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Khejara Express पर्यावरण से सम्बंधित सभी जानकारीया आ?

पर्यावरण, आध्यात्मिक एवं
समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य
रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व
का अग्रणी शास्त्र
खेजड़ा एक्सप्रेस पूरा पढ़ने से शास्त्र का
पूण्य मिलेगा

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 16_17 वर्ष 38दिनांक 09.05..2026 वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/20...
09/05/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 16_17 वर्ष 38दिनांक 09.05..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
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हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
भारत सरकार के और संसार के वैज्ञानिकों को खुली चुनौती देकर ललकारते हैं कि वे हमारे सूत्र गलत साबित करे या स्वीकार करके लागू करें वरना भारत की गर्मी विकराल रूप धारण करेगी जो विश्व को प्रभावित करेगी।
प्रथम सूत्र _मरू क्षेत्र जो गर्म क्षेत्र है जहां के खेजड़ो बेरी कैर फोग आदिकाल से पर्यावरण की सुरक्षा करते आ रहे हैं इन पर्यावरण रक्षकों का कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए वरना भारत के पर्यावरण को भारी से भारी नुक़सान होगा।
हमने पिछले साल गंगा सिंह विश्व विद्यालय बीकानेर में पर्यावरण के अंतरास्ट्रीय सम्मेलन में कहा था कि बीकानेर के गांवों में जो पेड़ खेजड़े कत्ल हो रहे हैं उससे बीकानेर के साथ राजस्थान और भारत को प्रभावित करेंगे और जिससे विश्व में भी असर पड़ेगा।
राजस्थान वन आच्छादित 9 प्रतिशत है और यहां मरू क्षेत्र है जहां तापमान अधिक रहता है और यहां के तापमान को यहां के खेजड़े बेरी कैर फोग बावलिये आदि को सुचारू रूप से चला रहे हैं।
सरकार की नीति के तहत ग्रीन उर्जा के नाम पर विकास के नाम पर इन पर्यावरण रक्षकों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने के कारण गर्म क्षेत्र और अधिक गर्म क्षेत्र बन रहा है और पेड़ो खेजड़ों में भय का वातावरण बन गया उनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी और पेड़ों खेजड़ो आदि पर सदियों से निवास करने वाले वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों आदि के भी कत्ल हो गए और कुछ घायल हो गए तो बेघर भी हो गए इनकी उदर पूर्ति के साधन छिन्न गए इनका सहारा छिन्न गया इनमें भी भय का वातावरण बन गया और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी।
साथ ही खेजड़े राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है जो हर पावन पर्व पर खेजड़ी और खेजड़ी के रूँख से पूजा की जाती है। इस प्रकार संस्कृति सभ्यता सनातन धर्म से जुड़े लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए रात्रि में खेजड़ों का चोरी से कत्ल किया जाना उनके लिए हृदय विदारक घटना से पीड़ा की तरंगें निकली और
वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों पशुओं की पीड़ा की तरंगें इतनी विकराल हो गई कि प्रकृति का संतुलन डिगमिगा गया। और चारों तरफ आग फैल गई है।
सोचने की बात यह है कि जहां आग बरस रही है उस आग को बुझाने की बजाय वहां उस आग को तीव्र करने की कोशिश करना महाविनाश करना है।
जब राजस्थान का यह मरू क्षेत्र पहले से ही सुलग रहा है तो फिर इसमें पेड़ों खेजड़ो का कत्ल करना महाविनाश है और यह आसमान से बरसती ये आग इसकी चेतावनी हमने पिछले साल दे दी थी और वर्षों से कह भी रहे हैं ।
दूसरा सूत्र _पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को पटाखे स्पीकर से प्रताड़ित करना तुरन्त प्रभाव से रोका जाए पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें वरना भारत का पर्यावरण और तहस नहस हो जाएगा । अभी भारत विश्व में प्रदूषण में अग्रणी देशों में है।
पटाखों,स्पीकर ,पॉलीथिन जलाने से धुंए और शोर से वायु में जहर घुल जाता है जिससे पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों में भी भारी वेदना होती है और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदा आती है और यह हम वर्षों से कह रहे हैं और परिणाम आपके सामने हैं आग उगलता भारत।
यह प्रश्न हमारा भारत के सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री जी से कर रहे।
सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधानमंत्री जी , सादर वंदे।
आप और आपकी सरकार यह बतावे कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इतने खतरनाक पटाखें स्पीकर है जो सब प्रकार रोग हार्ट बहरापन गूंगापन शुगर चिड़चिड़ापन आदि गंभीर रोगों को उत्पन्न करता है।
जिनसे वायरस रोग चिंता अवसाद नशा अपराध आदि बढ़ता है।
ऐसे खतरनाक पटाखें स्पीकर पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे लगता है और उनकी धर्म आस्था कैसे आहत होती है?

आदरणीय
मुख्य मंत्री श्री भजनलाल जी,शर्मा जी, सादर वंदे।
मैं आपसे भी पूछता हूं कि
राजस्थान में अपने राज्य में स्पीकर बजता है तो उस पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे पहुंचता है और उनकी आस्था कैसे आहत होती है?

