे ,हजारों पीपल व अन्य पोधे उगाकर बिना किसी राजकीय व सार्वजनिक चंदे के स्वार्जित सम्पदा से निषुल्क वितरण किये है और यह कार्य आज भी सुचारू रूप से चल रहा है !

08/09/2026

संत शंकराचार्य अखाड़ा परिषद महामंडलेश्वर आदि को भगवा
सनातन धर्म ने दिया है
और इन्होंने भगवा से खूब मजे लिए हैं
पर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार नहीं किया और सनातन धर्म विश्व गुरु से सिमट कर अंतिम सांसे गिन रहा है क्यों क्यों
क्यों का उतर नहीं दे सकते तो अपने पद और भगवा का त्याग करें
और उतर हम देंगे।
दूसरा प्रश्न, संत पथ भ्रष्ट हो रहे झूठ कपट ठग बन रहे हैं क्यों इसका उतर दे नहीं तो पद भगवा से त्याग दे। उतर हम देंगे।

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 1 वर्ष 39दिंनाक 24-08-2026वार्षिक 36 रुपये मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर /25¬_25¬¬_27प...
24/08/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 1 वर्ष 39दिंनाक 24-08-2026
वार्षिक 36 रुपये मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर /25¬_25¬¬_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
ण् आर्य संस्कृतिए माता-पिता- गुरु- प्रकृति
वनस्पतिए तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्मण्कर्म विद्यौपार्जनएधनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुखण्शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठए खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसीए पीपल
ण् पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापतिए ढाणी

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के 39 वें वर्ष के सफर का शुभारम्भ।
ईश्वर की असीम कृपा से भगवान प्रजापति भारती को विश्व विद्यालय ने सम्मान प्रदान किया है। पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्मस्थल हमने माँ प्रकृति के कार्य को अनवरत चलाये रखा और चला आ रहा है। इस वर्ष हजारों पौधे निशुल्क वितरण हो चुके है।

प्रकृति शक्ति पीठ से तुलसी की हवा, योग व तुलसी सेवन एवं वनौषधियों से असाध्य बीमारियों के इलाज की, नियमित
सेवा जारी ... रहेगी तथा पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस में इस वर्ष भी तुलसी से इलाज करने के अलावा योगाभ्यास से भी जटिल रोगों का इलाज करने की सुविधा उपलब्ध होती रहेगी । गोहत्या के साथ सब जीव हत्या से पर्यावरण को भारी नुकसान है तथा पोलीथीन का प्रयोग से भी पर्यावरण को भारी नुकसान है इसे विश्व में तुरन्त प्रभाव से रोके व सोच परिवर्तन चेतना महायज्ञ का जन जाग्रति अभियान का प्रचार प्रसार हो रहा है। तुलसी के नित्य दर्शन से स्वर्णदान का पूण्य मिलता है । तुलसी पौधों से दूषित विचार व कर्म पवित्र हो जाते है, तुलसी पौधों का दान महादान है । इससे नौ रत्नों के दान का पूण्य मिलता है और पाप कर्म से छुटकारा मिल जाता है। अतः ग्रहों की शान्ति, व्यापार में उन्नति, घरेलू क्लेश, रोग निवारण हेतु तुलसी पौधों का दान करें । इस वर्ष भी पीपल पौधे बहुतायत से ऊगाये हैं श्मसानों की भूमि (शान्ति धामों) में निःशुल्क ऊगाने का यज्ञ जारी है। इसमे आप तन-मन-धन से सहयोगी बने।– प्रजापति

