09/05/2026
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 16_17 वर्ष 38दिनांक 09.05..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
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हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
भारत सरकार के और संसार के वैज्ञानिकों को खुली चुनौती देकर ललकारते हैं कि वे हमारे सूत्र गलत साबित करे या स्वीकार करके लागू करें वरना भारत की गर्मी विकराल रूप धारण करेगी जो विश्व को प्रभावित करेगी।
प्रथम सूत्र _मरू क्षेत्र जो गर्म क्षेत्र है जहां के खेजड़ो बेरी कैर फोग आदिकाल से पर्यावरण की सुरक्षा करते आ रहे हैं इन पर्यावरण रक्षकों का कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए वरना भारत के पर्यावरण को भारी से भारी नुक़सान होगा।
हमने पिछले साल गंगा सिंह विश्व विद्यालय बीकानेर में पर्यावरण के अंतरास्ट्रीय सम्मेलन में कहा था कि बीकानेर के गांवों में जो पेड़ खेजड़े कत्ल हो रहे हैं उससे बीकानेर के साथ राजस्थान और भारत को प्रभावित करेंगे और जिससे विश्व में भी असर पड़ेगा।
राजस्थान वन आच्छादित 9 प्रतिशत है और यहां मरू क्षेत्र है जहां तापमान अधिक रहता है और यहां के तापमान को यहां के खेजड़े बेरी कैर फोग बावलिये आदि को सुचारू रूप से चला रहे हैं।
सरकार की नीति के तहत ग्रीन उर्जा के नाम पर विकास के नाम पर इन पर्यावरण रक्षकों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने के कारण गर्म क्षेत्र और अधिक गर्म क्षेत्र बन रहा है और पेड़ो खेजड़ों में भय का वातावरण बन गया उनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी और पेड़ों खेजड़ो आदि पर सदियों से निवास करने वाले वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों आदि के भी कत्ल हो गए और कुछ घायल हो गए तो बेघर भी हो गए इनकी उदर पूर्ति के साधन छिन्न गए इनका सहारा छिन्न गया इनमें भी भय का वातावरण बन गया और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी।
साथ ही खेजड़े राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है जो हर पावन पर्व पर खेजड़ी और खेजड़ी के रूँख से पूजा की जाती है। इस प्रकार संस्कृति सभ्यता सनातन धर्म से जुड़े लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए रात्रि में खेजड़ों का चोरी से कत्ल किया जाना उनके लिए हृदय विदारक घटना से पीड़ा की तरंगें निकली और
वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों पशुओं की पीड़ा की तरंगें इतनी विकराल हो गई कि प्रकृति का संतुलन डिगमिगा गया। और चारों तरफ आग फैल गई है।
सोचने की बात यह है कि जहां आग बरस रही है उस आग को बुझाने की बजाय वहां उस आग को तीव्र करने की कोशिश करना महाविनाश करना है।
जब राजस्थान का यह मरू क्षेत्र पहले से ही सुलग रहा है तो फिर इसमें पेड़ों खेजड़ो का कत्ल करना महाविनाश है और यह आसमान से बरसती ये आग इसकी चेतावनी हमने पिछले साल दे दी थी और वर्षों से कह भी रहे हैं ।
दूसरा सूत्र _पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को पटाखे स्पीकर से प्रताड़ित करना तुरन्त प्रभाव से रोका जाए पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें वरना भारत का पर्यावरण और तहस नहस हो जाएगा । अभी भारत विश्व में प्रदूषण में अग्रणी देशों में है।
पटाखों,स्पीकर ,पॉलीथिन जलाने से धुंए और शोर से वायु में जहर घुल जाता है जिससे पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों में भी भारी वेदना होती है और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदा आती है और यह हम वर्षों से कह रहे हैं और परिणाम आपके सामने हैं आग उगलता भारत।
यह प्रश्न हमारा भारत के सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री जी से कर रहे।
सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधानमंत्री जी , सादर वंदे।
आप और आपकी सरकार यह बतावे कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इतने खतरनाक पटाखें स्पीकर है जो सब प्रकार रोग हार्ट बहरापन गूंगापन शुगर चिड़चिड़ापन आदि गंभीर रोगों को उत्पन्न करता है।
जिनसे वायरस रोग चिंता अवसाद नशा अपराध आदि बढ़ता है।
ऐसे खतरनाक पटाखें स्पीकर पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे लगता है और उनकी धर्म आस्था कैसे आहत होती है?
आदरणीय
मुख्य मंत्री श्री भजनलाल जी,शर्मा जी, सादर वंदे।
मैं आपसे भी पूछता हूं कि
राजस्थान में अपने राज्य में स्पीकर बजता है तो उस पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे पहुंचता है और उनकी आस्था कैसे आहत होती है?
भारत सरकार प्रशासन, राजस्थान सरकार प्रशासन बतावे कि स्पीकर पटाखों से धर्म का क्या संबंध है,?
स्पीकर पटाखों पर पाबंदी से आस्था विश्वास पर आघात कैसे लगता है?