भारत सरकार प्रशासन, राजस्थान सरकार प्रशासन बतावे कि स्पीकर पटाखों से धर्म का क्या संबंध है,?
स्पीकर पटाखों पर पाबंदी से आस्था विश्वास पर आघात कैसे लगता है?
ये बता दे मैं कभी इन पर पाबंदी लगाने का नहीं कहूंगा।
शास्त्रों में देव मानवों ने एकान्तता एकाग्रता का कहा है
राक्षसी मानवों का मुझे पता नहीं।
करोना में लोक डाउन में शोर कम हुआ था और करोना कमजोर हुआ था।
भारत में सभी तीज त्यौहार पर्यावरण संरक्षण के लिए ही बनाए गए थे और भारत संसार में पर्यावरण पर एक आदर्श देश था।
अब भारत प्रदूषण में संसार में शीर्ष स्थानों में है और राजस्थान भी तथा बीकानेर का तो बहुत ही ख़तरनाक हालात है।
हमारा बीकानेर बहुत ही पवित्र शहर था चारों ओर गोचर भूमियों का पहरा और शहर में अंदर बाग तालाब आदि के कारण बीकानेर पर्यावरण संरक्षण में श्रेष्ठ था जो आज दुनिया के प्रदूषित शहरों में अग्रणी बन गया है और बनता जा रहा है।
भारत सरकार प्रशासन राजस्थान सरकार प्रशासन ये भी बतावे कि स्पीकर पटाखों पॉलीथिन जलाने से कौन सा विकास होता है
स्पीकर पटाखों से यदि विकास होता है तो चारों ओर इनकी धूम मचा दी जाए।
बड़े ही शर्म की बात है कि स्पीकर पटाखों पर पाबंदी लगाने की बात करते हैं तो कहते हैं हमारे धर्म पर आघात लगाया जा रहा है हम इससे आहत हो रहे हैं।
वाह वाह पहले इन्हें पूछो कि जब स्पीकर नहीं थे तो तब तो कोई धर्म कर्म होते ही नहीं थे क्या। उस समय के धार्मिक कार्य भजन कीर्तन बिना स्पीकर से ही होते थे और उनकी आवाज रात्रि में सुखद अनुभव देती थी पेड़ पौधे पशु पक्षियों वन्य जीवों को सुखमय आनंद मिलता था।
आज के स्पीकर से गीत संगीत गजल भजन कीर्तन करते हैं तो वायु में जहर घुल जाता है और यह हर प्राणी के लिए घातक होता है।
पशु पक्षी पेड़ पौधे वन्य जीव प्रताड़ित होते है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा मिलता है और अवसाद वायरस रोग चिंता भय अपराध आदि को बढ़ावा मिलता है।
साथ ही जो स्पीकर बजाते हैं और जो सुनते हैं उन्हें पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों की पीड़ा की तरंगें अभिशाप का काम करती हैं उनके घर में अवसाद अशांति रोग चिंता भय क्लेश बना रहता है और उनकी मौत जहर बन जाती है ये सब अनुभूत है और आप भी यह सब अनुभव कर रहे हैं पर धर्म स्थलों में स्पीकरों को बंद कराने से डरते हो कि वहां के ईश्वर नाराज हो जाएंगे और पाप लगेगा।
बहुत खूब यदि धर्म स्थलों में ईश्वर है तो यह करोना काल में ताला लगा कर क्यों भाग गए? धर्म स्थलों के ईश्वर कह सकते थे कि धर्म स्थल बंद नहीं होंगे हमारे भक्तों को करोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पर किसी धर्म स्थल ने अपने वर्चस्व को नहीं बताया सबके सब ताला लगा कर भाग गए थे और पुजारी सरकार प्रशासन और लोगों से सहयोग करने की याचना करने लगे थे।
अरे ईश्वर के धर्म स्थलों में कार्य करते थे तो उस धर्म स्थल के ईश्वर का दायित्व बनता था कि वे पुजारी को तो खाना पानी देते।
उस समय धर्म स्थल ताला लगा कर भाग गए थे तो पेड़ पौधे आपके ढाल बनकर आपको बचाने आगे आए थे।
हमने भी उस समय हमारे आश्रम प्रकृति शक्ति पीठ ओम मन्दिर बीकानेर से सैकड़ों हजारों लोगों को नहीं बल्कि लाखों लोगों को गिलोय तुलसी पपीते के पते काढ़े के लिए देकर भरपूर निःशुल्क सेवा की थी।
और आज करोना काल में दुःख में साथ देने वाले पेड़ पौधों को स्पीकर से प्रदूषण बढ़ाकर प्रताड़ित कर रहे हो।
क्या इस दुष्कर्म से आप लोगों शांति सुख समृद्धि मिलेगी?
सोचना होगा और भारत को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्पीकर पटाखों पर अविलंब सख्त पाबंदी लगानी होगी।
स्पीकर पटाखों से किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं होता पटाखों से हर साल अनेक लोग मर जाते हैं और पशु पक्षियों वन्य जीवों को भी भारी नुक़सान होता है और अनेक मौत के ग्रास बन जाते हैं और पॉलीथिन जलाने से हवा में खतरनाक जहर घुल जाता है जो हर प्राणी को बहुत ही ख़तरनाक नुक़सान पहुंचा रहा है।
इन सभी कृत्यों से भारत के पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है और उदाहरण है भारत में आग वर्ष रही है।
यदि इससे बचना है तो पेड़ों खेजड़ो के कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए और पेड़ो खेजड़ों को घायल करने वाले पटाखों स्पीकर पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और इन पर पाबंदी लगाई जाए।

समझ गए हो तो आओ भारत को पर्यावरण संरक्षण कार्य में अग्रणी बनाने का अभियान शुरू करें जिसमें हम आपको हमारे शोध के सूत्र बताएंगे जिसे लागू करने से तत्काल जल वायु परिवर्तन में सुधार होना शुरू हो जाएगा। और किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं रुकेगा बल्कि विकास कार्य भी तेज गति से होगा
प्रार्थी
भगवानाराम प्रजापति ढाणी ( भगवान भारती)
अधिष्ठाता _ओम मंदिर, प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर
संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक
7737957772

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 15 वर्ष 38दिनांक 09.04..2026 वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_...
09/04/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 15 वर्ष 38दिनांक 09.04..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
आओ पर्यावरण शुद्ध करें और पर्यावरण में पृथ्वी ,आकाश, वायु ,जल अग्नि के संतुलन को बनाये रखने के लिए वन्य जीवों पेड़ पौधो के संतुलन को बनाये रखने के अभियान में शामिल होवे!
पेड़, खेजड़े वन्य जीवों के कातिल,पेड़ों वन्य जीवों को घायल करने वाले भारतीय संविधान के अधिनियमों का उल्लंघन कर अपराध रहे हैं तो परम्परागत सांस्कृतिक कानून का भी उल्लंघन करके घोर पाप के भागीदार बन गए हैं और बन रहे हैं।