वैदिक ,अउम , ओम को सर्वत्र प्रचार-प्रसार हेतु हमसे सम्पर्क करें एवं सहयोग करें।
खेजड़े लगाओ अभियान में लाखों खेजड़ी बेरी सहजन आदि के बीज गोचर, खेतों की सिंव व रास्तों के किनारे लग रहे हैं। इस पुनीत यज्ञ में आप भी शामिल होइए।
प्रिय सुधि पाठकों,
आपके सामने 39 वें वर्ष का शुभारम्भ का पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस है जिसे आप वर्षों से नियमित पढ़ते आ रहे हैं आपने पढ़कर यह भी अब तक अन्दाज लगा लिया होगा कि पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ का एक मात्र उद्देश्य साम्राज्य वादी प्रदूषण की ताकत को कमजोर करना है। प्रदूषण के क्रूर प्रहार से प्राणियों को बचाकर उन्हें सुख-शान्ति व वैभव प्रदान करना है। इस रणनीति में प्रकृति शक्ति पीठ, खेजड़ा सभी दिशाओं में प्रदूषित विचारों, की शक्तियों से धरती से जुड़कर कार्यक्षेत्र में सजगता से रचनात्मक महायुद्ध लड़ रहा है जो आपके सामने है। यह भी परम सत्य है कि पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ जैसा कार्य विश्व में अन्यत्र नहीं हो रहा है। यह भी सत्य है कि प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा की प्रेरणा से कई स्थानों पर पर्यावरण सुधार के काम होने लग गये हैं। यह भी सत्य है कि प्रकृति शक्ति पीठ से खेजड़ा की प्रेरणा से वन विभाग व कुछ लोगों ने तुलसी पौध वितरण करनी शुरू की है। यह भी सत्य है कि आज तक बिना किसी राजकीय आर्थिक सहयोग के खेजड़ा ने प्राणियों को असीम सुख, शान्ति वैभव प्रदान करने का प्रयास किया है और इससे असंख्य प्राणी लाभान्वित हुवे है और होते रहेंगे।
यदि देश के शासक पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ द्वारा प्रदूषण के खिलाफ महायुद्ध लड़ने में साथ देवें तो सर्वप्रथम प्रदूषण से प्रभावित मौसम तन्त्र को भगवान प्रजापति की शोध से पुनः सुचारू किया जा सकता है मौसम तन्त्र को सुचारू करने से जो प्रक्रिया भारत में अपनायी जायेगी उस प्रक्रिया से भारत की छवि विश्व में विख्यात होगी और विश्व में एक नई सोच शुरू हो जायेगी जिसे प्रयोग करने से वैज्ञानिकों को प्रकृति के कई रहस्य जानने में सुगमता होगी और अकाल व बाढ़ जैसी महाविनाशकारी प्राकृतिक आपदा से बचा जा सकेगा।
अब यह सोचना है कि विश्व में जो प्रदूषण का प्रकोप बढ़ा है वही प्रकोप इतना बढ़ गया कि मौसम तन्त्र को पूर्णतः खण्ड खण्ड कर दिया है ऐसे मौसम तन्त्र को पुनः संगठित कर सक्रिय करना है। यह असम्भव नहीं है परन्तु कठिन जरूर है जिससे देश की सरकार प्रयोग करके कुछ ही समय में पुनः मौसम तन्त्र को सुचारू कर सकती है।
ये तो सत्य है कि मौसम तन्त्र पूर्णतः अव्यवस्थित हो गया है और यह भी सत्य है कि मौसम तन्त्र अव्यवस्थित होने का मुख्य कारण औद्योगिक विकास व शस्त्रों की होड़ है। यह भी सत्य है - मौसम तंत्र को कमजोर मानसून व अतिवृष्टि को भी संतुलन करने की हमने शोध की है। यह भी सत्य है की इस होड़ में प्रकृति का अतिदोहन हुआ है और प्रदूषण का प्रभाव बढ़ा है। ये भी सत्य है कि ‘शब्द’ ने मौसम तन्त्र को तो अव्यवस्थित किया ही है परन्तु विभिन्न प्रकार की बीमारियों का भी बढ़ते प्रदुषण के कारण वर्चस्व बढ़ा है।ये भी सत्य है कि प्रदूषण के वर्चस्व से मानसिक प्रदूषण का भी वर्चस्व बढ़ा है और मनुष्य इसी प्रकोप से अर्धविक्षिप्त हो गया है। आज मानव खुदगर्ज ज्यादा हो गया है दिनोंदिन अपने लिए भौतिक भोग विलास के साधनों के वषीभूत होकर वास्तविक सुख-षान्ति से दूर होता जा रहा है। ओर यही कारण है कि आज बड़े से बड़ा वैभवषाली भी अपने आप को अतृप्त महसूस कर रहा है वह भी वास्तविक शान्ति के लिए तड़फ रहा है।
