09/09/2026
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 2 वर्ष 39दिंनाक 9-.9-26पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
वार्षिक 36 रुपये मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर _25_25_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृतिए माता.पिता. गुरु. प्रकृति
वनस्पतिए तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
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हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्मvकर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी विश्वविद्यालय से सम्मानित
24 अगस्त को पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के 39 वें सफर का शुभारंभ अंक का विमोचन पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस कार्यालय कर्मस्थली प्रकृति शक्ति पीठ में यज्ञ करके किया। इस संदर्भ में खेजड़ा एक्सप्रेस संपादक ने बताया किवर्षों से पर्यावरण संरक्षण कार्य कर रहे हैं
आप भी पर्यावरण संरक्षण कार्य के लिए आईए यज्ञ करें पेड़ पौधों को तैयार करें पेड़ पौधे लगाने का।
तुलसी पीपल नीम जामुन गिलोय आदि लगाएं।
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्म स्थल ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ की
वर्षों से चल रही सेवा से निशुल्क पेड़ पौधों का लाभ ले ।
भगवानाराम
ध्वनि प्रदूषण की पालना नहीं होती है तो कोई लाभ नहीं है पर
सुप्रीम कोर्ट आदेश 18 जुलाई 2025 की
ध्वनि प्रदूषण पढ़े तो पता चले लिखा है घर की टीवी कि आवाज पडोसी को नहीं सुनाई देनी चाहिए तो मंदिर मस्जिदों अदि धर्मस्थलो में स्पीकर क्यों बज रहे हैं ! किस शास्त्र में लिखा है?
जब सुप्रीम कोर्ट ने कहा है ध्वनि प्रदूषण से बहरापन ,गूंगापन, चिडचिडापन,अपंगता ,ब्लडप्रेषर अदि की गंभीर बीमारियाँ होती है तथा अनेक प्रकार के नुकसान बताये है !
ध्वनि प्रदूषण से पेड़ पौधों , पशु पक्षियों को भारी नुकसान होता है फिर भी रातभर विवाह ,समारोह ,आडम्बरी जागरण के साथ बारात में कर्कष आवाज के डीजे बजाते है तथा पटाखों के खतरनाक शोर से ओर भी भयावना प्रदूषण करते है !
कोरोना काल में ताली ,थाली ,दीपक में भी पटाखों का खूब इस्तेमाल हुवा था हमने खूब विरोध भी किया जिससे हमें गन्दी गालियाँ ही मिली पर सरकार चुप ही रहे क्योंकि इन्होने कभी ध्वनि प्रदूषण पढ़ा भी तो नहीं
जैसे निष्चलानंद जी शंकराचार्य
जी कहते है हिंदू शब्द ऋग्वेद में है क्योंकि उन्होंने ऋग्वेद पढ़ा नहीं पढ़ा होता तो यह नहीं कहते जहाँ तक देखा भी नहीं होगा !
हमने विरोध किया तो गालियां ,बस इनके पास ये ही एक साधन है सत्य को जानना चाहते ही नहीं इन्हें नहीं पता
शब्द में शक्ति होती है और जिस शब्द का मूल अर्थ होता है वो शब्द उसी अर्थ के अनुसार वातावरण को प्रभावित करता है !
हिंदुत्व के शब्दों में संसार के वातावरण को प्रदूशित कर रखा है हम इस वैज्ञानिक तरीके से प्रमाणित करेंगे ! किसी में साहस है तो खुले मंच पर शास्त्रार्थ को आ जावो !
माँ प्रकृति ईश्वर है ! बाकी सब आडम्बर है,
धर्म स्थल दुकाने है इसका ज्वलंत उदाहरण कोरोना में सभी मंदिर ,मस्जिद अदि दुकानों की तरह बंद हो गए इनमें ईश्वर
होता तो भक्तों की रक्षा हो जाती !
ओम शब्द में शक्ति है फिर भी मूल ओम की विकृत आकृति लिखी जा रही जिससे संसार प्रभावित हो रहा है क्योंकि ओम की ध्वनि से ब्रह्माण्ड की रचना हुई ओम ही संसार के धर्म सनातन का प्रवर्तक है ! बाकी धर्म नहीं संप्रदाय है जो मनुष्यों ने बनाया है !