पेड़ सजीव प्राणी है सजीव प्राणी का कत्ल करना जघन्य अपराध है ।मनुष्यों के प्राण पेड़ों से चलते हैं।
निम्नलिखित तथ्यों पर तत्काल शासन प्रशासन करवाई करे ,
1पेड़, खेजड़े वन्य जीवों के कातिल,पेड़ों वन्य जीवों को घायल करने वाले भारतीय संविधान के अधिनियमों का उल्लंघन कर अपराध रहे ।

एक पेड़ का कत्ल होते ही वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों आदि का गांव उजड़ जाता है। उनके आवास छिन्न जाते हैं उनका भोजन भी खत्म हो जाता है। पेड़ों का क़त्ल करने वालों पर सख्त करवाई हो ।
रात्रि में अचानक आरी से पेड़ कटने से पेड़ पर आवास करने वाले वन्य जीव संभल ही नहीं पाते और वे तने के प्रहार से मर जाते हैं घायल हो जाते हैं और तना धरती पर पड़ता है तो सरीसृप के बिल पर पड़ता है और उसके अंडे खत्म हो जाते हैं सरीसृप खुद पेड़ पर रहता है तो अंडे धरती पर बिला बनाकर देता है और पेड़ के ऊपर पक्षियों के घोंसले अंडे खत्म हो जाते हैं ये घोर जघन्य अपराध है
पेड़ कटने से ओक्सीजन उत्पादन में कमी आ जाती है और वायु की गुणवत कम हो जाती है। जो पेड़ खाद देता था खाद उत्पादन खत्म हो जाता है। पेड़ खेजड़ी एक उच्च कोटि का औषधीय पेड़ है इसका फल सांगरी शुगर रोगियों को लाभ देती है और हड्डियों को मजबूत करती है और कई रोगों को ठीक करती है तो इसके रूँख यानि पत्ते खाने से आंखों की ज्योति बढ़ती है और रातीअंधेरा ठीक हो जाता है। ये पेड़ राजस्थान ही नहीं पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है।इस प्रकार पेड़ कातिलों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम1981 और वन्य जीव अधिनियम 1972 की धाराओं के अनुसार करवाई होनी चाहिए और साथ ही परम्परागत सांस्कृतिक कानून का भी उल्लंघन किया है इसके तहत करवाई सख्त से सख्त होनी चाहिए । एक ओर सत्य समझे सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों के कत्ल पर एक मूल्यांकन कमेटी बनाई है जिसके अनुसार छाती की ऊंचाई पर पेड़ का तना 80 सेमी है तो उसकी कीमत 1,33,000 एक लाख तैतीस हजार रुपए है। ये जो पेड़ खेजड़े कटे हैं यह बहुत ही बड़े हैं और इनकी कीमत लाखों रुपए है।

2 स्पीकर के शोर से पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीव घायल होते है और मानव के लिए भी घातक है ।
स्पीकर अनचाहे शोर करने वालों पर करवाई हो ।