ये बता दे मैं कभी इन पर पाबंदी लगाने का नहीं कहूंगा।
शास्त्रों में देव मानवों ने एकान्तता एकाग्रता का कहा है
राक्षसी मानवों का मुझे पता नहीं।
करोना में लोक डाउन में शोर कम हुआ था और करोना कमजोर हुआ था।
भारत में सभी तीज त्यौहार पर्यावरण संरक्षण के लिए ही बनाए गए थे और भारत संसार में पर्यावरण पर एक आदर्श देश था।
अब भारत प्रदूषण में संसार में शीर्ष स्थानों में है और राजस्थान भी तथा बीकानेर का तो बहुत ही ख़तरनाक हालात है।
हमारा बीकानेर बहुत ही पवित्र शहर था चारों ओर गोचर भूमियों का पहरा और शहर में अंदर बाग तालाब आदि के कारण बीकानेर पर्यावरण संरक्षण में श्रेष्ठ था जो आज दुनिया के प्रदूषित शहरों में अग्रणी बन गया है और बनता जा रहा है।
भारत सरकार प्रशासन राजस्थान सरकार प्रशासन ये भी बतावे कि स्पीकर पटाखों पॉलीथिन जलाने से कौन सा विकास होता है
स्पीकर पटाखों से यदि विकास होता है तो चारों ओर इनकी धूम मचा दी जाए।
बड़े ही शर्म की बात है कि स्पीकर पटाखों पर पाबंदी लगाने की बात करते हैं तो कहते हैं हमारे धर्म पर आघात लगाया जा रहा है हम इससे आहत हो रहे हैं।
वाह वाह पहले इन्हें पूछो कि जब स्पीकर नहीं थे तो तब तो कोई धर्म कर्म होते ही नहीं थे क्या। उस समय के धार्मिक कार्य भजन कीर्तन बिना स्पीकर से ही होते थे और उनकी आवाज रात्रि में सुखद अनुभव देती थी पेड़ पौधे पशु पक्षियों वन्य जीवों को सुखमय आनंद मिलता था।
आज के स्पीकर से गीत संगीत गजल भजन कीर्तन करते हैं तो वायु में जहर घुल जाता है और यह हर प्राणी के लिए घातक होता है।
पशु पक्षी पेड़ पौधे वन्य जीव प्रताड़ित होते है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा मिलता है और अवसाद वायरस रोग चिंता भय अपराध आदि को बढ़ावा मिलता है।
साथ ही जो स्पीकर बजाते हैं और जो सुनते हैं उन्हें पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों की पीड़ा की तरंगें अभिशाप का काम करती हैं उनके घर में अवसाद अशांति रोग चिंता भय क्लेश बना रहता है और उनकी मौत जहर बन जाती है ये सब अनुभूत है और आप भी यह सब अनुभव कर रहे हैं पर धर्म स्थलों में स्पीकरों को बंद कराने से डरते हो कि वहां के ईश्वर नाराज हो जाएंगे और पाप लगेगा।
बहुत खूब यदि धर्म स्थलों में ईश्वर है तो यह करोना काल में ताला लगा कर क्यों भाग गए? धर्म स्थलों के ईश्वर कह सकते थे कि धर्म स्थल बंद नहीं होंगे हमारे भक्तों को करोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पर किसी धर्म स्थल ने अपने वर्चस्व को नहीं बताया सबके सब ताला लगा कर भाग गए थे और पुजारी सरकार प्रशासन और लोगों से सहयोग करने की याचना करने लगे थे।
अरे ईश्वर के धर्म स्थलों में कार्य करते थे तो उस धर्म स्थल के ईश्वर का दायित्व बनता था कि वे पुजारी को तो खाना पानी देते।
उस समय धर्म स्थल ताला लगा कर भाग गए थे तो पेड़ पौधे आपके ढाल बनकर आपको बचाने आगे आए थे।
हमने भी उस समय हमारे आश्रम प्रकृति शक्ति पीठ ओम मन्दिर बीकानेर से सैकड़ों हजारों लोगों को नहीं बल्कि लाखों लोगों को गिलोय तुलसी पपीते के पते काढ़े के लिए देकर भरपूर निःशुल्क सेवा की थी।
और आज करोना काल में दुःख में साथ देने वाले पेड़ पौधों को स्पीकर से प्रदूषण बढ़ाकर प्रताड़ित कर रहे हो।
क्या इस दुष्कर्म से आप लोगों शांति सुख समृद्धि मिलेगी?
सोचना होगा और भारत को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्पीकर पटाखों पर अविलंब सख्त पाबंदी लगानी होगी।
स्पीकर पटाखों से किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं होता पटाखों से हर साल अनेक लोग मर जाते हैं और पशु पक्षियों वन्य जीवों को भी भारी नुक़सान होता है और अनेक मौत के ग्रास बन जाते हैं और पॉलीथिन जलाने से हवा में खतरनाक जहर घुल जाता है जो हर प्राणी को बहुत ही ख़तरनाक नुक़सान पहुंचा रहा है।
इन सभी कृत्यों से भारत के पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है और उदाहरण है भारत में आग वर्ष रही है।
यदि इससे बचना है तो पेड़ों खेजड़ो के कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए और पेड़ो खेजड़ों को घायल करने वाले पटाखों स्पीकर पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और इन पर पाबंदी लगाई जाए।
समझ गए हो तो आओ भारत को पर्यावरण संरक्षण कार्य में अग्रणी बनाने का अभियान शुरू करें जिसमें हम आपको हमारे शोध के सूत्र बताएंगे जिसे लागू करने से तत्काल जल वायु परिवर्तन में सुधार होना शुरू हो जाएगा। और किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं रुकेगा बल्कि विकास कार्य भी तेज गति से होगा
प्रार्थी
भगवानाराम प्रजापति ढाणी ( भगवान भारती)
अधिष्ठाता _ओम मंदिर, प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर
संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक
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