सनातन धर्म को 25 -08-14 से पहले सभी संत शंकराचार्य तथाकथित हिंदू धर्म बोलते थे हमारे अथक प्रयास से सनातन धर्म अगस्त चोदह से बोलना शुरू किया पर प्रचार प्रसार नहीं किया और न ही सनातन धर्म क्या है इसके बारे में जानकारी दी
नहीं दी है
इन्हे न तो सनातन धर्म संस्कृति का पूरा ज्ञान है और न ही इन्हे ये पता कि संसार का एक मात्र धर्म ईश्वर रचित सनातन धर्म है और बाकी मानव निर्मित सम्प्रदाय है।
सनातन धर्म क्यों पिछड़ गया है यह संत शंकराचार्य नहीं जानते।
इन्हे सनातन धर्म संस्कृति का पूर्ण ज्ञान हम जैसे वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक पुरुषों से लेना चाहिए और फिर प्रचार प्रसार करना चाहिए।
हम वर्षों से पूछ रहे हैं कि
संत शंकराचार्य अखाड़ा परिषद महामंडलेश्वर आदि को भगवा
सनातन धर्म ने दिया है
और इन्होंने भगवा से खूब मजे लिए हैं
पर सनातन धर्म का प्रचार प्रसार नहीं किया और सनातन धर्म विश्व गुरु से सिमट कर अंतिम सांसे गिन रहा है क्यों क्यों
क्यों का उतर नहीं दे सकते तो अपने पद और भगवा का त्याग करें
और उतर हम देंगे।
दूसरा प्रश्न, संत पथ भ्रष्ट हो रहे झूठ कपट ठग बन रहे हैं क्यों इसका उतर दे नहीं तो पद भगवा से त्याग दे। उतर हम देंगे
महाभारत के बाद नाग वायरस फैला था और उसमें धरती पर पैर रखने से नाग का जहर चढ जाता था और मौत हो जाती थी ऐसे डरावने समय में ऋषि मुनियों कि सलाह ली गई थी और ऋशि मुनियों ने सलाह करके तीन सूत्र दिए ।
ऋशि मुनियों ने सूत्र दिए जिसमे पहले सूत्र से शस्त्रों
का इस्तेमाल बंद कर दिया ,
शस्त्र छुपा दिए थे ! और नाग वायरस से मुकाबला जावे
हां तो हम कह रहे थे शास्त्र छुपा दिए थे इन्ही शास्त्रों की खोज में भारत के मूल निवासियों यानि यदुवंषी जो भारत के यदुवंषी सुदूर चले गए थे उनके वंषज वापिस जब भारत आये तो उनके साथ यहूदी जासूस भी आये और यहाँ वो पढ़कर ब्राह्मण बने और उन्होंने संस्कृति का ज्ञान लेकर उन शास्त्रो की खोज करनी शुरू की जिन्हें नाग वायरस के समय छुपा दिए थे जिनमे षस्त्र निर्माण की विधियाँ लिखी हुई थी उन्हें खोज करके अपनी भाशा में बदलकर विदेष भेज दिए कुछ इस्लाम वालों को भी मिल गए थे !
आज भारत वर्श में भारत की आर्य संस्कृति सनातन धर्म के घटक व स्रोत बचाने वाला एक भी व्यक्ति नहीं है !
संत ,धार्मिक गुरु ,कथावाचक अदि भारतके षास्त्र संविधान की तो खुली धज्जियाँ उडा रहे है साथ ही गीता का भी घोर अपमान भी कर रहे है और ये ही आडम्बरी लोग गीता को राश्ट्र ग्रन्थ कराने का भी आडम्बर जोर षोर से कर रहे ताकि लोग इन्हें गीता भक्त कहते रहे पर हम खेजड़ा एक्सप्रेस तो इन्हें खुलेआम ललकारते है कि ये लोग गीता का घोर अपमान कर रहे है जिसे हम प्रमाणित कर सकते है कोई मंच इस पर खुली बहस करावे तो पता लगे ! गीता का अपमान से भी वायुमंडलमें प्रदूशण को बढ़ावा मिलता है !
यह संस्कृति के विनाषक ही पर्यावरण में जहर घोलते है और इनके षब्दों के प्रभाव से वायुमंडल प्रभावित होता है क्योंकि षब्द एक महाविज्ञान है इस समझना नितांत आवष्यक है !