वन्य जीवों में आपसी संवाद में बाधा पहुंचती है जिससे उनके प्रेम प्रजनन को भारी नुक़सान होता है तो रात्रि में बजने वाले स्पीकरों से मानव के साथ पेड़ पौधों वन्य जीवों पशु पक्षियों को रात्रि की नींद में बाधा गंभीर रूप से पहुंचती है जो स्वास्थ्य के लिए घातक है यह सर्वविदित है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाएं आती हैं ।
स्पीकर के शोर से हवा में जहर घुलकर दूर तक पहुंच जाता है जो मनुष्य के साथ पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को अदृश्य रूप में रहकर भारी नुक़सान पहुंचाता है।
स्पीकर के गीत संगीत के शोर से तरंगें बनकर बवंडर बन जाती हैं और जो इसकी चपेट में आते हैं वो घायल हो जाते हैं।मानव अवसाद में आ जाता है और घायल होकर आत्म हत्या करता है। नशा करता है और बलात्कार हत्या जैसे जघन्य अपराध हो रहे है । इस वन्य जीव अधिनियम और वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत करवाई का प्रावधान है शोर से वाहन दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं (नोट _गीत संगीत से वाहन दुर्घटनाएं होती हैं _हमने यह शोध 20 अप्रैल 2008 को उजागर की थी और 24 अप्रैल 2008 के खेजड़ा एक्सप्रेस के अंक में प्रकाशित हुई थी। शासन प्रशासन को सूचना दी थी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
मेरी शोध को अमेरिका ने 2011 में अपनी बना ली और फायदा उठा रहा है।,_
वर्तमान में कई शोध हमने की है जिसमें से एक शोध के सूत्र लागू करने से तत्काल जलवायु परिवर्तन में सुचारू होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।)
मानव कुछ पल की शांति के लिए धर्म स्थलों में जाते हैं वहां भी स्पीकरों के शोर से उन्हें शांति नहीं मिलती ।
कोरोना काल में जहां शोर अत्यधिक था वहां मृत्युदर ज्यादा रही है ।
लोक डाउन में शोर कम हुआ था और कोरोना कमजोर हुआ था इस बात को गहराई से समझे और वाहनों दुकानों ,धर्म स्थलों ,समारोह , धरना प्रदर्शन आदि के स्पीकरों के गीत संगीत के शोर पर तत्काल उपर वर्णित अधिनियमों की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जावे और स्पीकर से गीत संगीत गजल आदि पर सख्त पाबंदी लगाई जाए वरना आने वाले समय में पर्यावरण में हाहाकार मच जाएगा।
अवसाद आत्महत्याओं, अचानक मौतों आदि से वातावरण भयानक बन जाएगा ।
सुप्रीम कोर्ट ने 18जुलाई 2005 के आदेश में कहा है कि स्पीकर के शोर अवसाद हार्ट बहरापन गूंगापन शुगर चिड़चिड़ापन आदि गंभीर बीमारियों को बढ़ावा मिलता तथा गर्भवती महिलाओं बच्चों बुजुर्गो के लिए घातक है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि किसी भी धर्म स्थल को ढोल नगाड़े आदि बजाने की इज्जात नहीं दी जा सकती।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट आदेश में कहा है कि सरकार,प्रशासन, पुलिस प्रशासन जनता को शिविर लगाकर शिक्षण संस्थाओं में जाकर ध्वनि प्रदूषण की भयानकता के बारे में जानकारी देवे। _
अफसोस है कि आज तक इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया जिसका परिणाम यह है कि आज चारों ओर प्रदूषण स्पीकर बजाने वालों का तांडव है। धर्मभीरू खामोश है और प्रदूषण विकास कर रहा है।(धर्म के नाम से स्पीकरों के शोर से जीवों को दुखी करने वालों की मौत जहर बन जाती है ये हमने देखा है।)
अत सरकार प्रशासन से निवेदन है कि ध्वनि प्रदूषण की भयानकता के बारे में जानकारी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करें। कानून में यह भी कहा है कि दिन में सक्षम अधिकारी के अनुमति से ही स्पीकर बज सकते हैं और सक्षम अधिकारी राष्ट्र हित में अनुमति दे सकते हैं और वह भी अपने परिसर से आवाज बाहर न निकले। अजान और मंदिरों के स्पीकर तो दूर दूर तक सुनाई देते हैं इन्होंने तो अपने ही कानून बना लिए हैं। जिसमें मंदिर वाले तो जब चाहे तब स्पीकर से शोर करने लग जाते हैं और बीमार या वृद्ध व्यक्ति बंद करने को कहते हैं तो तेज बजाते हैं । और मैं जब नया शहर थाना पुलिस को सूचित करता हूं तो पुलिस भी उसे तेज बजाने को ही कहते है। बंद नहीं कराते । विशेष _, मैं वर्षों से रात में दिन में बजने वाले स्पीकरों को बंद कराने का नया शहर थाना पुलिस को सूचित करता हूं पर पुलिस ने आज तक न तो दिन में स्पीकर बंद कराया और ना ही रात को। जबकि रात दस बजे के बाद सुबह तक अनेक बार फोन करता हूं और इन सब का रिकॉर्ड है सारे वीडियो दिन रात के यू ट्यूब पर और मेरे पास फोन में मिल जाएंगे। हां मेरे ऊपर कारवाई जरूर की है। नोट _ये शिकायतों और वीडियो इतने ज्यादा है कि वर्ल्ड रिकॉर्ड में आ जाएंगे। किसी में साहस है तो जांच करके देख लें।
3 प्राचीन धरोहरको नुकसान करने वालो पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
प्राचीन धरोहर के पास उपर नीचे वन्य जीव रहते है (बीकानेर परकोटा शफ़ील) बीकानेर परकोटा शफ़ील को तोड़ने वालों पर क़ानूनी करवाई हो
बीकानेर परकोटा शफ़ील प्राचीन धरोहर है इसको तोड़ कब्जा करने और परकोटे शफ़िल के पास के ऐतिहासिक रास्ते को कब्जे करने वालों पर प्राचीन धरोहर संरक्षण अधिनियम 1958( संशोधन 2010)के साथ वन्य जीव अधिनियम 1972, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 , वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981की धाराओं के अनुसार करवाई होनी चाहिए क्योंकि परकोटे शफ़िल को तोड़ने से इनमें रहने वाले सरीसृप मारे गए थे उनके आवास उजड़ गए थे और परकोटे के ऊपर झरोखे में पक्षियों सरीसृपों आदि ने घर,घोंसले बना रखे थे वो उजड़ गए उनके अंडे खत्म हो गए और पास के ऐतिहासिक रास्ते में पेड़ भी काटे गए थे उन पर भी पक्षियों के घोंसले थे वो खत्म हो गए पेड़ सजीव होने के कारण उनकी हत्या करना और पेड़ो की हत्या से ऑक्सीजन उत्पादन खत्म हुआ है जिससे प्रदूषण बढ़ा और हवा की गुणवता में भी कमी आई ।
बीकानेर परकोटा के कब्जों से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं क्योंकि कईयों के जो कमजोर है उनके कब्जे तो तुरंत हटा दिए पर मुख्य सड़क पर प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ कब्जा करने वालों पर कोई करवाई नहीं होना शासन प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह है कि शासन प्रशासन?
4 शरह नथानियां गौचर से अवैध कब्जे हटाकर पर्यावरण संरक्षण कार्य करें।
शरह नथानियां गौचर में धार्मिक स्थलों की भरमार बढ़ती जा रही है और इन स्थलों में स्पीकरों से रात दिन भजन गीत संगीत चलता रहता है और मनुष्यों की आवाजाही हर समय रहती है और अनचाहा शोर होता रहता है जिससे पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को परेशानी होती है वो बहुत ही दुखी होते है उनके आपसी संवाद में बाधा पहुंचती है उनकी एकान्तता में बाधा पहुंचती है और वे भयभीत होते हैं।
मनुष्यों के साथ कुत्ते भी चले जाते हैं मनुष्य वहां खाने के समान डाल देते हैं और कुत्ते उस खाने के लिए वहीं पर रहने लगते हैं जो वन्य जीवों के लिए ख़तरनाक होते हैं ये भी सुनने में आता है कि धर्म स्थलों में नशेड़ियों का जमघट लगा रहता है।
अत शरह नथानियां गौचर से धार्मिक स्थलों के कब्जे हटा कर पर्यावरण को शुद्ध करने और वन्य जीवों को सुखमय जीवन देने की सुविधा प्रदान करे।
5 पोलीथीन जलाने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम वन्य जीव अधिनियम आदि की धाराओं पर कारवाई हो।
पॉलीथिन जलाने वालों दुकानदारों जनता को प्रशासन समझाने की जागरूकता अभियान शुरू करे क्योंकि दुकानदार रोजाना पॉलीथिन को जलाते हैं और सफाई कर्मचारियों को भी समझावे कि पॉलीथिन जलाने से पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीवों के साथ मानव जाति के बहुत ही ख़तरनाक है।
पॉलीथिन जलाने से जहरीला धुवां निकलता है जो पर्यावरण के लिए बहुत ही घातक है। मानव के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है यह समझाने के बाद भी नहीं मानते हैं तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम वन्य जीव अधिनियम आदि धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करें।
6 मुख्य सड़क और रिहायशी इलाकों से अवैध मोटर गैरेज ऑटो गैरेज से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है इन पर भी पर्यावरण संरक्षण के अधिनियमों की धाराओं में करवाई हो और इन्हें तुरंत हटाए जाय।
मुख्य सड़क और रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से सरकारी भूमि पर मोटर गैरेज चल रहे हैं जो आमजन के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ख़तरनाक है और पर्यावरण को भी भारी नुक़सान पहुंचा रहे है। ऐसे गैरेजो की पहचान करके उन्हें हटाया जाए और उन पर भी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि धाराओं पर कारवाई की जाय।
पेड़ो के कातिलो ,स्पीकर के शोर से वन्य जीवों पक्षियों पेड़ पौधो पशु पक्षियों को प्रताड़ित करने वालों,प्राचीन धरोहर बीकानेर परकोटा शफ़ील को तोड़कर कब्जा करने और परकोटे के पास के ऐतिहासिक रास्ते को कब्जे करने वालों पर प्राचीन धरोहर संरक्षण अधिनियम 1958( संशोधन 2010) ,वन्य जीव अधिनियम 1972, वायु( प्रदूषण निवारण और नियंत्रण )अधिनीय 1981और पर्यावरण (संरक्षण )अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी जो हुई क्यों नहीं ? ये सोचने का विषय है।
अत उपरोक्त पर तुरंत करवाई के साथ पोलिथिन जलाने वालों ,अवैध मोटर गैरेज पर सख्त करवाई करके पर्यावरण को शुद्ध करने के हमारे अभियान को सफल बनाने के लिए हम शसन प्रशासन के पूर्ण सहयोग की कामना करते है ।उपरोक्त पर्यावरण के कार्यों को करने से पर्यावरण को बहुत फायदा होगा पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीवों को सुखमय शांतिमय जीवन मिलेगा और कब्जे हटाने से हाइकोर्ट के आदेश की भी पालना हो जाएगी।
विशेष _मैं 76 वर्ष का हूं और पचास साल से पर्यावरण संरक्षण कार्य कर रहा हूं ।
लाखों पौधे तुलसी पीपल नीम बिल्व खेजड़े आदि उगाकर निःशुल्क वितरण किए।शासन प्रशासन से अनेकों कार्य कराए इन कार्यों में खेती, ट्रेक्टर प्रिंटिंग प्रेस आदि बिक गए।
निवेदक
भगवानाराम प्रजापति ढाणी
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
7737957772