इसी मानसिक शान्ति के लिए वह धार्मिक स्थलों मे जाता है परन्तु वहां भी उसे ध्वनि प्रदूषण से व्यक्ति को वास्तविक शान्ति नही लेने देता। परन्तु जिस धार्मिक स्थल में स्पीकर आदि नहीं होते वहां तो असीम सुख शान्ति अवष्य मिलती है और इन सबको मध्यनजर रखते हुवे पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस ने प्रकृति षक्ति पीठ में वह सब सुविधाएं भीड़-भड़ाके के इलाके में प्रदान की है कि जो प्रकृति शक्ति पीठ में एक बार आ जाता है वह असीम शान्ति के आगोष में समा जाता है और प्रसन्नचित होकर भाव-विभोर हो जाता है।
ये तो है ही आगन्तुक आन्नदमय हो जाते है। यह आपके यहां आने पर ही आभास होगा।
यह भी सत्य है कि इस ब्रह्माण्ड में प्रकृति शक्ति पीठ एक अद्भुत पवित्र तीर्थ स्थल है। जहाँ यज्ञ की वेदी के चारों ओर असंख्य तुलसी-पीपल आदि के पौधे उगे हुवे है इन्हीं उगे हुवे पौधों की हवा व नियमित समय जड़ी बुटियों के अलावा अनेकानेक दुर्लभ वनौषधियां के यज्ञ की हवा से यहां की तुलसी, पीपलादि में विचित्र प्रकार की ऊर्जा विध्यमान हो गई है जिससे असाध्य रोगो का इलाज होता है कष्ट दूर होते हैं।
हमारा यही उद्देष्य है कि आप स्वस्थ रहे आप स्वस्थ रहेगे तो धर्म-कर्म-धनोपार्जन करेगे अतः आप तुलसी पौध लगावे और हम तुलसी पौधों को निःशुल्क जो बांट रहे है उसका उद्देष्य भी लोगों को स्वस्थ रखना है आप इस पुःनीत कार्य मे हमारा सहयोग कर सकते है। हमे इस काम को विषाल से विषाल करना है घर, मोहल्लों, नगरों, महानगरांे, ही नहीं, सम्पूर्ण देष ही नहीं, विष्व में प्रत्येक घर में, तुलसी पौध लगाने व यज्ञ का प्रचलन शुरू कराने का लक्ष्य रखा है ताकि बढ़ते प्रदूषण के प्रभाव को समाप्त करके लोगो को मानसिक प्रदूषण से मुक्त कराके स्वस्थ जो बनाना है और इसी क्रम मे इस बार भी बीस हजार तुलसी पौध निःशुल्क बांटनी है तथा योगासनो से रोगो से मुक्ति के उपाय बताने हैं। अतः आप सभी से अनुरोध है कि आप हमारा पूर्णतः सहयोग करे और हमारी सेवा से लाभ उठावे। यह सेवा हमारी नहीं है ये तो ईश्वर की अनुपम देन है और माँ प्रकति की असीम कृपा से ही यह हो रही है।
पर्यावरण को गोहत्या व सब जीव हत्या से भारी नुकसान हो रहा है साथ ही पोलीथिन तो खतरनाक है इसे रोकने के लिए प्रथम चरण में जनजाग्रति अभियान 1997 में चलाया था व सफल रहा है। आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते का अखण्ड महायज्ञ किया जो सफल रहा अतः यज्ञ से वृष्टि होती है यह सत्य ही है। अतः 39वें वर्ष के सफर में आप तन-मन-धन से शामिल होकर सहयोग करें ताकि इस महायज्ञ से प्राणियों के कल्याण में आपकी भागीदारी होवे और आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते ।

ओम शान्ति! ओम तत्सत!!