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 14 वर्ष 38दिनांक 24.03..2026 वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_...
24/03/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 14 वर्ष 38दिनांक 24.03..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
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हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
स्पीकरों के शोर के आतंक से मानव के साथ वन्य जीव, पशु पक्षी, पेड़ पौधे भी गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं। स्पीकरों के शोर से लाभ कुछ नहीं है और नुक़सान बहुत अधिक होता है। स्पीकरों पर तुरंत प्रभाव से सख्त पाबंदी लगाई जाए। स्पीकर बजाने वालों पर वन्य जीव अधिनियम 1972, वायु( प्रदूषण निवारण और नियंत्रण )अधिनीय 1981और पर्यावरण (संरक्षण )अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। स्पीकर के शोर से वन्य जीवों में आपसी संवाद में बाधा पहुंचती है जिससे उनके प्रेम प्रजनन में नुकसान होता है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं । पेड़ पौधे स्पीकर के शोर से असहज हो जाते हैं घायल हो जाते हैं और ऑक्सीजन शुद्ध दे नहीं पाते। मानव जाति पर स्पीकर के शोर से गंभीर खतरा मंडरा रहा है मनुष्य अवसाद में आ जाता है और सही सोच के अभाव में अपराध की ओर बढ़कर बलात्कार हत्या जैसे जघन्य कर लेता है और स्पीकर शोर से अशांत हो जाता है और शांति के लिए नशा करता है और नशे की हालात में वह जो करता है आप सब जानते हो। अत वाहनों दुकानों मंदिर मस्जिद गिरजाघर सगाई विवाह आदि में बजने वाले स्पीकरों पर तुरंत प्रभाव से पाबंदी लगाई जाए। धर्म स्थल शांति के स्थल है और इन मंदिर मस्जिद गिरजाघर आदि धर्म स्थलों में बजने वाले स्पीकरों से ये स्थल अशांति के केंद्र बन गए हैं प्रदूषण बढ़ाने वाले स्थल बनते जा रहे हैं। मानव कुछ पल के लिए शांति के लिए इन धर्म स्थलों में जाते हैं पर स्पीकरों के शोर से धर्म स्थल अशांति के केंद्र बन गए हैं। स्पीकर का असुरी शोर वायु में घुल जाता है और वायु को भी जहरीला बना देता हैं और वायु दूर दूर जाकर भी मानव के साथ पेड़ पौधों वन्य जीवों पशु पक्षियों को घायल कर रहा है। कोरोना काल में जहां शोर अत्यधिक था वहां मृत्युदर ज्यादा रही है । लोक डाउन में शोर कम हुआ था और कोरोना कमजोर हुआ था। इस बात को गहराई से समझे और स्पीकरों के शोर पर हर संभव प्रयास से पाबंदी लगाई जाए। बीकानेर परकोटा शफ़ील प्राचीन धरोहर है इसको तोड़ने वालों पर प्राचीन धरोहर संरक्षण अधिनियम 1958 के साथ वन्य जीव अधिनियम 1972 पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 , वायु प्रदूषण अधिनीय 1981की धाराओं के अनुसार करवाई होनी चाहिए क्योंकि परकोटे शफ़िल को तोड़ने से इनमें रहने वाले सरीसृप मारे गए थे उनके आवास उजड़ गए थे और परकोटे के ऊपर झरोखे में पक्षियों सरीसृपों आदि न घोंसले बना रखे थे वो उजड़ गए उनके अंडे खत्म हो गए और पास के ऐतिहासिक रास्ते में पेड़ भी काटे गए थे उन पर भी पक्षियों के घोंसले थे वो खत्म हो गए पेड़ सजीव होने के कारण उनकी हत्या करना और पेड़ो की हत्या से ऑक्सीजन उत्पादन खत्म हो गया और प्रदूषण बढ़ गया इस कारण उपरोक्त अधिनियम के तहत मुकदमा दायर किया जाकर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए विक्रम संवत 2083के नव वर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस, प्रकृति शक्ति पीठ,ओम मन्दिर में विशेष यज्ञ किया और विश्व शांति के लिए प्रार्थना की गई साथ ही युद्ध रोकने के लिए युद्ध लोलुप देशों के शासकों को सद्बुद्धि मिले की भी माँ प्रकृति शक्ति से प्रार्थना की। घरेलू चिड़ियाँ बीकानेर के सभी आश्रमों से खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्म स्थल ,प्रकृति शक्ति पीठ में अधिक है ।
घरेलू चिड़िया ,(गौरैया ) हमारी बाल्यकाल की पहली मित्र है , हमने समझ पड़ते ही नन्हें साथियों को आँगन में खेलते देखा इन चिड़ियाँ के अस्तित्व को बचाना हमारा
परम धर्म है ।
गौरैया ,घरेलू चिड़ियाँ का विष्व दिवस मनाना सही है इस दिन भी चमत्कारी काम हो ही जाते है जिसे निरंतर करते रहना है ।

प्रकृति शक्ति पीठ में घरेलू चिड़ियाओं के आवास की विशेष व्यवस्था । हर समय इनका
ध्यान रखा जाता ही है फिर भी एक बार जब मुझसे गलती हो गई तो रूठकर चली गई ।
मैंने इधर उधर खोजा कुछ दिनों बाद पानी की टंकी पर मिल गई मैंने विनती की ,उलाहना दिया और गलियाँ भी निकालते हुवे कहा आप लोगों को कब से खोज रहा हूँ आप मेरी गलती से नाराज होकर यहाँ आ गई चलो वापिस घर । ये कहकर आ गया। धीरे धीरे सभी चिड़ियाँ आ गई ।
इस प्रकार एक बार पेड़ छंगाई के समय इनके घोषले को नुकसान हो गया तो चुगा ही नहीं खाया जब मुझे पता लगा गलती से घोसले को नुकसान हो गया मैंने माफी मांगी ,घोसला सही किया तब चुगा खाना शुरू किया । इस प्रकार कई घटनाए घटती है । 22 जनवरी 2017 को असुरों ने प्रकृति शक्ति पीठ के पेड़ पौधों का कत्ल किया था तब मुझे तीन दिन तक भूख नहीं लगी थी पर इन्हे जो चुग्गा डाला इन्होने भी नहीं खाया था ।
एक दिन रात्री में फोन आया, मैं रघुनाथ बिश्नोई सांचोर से बोल रहा हूँ ,मुझे गौरैया चिड़ियाँ को घर पर पालना है मेरा मकान पक्का है मैंने सभी जतन कर लिए फिर मैंने गूगल से मदद माँगी तो आपका फोन दिया कृपया उपाय बतावे । मैंने कहा प्राकृतिक घास फूस का वातावरण दो और लकड़ी का डिब्बा लगा दो ।
दूसरे दिन 20 मार्च 2019 को फोन आता है वे कहते है लकड़ी का डिब्बा लगाते ही कुछ ही देर बाद चिड़िया ने अपना घोसला बनाना शुरू कर दिया है और मैं नीचे खड़ा हूँ फोटो भी लिए है मुझसे डर भी नहीं रही है आज नए दिन को मुझे अपार खुशी मिली है ।
हमने कहा आपके साथ एक परिवार ओर आ गया है आपका सफर सुखमय हो ।
आप भी कुछ सीखे और इन नन्ही चिडियाओं को प्राकृतिक वातावरण दो घर की दीवार पर इनके लिए लकड़ी का डिब्बा लगाकर आवास व खाने पीने की व्यवस्था करो ।
ये नन्ही चिड़ियाँ युगों पहले जो गीत आपकी सुख-समृद्धि का गाती थी आज भी सुबह उठकर वही गीत गाती है ।
रगुनाथ जी से भी सीखो उनसे संपर्क करो (916350468203)
- भगवान, अधिष्ठाता, प्रकृति शक्ति पीठ, बीकानेर फोन: 917737957772