- भगवाना राम प्रजापति (ढाणी)
युद्ध लोलुप शक्तिशाली देशों ने युद्ध से असंख्य पेड़ पौधे पशु पक्षियों वन्य जीवों के कत्ल किए हैं और कर रहे हैं।
पर्यावरण में प्रदूषण रूपी राक्षस भयानक बन गया है।
हां
तो आईए प्रदूषण रूपी राक्षस को समाप्त करें।
पृथ्वी आकाश वायु जल अग्नि पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों जलचरों आदि के साथ शिक्षा और समाज में संतुलन बना कर पर्यावरण को सुरक्षित करें
पर्यावरण सुरक्षा जीव जगत की सुरक्षा है
पेड़ों खेजड़ो वन्य जीव आदि को कत्ल होने से बचाना है
पेड़ वन्य जीव स्पीकर बजाने पटाखे छोड़ने, पॉलिथीन जलाने से घायल होते हैं।
स्पीकर बजाकर पटाखे छोड़कर पॉलीथिन जलाकर पेड़ों वन्य जीवों को घायल करने वालों और पेड़ कातिलों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम 1981तथा वन्य जीव अधिनियम 1972 के तहत करवाई होती है पर सरकार, प्रशासन, पुलिस, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वन विभाग इन अधिनियमों के तहत करवाई नहीं कर रहे है। अत उपरोक्त अधिनियमों के तहत करवाई हो।
पर्यावरण शुद्धि के लिए ऐतिहासिक धरोहर गोचर भूमियों में धर्म स्थलों के नाम से हो रहे कब्जे हटाए जाय।
प्राचीन ऐतिहासिक धरोहरो के कब्जे हटाए जाय।
बीकानेर परकोटा सफ़ील की सुरक्षा की जाय । परकोटे के कब्जे हटाए जाय ।
शरह नथानिया गोचर में बढ़ते धर्म स्थलों के कब्जों को देखते हुए धर्म स्थलों के कब्जे तुरन्त प्रभाव से हटाए जाय ।
महामानवों की मूर्तियां लगाने से पर्यावरण को नुक़सान होता है मूर्ति न लगाकर पेड़ लगाया जाय।
युद्ध लोलुप शक्तिशाली देशों ने युद्ध से असंख्य पेड़ पौधे पशु पक्षियों वन्य जीवों के कत्ल किए है और कर रहे हैं वन्य जीवों पक्षियों आदि के घर उजड़ गए आवास खत्म हो गए भोजन खत्म हो गया,घायल हो गए। ऑक्सीजन में भारी कमी आ गई है और पर्यावरण को भारी आघात लगा है। अत ऐसे देशों पर मुकद्दमा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर करके युद्ध और शस्त्र परीक्षण से भी जो नुक़सान हुआ है इस नुक़सान के कठोर करवाई की जावे।
नोट
हमने इन देशों के खिलाफ याचिका नीदरलैंड अंतराष्ट्रीय न्यायालय को भेजी है और unic संयुक्त राष्ट्र सूचना केंद्र नई दिल्ली को,, राष्ट्रपति को, वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी याचिका की प्रतिलिपि आवश्यक करवाई हेतु सूचनार्थ भेजी गई है

जलवायु परिवर्तन में तुरंत सुधार के लिए
आत्म हत्याओं, अवसाद,बलात्कार आदि पर अंकुश लगाने के लिए हमारे शोध के सूत्र लागू करने चाहिए क्योंकि यह शोध संसार के अन्य वैज्ञानिक के पास नहीं है।
प्रार्थी
भगवानाराम प्रजापति भारती

हमने भी धरती का सूत्र खोजा है जिसे सरकार ही लागू कर सकती है ।
शब्द मेँ शक्ति है। शब्द मेँ संघर्ष है। शब्द में शान्ति है।
शब्द में वायरसों को मारने की शक्ति है। शब्द का ये सत्य ही हमारा शोध का सूत्र है। यह विशुद्ध वैज्ञानिक है।
संसार के शासकों व वैज्ञानिकों को इन तथ्यों को इतना स्पष्ट बताने के बाद भी समझ में नहीं आयेगा इनकी सोच से बाहर है। जबकि यह बहुत ही सरल है । हमारे शोध के सूत्र से पूरे संसार को असीम शाँति मिलेगी। शब्द की शोध को संसार अप्रमाणित करके बतावे या फिर लागू करे।