भोजन मनोविज्ञान और स्वस्थ पर्यावरण
वर्जित भोज्य पदार्थ:-
-कुछ भोज्य पदार्थ ऐसे होते होते हैं जो अपनी विशिष्ठ अवस्था में उपयोग में नहीं लाने चाहिए क्योंकि उस अवस्था में वे स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकते है। इसी तरह कुछ शारीरिक अवस्था ऐसी होती है जिसमें भोजन नहीं करना चाहिए।
-सोकर उठने के तुरंत बाद कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए केवल रात्रि में सोकर सुबह उठने पर पानी पीना चाहिए।
-सोने के लिए जाने से ठीक पहले भी होजन कभी नही करना चाहिए। ऐसा करने से कई तरह के उदर विकार हो सकते है।
- भोजन करने के तुंरत उपरान्त स्नान करना भी वर्जित है।
- बहुत थके हुए होने पर भी भोजन नहीं करना चाहिए। ऐसी अवस्था में हल्के गुनगुने एक गिलास पानी में दो चम्मच शहद मिलाकर पीकर पर्याप्त आराम करना चाहिए। आराम करने से कम से कम डेढ़-दो घंटे उपरान्त ही कुछ खाना चाहिए। अधिक थके होने पर भोजन करने से अपच हो सकती है।
- अति गर्म चावल और खिचड़ी खाना भी वर्जित है।
- गर्म भोज्य पदार्थों में दही, रायता व लस्सी मिलाकर खाना भी वर्जित है।
- दूध या उससे बने भोज्य पदार्थों के साथ कच्चा प्याज कभी नहीं खाना चाहिए।
- बासी कच्चा मांस भी खाना वर्जित है क्योंकि इसका पाचन दुखश्कर होता है।
- ज्वर की अवस्था में भोजन नहीं करना चाहिए। तापमान सामान्य होने पर भोजन ले लेना चाहिए। पर यह बहुत हल्का, मात्रा मंे थोड़ा और सुपाचय होना चाहिए।
- शीत काल में ठण्डे खाद्य पदार्थ वर्जित होते है।
- उष्ण और शीतल खाद्य पदार्थ साथ-साथ खाना वर्जित होता है। यह रोग को निमंत्रण देने के समान होता है।
व्रत में भोजन:- भोजन मनोविज्ञान के दृष्टिकोण से व्रत शरीर और मन की एक विशिष्ठ अवस्था का द्योतक है। इसमें हम अपने मन में यह धारणा करते है कि हमें अपने शरीर को पाचन के कार्य से कुछ समय के लिए छुटकारा दिलाना है जिससे पाचन संस्थान निष्क्रिय सा रहकर आराम कर सके और शरीर में विजातीय पदार्थ शरीर उत्सर्जित कर सके। इससे पाचन क्रिया बलवती बनती है जो स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहता है। व्रत वाले दिन तरल पदार्थ जैसे सादा पानी, फलों का रस, लस्सी, सूप, सब्जियों का रस, दूध आदि अन्य ठोस खाद्य पदार्थों से अधिक लेना चाहिए जिससे पाचन कार्य सरलता से हो और साथ ही पाचन संस्थान को कुछ आराम भी मिले। एक दिन व्रत करने का प्रभाव तीन दिन रहता है। व्रत से पहले दिन बहुत ही हल्का, सुपाच्य और मात्रा में कम भोजन ही लेना चाहिए। अगले दिन व्रत करना चाहिए। उस दिन भोजन में मुख्य रूप से तरल पदार्थ ही लिए जाने चाहिए। तीसरे दिन व्रत का उपसंहार होना चाहिए, उस दिन पुनः हल्का, सुपाच्य और अल्प मात्रा में भोजन लेकर व्रत की समाप्ति करें। ऐसी अवस्था में कब्ज न हो इसके लिए रात्रि के समय हल्के गुनगुने पानी में एक चैथाई नींबू का रस मिलाकर लेना चाहिए। अधिक नींबू नहीं लेना चाहिए अन्यथा सायनस की समस्या हो सकती हैं व्रत वाले दिन किसी तरह का भी गरिष्ठ भोजन वर्जित है। इसी तरह व्रत के तुरंत बाद भी भोजन नहीं करना चहिए।
अजीर्ण निवारण:-
भोजन सम्बन्धी समस्याओं में अजीर्ण होना एक सामान्य समस्या है। कई बार भोजन के समय कई कारणों से अधिक खाद्य पदार्थों का उपभोग कर लिया जाता है, परिणामतः अजीर्ण (अफारा अथवा पेट फूलना, गैस, दर्द व बैचेनी आदि) हो जाता है। यह पर्याप्त कष्टकर हो सकता है। इससे छुटकारा पाने के लिए अनेक साधारण व घरेलू उपाय हैं। इनके प्रयोग से इस समस्या का निदान हो सकता है। यदि इन उपायों से लाभ न हो तो चिकित्सकीय उपाय तुरन्त किया जाना चाहिए। व्यर्थ प्रतीक्षा करना अहितकर हो सकता है।
- अधिक घी खा लेने अथवा घी युक्त भोजन कर लेने या फिर अधिक तला-भुना भोजन खा लेने से आए अफारे को दूर करने के लिए गुनगुने पानी में नींबू का रस (अधिक से अधिक आधा नींबू) काली मिर्च का चूर्ण (5-8 काली मिर्च) और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पीना चाहिए। तेज गर्म पानी (सादा) का सेवन भी लाभकारी हो सकता है। पूरी, कचैरी, समोसे, मट्ठी या इसी तरह घी में तले हुए खाद्य पदार्थ अधिक खा लेना अजीर्ण को स्वयं ही निमत्रण देने जैसा है। इसे दूर करने लिए खट्टा मट्ठा, काॅफी, तेज गर्म सादा पानी, अजवायन को उबाल कर उसके पानी मंे थोड़ा सा सेंधा नमक डालकर प्रयोग में लाना लाभकारी रहता है।
- मूली अधिक खा लेने पर उसके प्रभाव को दूर करने के लिए मूली के बीच के नर्म पत्ते लेने चाहिए अथवा थोड़ा सा गुड़ खाना चाहिए या फिर थोड़े से तिल चबा लेने चाहिए।
- नींबू अधिक खा लेने या नींबू का अचार अधिक खा लेने से होने वाली परेशानी को दूर करने के लिए थोड़ा सा नमक चाटना चाहिए अथवा गन्ने का रस ज्यादा पी लेने पर आया आफारा तीन-चार बेर खाकर दूर किया जा सकता ह। परन्तु यदि अधिक बेर खा लेने से अफारा आ जाए तो थोड़ा सा गन्ने का रस या गर्म पानी अथवा गुनगुने पानी में दो चम्मच सिरका डालकर सेवन करें।