अंदर की तरंगों से शब्द बनते हैं। जो शब्दो के भावों को समझकर, बोलते, लिखते है और फिर उसी भावों को लिखते है तो ऊसकी ऊर्जा बनती है , प्रभाव पड़ता है। अंदर की तरंगें के अनुरूप ,बोलते शब्दों के अनुरूप जो लिख या लिखा नही सकते वे उलझन में डाल देते हैं। शब्द की शक्ति अपार है ।
ये सब हम बता सकते हैं पर इस क्षेत्र का वैज्ञानिक, जानकारी रखने वाला भी होना चाहिए या जानने का इच्छुक होना चाहिए तो हम विस्तृत रूप से प्रमाण सहित समझा सकते हैं।
हमारे शोध के सूत्र को लागू करने से संसार मेँ एक दिन में ही लाभ के प्रमाण मिलेंगे। किसी प्रकार का नुकसान नहीं होगा और धन खर्च भी नहीं होगा।
- भगवाना राम प्रजापति वैदिक पद्धति से शोधकर्त्ता । ओम शांति। आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते।
संपादक, खेजड़ा एक्सप्रेस।
ब्रह्माण्डीय पर्यावरण सुरक्षा से ही विश्व षान्ति होगी
तुलसी पौधा यह वह महाऔषधी है जिससे घुटनों के दर्द, केंसर, हार्ट जैसे जटिल रोगों का सही सेवन प्रक्रिया से इलाज संभव है। - वनोषधिय चिकित्सक - भगवान
तुलसी पौध संसार का सर्वोतम रोग प्रतिरोधी, संजीवनी महौषधि है। इस महाशक्तिशाली तुलसी पौध को प्राणियों के स्वास्थ्य के लिए ‘‘घर-घर तुलसी लगाओ अभियान’’ का महायज्ञ वर्षों से चल रहा है।
तुलसी पौधा आपके घर में लगाने पर हर प्रकार के पाप (प्रदूषण) पैदा होने से रोकता है तथा सभी प्रकार के रोगों का इलाज कर देता है। तुलसी के पत्ते, टहनी, पुष्प, बीज, जड़ पाँंचों ही भाग गीले हो अथवा सूखे, प्रतिदिन सेवन करने से अनेक रोगों का इलाज होता है। साथ ही, जिस घर में तुलसी पौधा स्थित होता है उस घर की वायु पवित्र हो जाती है व छूत के रोगों का इलाज करती है, और असीम सुख शान्ति, वैभव मिलता है। तुलसी पौधा अभिमन्त्रित होता है तो ग्रहों व दुरात्माओं के प्रकोप को शांत करता है। पावन पवित्र तुलसी पौधे प्रकृति शक्ति पीठ, पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस से मिलते है। साथ ही वर्षों से प्रतिवर्ष 10000 हजार की तादात में तुलसी व पीपल उगाकर बिना राजकीय सहयोग के अभी तक निःशुल्क वितरित होते आ रहें है, अब लगभग हजारों पौधे तुलसी व पीपल वितरित होने लगे हैं। जिन्हें शिक्षण संस्थानों, गांवों आदि में ले जाकर प्रजापति द्वारा तुलसी के बारे में जानकारी का व्याख्यान देकर प्रत्येक छात्र-छात्रा को निःशुल्क देने की नियमित सेवा भी जारी है। इसका आप आज ही लाभ उठावें। इस महा पुनीत यज्ञ में तन-मन-धन से प्रकृति शक्ति पीठ को सहयोग भी कर सकते हैं। तुलसी पौधे को जिन्दा रखने के लिए नियमित पानी देवें। गर्मियों में सवेरे शांम देना चाहिये व कड़ाके की सर्दी के समय शांम को पतों पर भरपूर पानी देवें ये पानी तुलसी पौध को पाळे व लू से बचायेगा।।
तुलसी पौधे के अन्य लाभ :- शुगर के रोगी को श्यामा तुलसी के 11 पत्ते रात्री में ताबें, चीनी मिट्टी या कांच के बर्तन में पानी में डालकर रख दे सुबह उठते ही पत्ते खावे। पूरा पानी पी जावे जितना पिया जा सके तथा प्रतिदिन लगभग 30 पत्ते खाये।
- हृदय रोगी को 4-5 पत्ते श्यामा के नियमित सुबह खाने व तुलसी की हवा से लाभ होता है।
- बड़ा बच्चा बिस्तर गीला करता हो तो 4-5 तुलसी के बीज पीसकर पिलावें।
- सर्दी जुखाम बुखार आदि किसी भी रोग के रोगी के कमरे में रात्रि को तुलसी के पास दीपक जलाकर कमरे में रखने से लाभ होता है।
- फोड़ा फुन्सी, मुहासों, चोट आदि में तुलसी के पत्ते पीसकर लगाने से लाभ होता है।
- कैन्सर रोगी को श्यामा तुलसी के पत्ते पीसकर खिलाने व रात्री में तुलसी के पास दीपक जलाकर रखने से लाभ होता है। लगभग 250-300 पत्ते खावें।
इस प्रकार हमने तुलसी पौधों पर कई वर्षों से अनुसन्धान करके यह शोध की है कि यह पौधा हर प्रकार की बीमारी को दूर करने में पूर्णतः सक्षम है। यदि बाहरी रोग है तो पत्तों को पीसकर लगावें और अन्दरूनी रोग हो तो पीसकर पानी के साथ पी लेवें।
विस्तृत जानकारी के लिए पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस प्रकृति शक्ति पीठ से सम्पर्क करें आपको हस प्रकार की जानकारी मिलेगी।
- पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ का प्रत्येक घर को खुशहाल करने का यज्ञ 1987 में भगवानराम प्रजापति ने
- 5 रुपये में तुलसी पौधे को लगाकर शुरू किया और उसी तुलसी पौध से अन्य पौधे तैयार करके 1988 में पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के प्रकाशन में मूल उद्देश्य में जोड़ दिया गया। इस प्रकार प्रदूषण समाप्त करने के लिए यज्ञ शुरू हुवा जिसमें खेजड़ा ने घर घर तुलसी पौध पहुँचाओं के साथ अन्य पौधों के साथ स्थायी पेड़ो के पौधे भी वितरण करने की सेवा शुरू की।
आज पाक्षिक खेजडा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ ने प्रदूषण को समाप्त करने का जो यज्ञ शुरू किया उसने विशालतम महायज्ञ का रूप धारण किया है।

- जहां तुलसी का वन होता है उसके बीच में नियमित नित्य यज्ञ होता है। उस यज्ञ से तुलसी पौध अभिमन्त्रित व प्रशिक्षित होता है। -प्रकृति शक्ति पीठ
आइये पर्यावरण में प्रदूशण रूपी राक्षस भयानक बन गया हैं । इस राक्षस को समाप्त करना है । अतः पष्थ्वी, आकाष, जल, वायु, पेड-पौधों, जीव जन्तुओं, नभचरों, जलचरों, धरतीचरों आदि के संतुलन को बनाने का यज्ञ करें।
विश्व में प्रदूशण का तांडव चरम सीमा पर पहुंच गया है। भौतिक विकास की गति में आसमान की ऊचाई के रहस्य जानने को मानव होड़ में लग गया है और षस्त्रों की होड़ भी चरम सीमा पर पहुंच गई है। इन सभी होड़ में धरती की गहराई के रहस्य जानने की होड़ को भूलते गये और प्रकृति का इतना अधिक दोहन हो गया कि प्रदूशण रूपी राक्षस ने भयानक रूप धारण कर लिया जिससे मानव मानसिक प्रदूशण के अधीन (अवसाद ) में है। जिसमें बच्चे से लेकर वृद्ध व विद्वान तक में वर्तमान में यह लक्षण स्पश्ट दिखाई दे रहे हैं।
जब लोग 10प्रतिशत अवसाद में आये तब से हम षोध की जानकारी देने लगे थे अब चालीस प्रतिषत हो गए है !
1 दुनिया के नश्ट हो गये वर्शाजन्य जंगलों के पेड़ों को तुरन्त प्रभाव से पुनः लगाया जावे !
पेड़ बीमार व कमजोर हो चुके है पेडों का स्वास्थ्य ठीक करे जो हमारे षोध सूत्र को लागू करने से होगा और फिर मानसून को सही दिषा मिलेगी !