- सेब या उससे बने पदार्थ अधिक खा लेने पर जो अजीर्ण होता है उसे दूर करने के लिए थोड़ी सी दाल चीनी का चूर्ण गुनगुने पानी से लेना चाहिए अथवा एक-दो चम्मच गुलकन्द खा लेना चाहिए।
- यदि जामुन अधिक खा लिया जाए या जामुन ठीक से पकी हुई नहीं है तो अजीर्ण हो जाता है। इसे दूर करने के लिए थोड़ा सा (एक-दो चुटकी) नमक चाट लेना चाहिए अथवा पके आम का चार चम्मच रस पीना चाहिए।
- अधपके चावल अधिक खा लेने अथवा अधिक खा लेने या खिचड़ी खा लेने पर अफारे को दूर करने के लिए नारियल गिरी, दही, नमकीन मट्ठा, अजवायन का चूर्ण, थोड़ा सा गर्म दूध या फिर जीरा, हींग, अजवायन, काला नमक दो चुटकी (आधा चम्मच) पिसा मिश्रण (चूर्ण) लेना चाहिए। इस चूर्ण का उपयोग सामान्यतया भी भोजन के साथ दही-मट्ठे में किया जा सकता है, यह पाचक होने के साथ गैस होने पर भी राहत देता है।
- यदि अफारा अधिक अमरूद खा लेने अथवा कच्चे अमरूद खाने से आया हो तो उसे दूर करने के लिए थोड़ी सौंफ चबा लेनी चाहिए।
- उड़द की दाल (काली धुली हुई) या साबुत उड़द अथवा ऐसी ही कोई अन्य वस्तु अधिक खा लेने से आए अफारे को दूर करने के लिए थोड़ा सा गुड़ खा लेना चाहिए।
- मटर खाने के कारण या उससे बने पदार्थ अधिक खा लेने के परिणाम स्वरूप आए अफारे का निवारण नमक-नींबू में रचाई गई अदरक खाने से हो सकता है। यह मिश्रण सामान्यतौर पर भी भोजन के साथ लेना लाभकारी होता है।
- चना, मूंग, उड़द और अन्य दालें अधिक खा लेने से उत्पन्न हुए अजीर्ण को दूर करने के लिए आधा गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच सिरका मिलाकर लेने से लाभ होता हैं।
- खीर, मलाई-रबड़ी या ऐसे ही अन्य खाद्य पदार्थ अधिक खा लेने पर अजीण्र होना स्वाभाविक होता है। इसे दूर करने के लिए चार-पांच काली मिर्च चबा लेनी चाहिए या फिर चूर्ण थोड़ा सा नमक मिला कर ले लें।
- मूंगफली या उससे बनी अन्य खाद्य वस्तुओं का सेवन अधिक कर लेने से उत्पन्न अजीर्ण दूर करने के लिए थोड़ा सा गुड़ या नमकीन मट्ठा (आधा गिलास) पी लेना चाहिए।
- किसी तरह के भी लड्डू अधिक खा लेने पर अजीर्ण अवश्य ही होगा इसे दूर करने के लिए पीपल का चूर्ण गुनगुने पानी से लेना चाहिए। इससे अजीर्ण का कष्ट दूर हो जाएगा।
अजीर्ण अधिकांश अवसरों पर हमारी ही गलतियों, असावधानियों या फिर आदतन अधिक खा लेने के कारण होता है। कई बार तो देखने में आया है कि निमंत्रित भोज के अवसर पर अधिकतर लोगों की सोच अधिक खाना भी होती है। यह अजीर्ण को भी घातक निमंत्रण होता है। थोड़ी सी सावधानी और समझदारी से हम सहज ही अजीर्ण से दूर रह सकते है। यही इससे बचे रने का सर्वश्रेष्ठ उपाया है। परन्तु यदि सावधानी के बाद भी अजीर्ण हो जाए तो तुरंत ही उपाय करना चाहिए।
भोजन सम्बन्धी चिकित्सकीय सुझाव:-
सामान्य स्वस्थ व्यक्ति के लिए भोजन जीवन और उत्तम स्वास्थ्य का आधार है तो पथ्य पूर्ण भोजन अस्वस्थ व रोग ग्रस्त व्यक्ति के लिए उपचार का एक साधन है। भोजन केवल पेट भरने अथवा स्वाद की इच्छा पूर्ति करने अलावा केवल न खा लेने का साधन नहीं है, यह हमारे स्वास्थ्य रक्षा और मनोवैज्ञानिक सन्तुष्टि का भी साधन है। इसीलिए कहा जाता है - जैसा खाए, वैसा ही बने मन। हमारा स्वास्थ्य और इसका स्वरूप हमारे भोजन पर आश्रित है। रोग की अवस्था में इसीलिए पथ्य (परहेज) के महत्व को सभी प्रचलित चिकित्सा पद्धतियों में महत्वपूर्ण माना जाता है। एक परम्परागत मान्यता भी है - ‘‘एक परहेज, हजार नियामत‘‘ अर्थात एक परहेज के माध्यम से स्वास्थ्य की रक्षा की जा सकती है क्योंकि व हजार औषधियों से भी बेहतर होता है। परम्परागत चिकित्सा पद्धतियों में तो पथ्य चिकित्सा का ही एक उत्तम और महत्वपूर्ण अंग माना जाता है। आधुनिक चिकित्सा पद्धति में भोजन व्यवस्था एक स्वतंत्र विज्ञान के रूप में विकसित हो गई है जिसे डायटिक्स या पोषण विज्ञान या आहारिक कहा जाता है। एक डायटीशियन/न्यूट्रीशनिस्ट के रोगी को भोजन के सम्बन्ध मे दिए सुझाव रोग और उसकी अवस्था के अनुरूप भिन्न-भिन्न होते है। इनके पालन से रोगी न केवल जल्द ही रोग मुक्त हो जाता है अपितु स्वास्थ्य में सुधार भी होता है। इस प्रकार के चिकित्सकीय सुझावों से रोग ग्रस्त अवस्था में व्यक्ति के मन पर भी अनुकुल प्रभाव पड़ता है जिससे स्वास्थ्य सुधार की गति में तेजी आती है। मन का तन पर गहरा प्रभाव होता है। इसीलिए इस तरह के सुझावों का मनोवैज्ञानिक प्रभाव व्यक्ति को स्वस्थ करने में सहायक होता है।
प्रेषक दया प्रजापति

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भगवान प्रजापति प्रकृति शक्ति पीठ , खेजड़ा एक्सप्रेस विश्व कर्मागेट
Bikaner
4

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