मानसून आगमन पर विषेश अतिथि की तरह मानसून का सम्मान करना षुरू करे !
2 षस्त्रोंका निर्माण व इस्तेमाल बंद करे ऐसी सभी गैसों का उत्पादन बन्द कर दिया जावे जिससे पक्षियों को मौत का ग्रास बनना पड़ता है और वनस्पति व अन्य प्राणियों के जीवन व धरती का सुरक्षा कवच (ओजोन)पर घातक प्रहार होता है । धरती पर दोहन अविलम्ब प्रभाव से बन्द किया जावे तथा औद्यौगिक व अन्य विकास कार्यों में जितने पेड़-पौघे कटे है उनसे दूगुने अन्य जगह तुरंत प्रभाव से लगावें।
3 समुन्दर में जहरीला कचरा न डालकर जलचरों के जीवन को सुखमय बनाया जावें ।
4. गो-वध पषुवध से पीड़ा की तरंगे उठती को तुरन्त प्रभाव से रोका
जावे। धरती आकाष, जल, खाद्य सामग्री आदि जहरीली बनाने वाले महाविनाषकारी पोलीथीन को पूर्णतः बन्द किया जावे, मूक प्राणी इसे खाकर घोर वेदना झेलकर बेमौत मरता है, जिससे भी भयंकर पीड़ा की तरंगें उठती है। पिंजरों के कैदी वन्य प्राणियों को पूर्णतः सुविधा दी जावे या स्वतन्त्र किये जावे। राजनीतिक, प्रषासनिक प्रदूशण तुरन्त प्रभाव से रोका जावे इसके प्रभाव से निर्दोश मानव व अन्य प्राणियों को घोर वेदना होती है जिससे पीड़ा की तरंगे बनती है। पीड़ा की तरंगो से धरती कांप जाती है, जिसे भूकम्प कहते है।
5. ध्वनि प्रदूशण को बढ़ावा देने वाले यन्त्र बन्द किये जावें व स्पीकरों को तुरन्त प्रभाव से बन्द सख्ती से किया जावे, ये अन्य प्राणियों व मानव व बच्चों को सुख की नींद में बेहद बाधा डालते है और पूरी नींद न आने से कई तरह की जटिल बीमारियाँ जकड लेती है !
इन्हें रोकने से लाभ ही लाभ होगा। साथ ही सभी त्यौहारों, समारोह में आतिषबाजी को पूर्णत बन्द करें ।
7. पानी का अतिदोहन रोका जावे तथा नदियों, झीलों के पानी को प्रदूशित होने से बचाना नितान्त आवष्यक है तथा तालाब, नदियों आगौर अभ्यारण्य, गोचर आदि का वर्चस्व बनाया जावे ।
8. प्रत्येक घर में पौधा लगाना आवष्यक किया जावे। जिससे खुद घरेलू प्रदूशण रोकने के लिए लगावे ताकि प्रदूशित वायु का प्रभाव न हो ।
9. दैनिक यज्ञों का विश्व में प्रचलन षुरू किया जावें
उपरोक्त सूत्र से व हमारी षोध के सूत्र से पर्यावरण में प्रदूशण रूपी राक्षस समाप्त होगा। विश्व में षान्ति होगी। अन्यथा महाभारत काल के बाद के घोर संकटों से भी खतरनाक हालात होंगे जिसमे पृथ्वी भी खत्म हो सकती है और यदि पृथ्वी बच जाती है तो षहरी सभ्यता नश्ट होगी ओर आदिवासी, ग्रामीण बचेगें, और पुनः धीरे-धीरे विकास होगा।
- दया प्रजापति समस्त खेजड़ा परिवार पाठकगण

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पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेसअंक 23_24 वर्ष 38 दिनांक 9-8-2026वार्षिक36रूपये  मूल्य 1रु 50पो प स  बीकानेर025-25-27पर्यावरण आध...
09/08/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 23_24 वर्ष 38 दिनांक 9-8-2026
वार्षिक36रूपये मूल्य 1रु 50
पो प स बीकानेर025-25-27
पर्यावरण आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
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