!
जिसे ध्यान से पढोगे तो सूत्र का बहुत सा भाग आपको मिला जायेगा बाकी अपने विवेक से खोजो या हमारे पुराने अंक पढ़ो
!सुप्रीम कोर्ट को प्राणी कल्याण के लिए हमारे सूत्र के गुढ़ तत्व को वैज्ञानिकों को समझाने के लिए प्रार्थना पत्र स्वीकार करना चाहिए !
एक बात ओर जो बहुत ही महत्वपूर्ण है जिसे सुप्रीम कोर्ट के साथ जनता को भी जान लेनी चाहिए !
हमने ऊपर लिखा भारत की मूल आर्य संस्कृति सनातन धर्म के घटक व स्रोत को बचाने वाला कोई नहीं है क्योंकि इन्हें पता ही नहीं है कारण साफ है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय,विष्वविद्यालय यह नहीं जानते कि ओम को शुद्ध आकृति कौनसी है ? सनातन और सनातन धर्म क्या है ? हिंदू ,हिंदू धर्म और हिंदुत्व क्या है ? भारत के चार नाम क्यों है ?
उपरोक्त विशयों की जानकरी ही नहीं है फिर भी फार्मो में हिंदू धर्म का काॅलम आता है और राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों के आगे हिंदू धर्म लिखा है और आरएसएस भी हिंदू धर्म का राग अलापता है तो सरकार के पास इसकी जानकारी क्यों नहीं है ? विष्वविद्यालयों के पास जानकारी क्यों नहीं है ?
अब हम सुप्रीम कोर्ट से पूछते है हिंदू धर्म का प्रवर्तक कौन है और कब से है ?
क्योंकि राम मंदिर ट्रस्ट जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देष पर बनी है !
उपरोक्त जानकारी सरकार व सुप्रीम कोर्ट के पास तो नहीं है पर हमारे खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय में यह सब जानकारियाँ प्रमाण सहित उपलब्ध है !अत सुप्रीम कोर्ट सही जानकरी लेकर भारत कि जनता को बताने कि कृपा करे !
हमने लिखने में कोई त्रुटि कि है या कोई अपमानजनक षब्द भूलवष लिख दिया है तो हम माफी मांगते है पर ईष्वर कृपा से हमने पूर्णत सत्य ही लिखा है और ईष्वर की माया ईष्वर ही जाने !
पत्र को देखिये आप भी और जो लोग सूत्र पूछते है वो इस पढ़े और खेजड़ा एक्सप्रेस के पेज चार को भी पढ़े जो इस पत्र का संविधान है !
जरा सोचों शब्दों का प्रभाव! 90 के दशक से हिन्दूत्व का जोर-शोर से प्रचार हुआ! उसी के अनुसार हिन्दूत्व के अर्थ के अनुसार भारत ही नहीं संसार प्रभावित हुआ है। और अभी इन शब्दों के कारण जा ेवातावरण प्रदुषित हुआ है। जिसमें कोरोना के शवों के कफन की चोरी, दवाईयाँ, मिलावट आदि हो रहे हैं । जिससे कोरोना को भी शक्ति मिली है।। इन सब को हम प्रमाणित कर सकते हैं।
ओमशांति ! आर्य संस्कृति सनातन धर्मेव जयते !
पर्यावरण व अध्यात्म में अन्नय सम्बन्ध हैं
शब्द में शक्ति है। शब्द शांति करा सकते हैं और शब्द संघर्ष
करा देता है के सिद्धान्त पर आज का कोरोना वर्शों की जटिल प्रक्रिया के बाद इस रूप में विकसित हुआ है । महाभारत के बाद नाग वायरस विकसित हुआ था। जिसमे सांप का जहर चढ़ता था। जिसे पर्यावरण के ज्ञाताओं ऋशि मुनियों की सलाह से शांत किया ।
प्रदूशण के साथ मिलावट व अध्यात्म में आडम्बर , षास्त्रों का अपमान , संविधान का अपमान तथा पर्यावरण के साथ खिलवाड़ ,वैज्ञानिक विकास औद्योगिक विकास से प्रकृति के अतिदोहन से कोरोना सूक्ष्म रूप में जन्म लेकर विकराल रूप में आया था
डाॅलर का चिन्ह संस्कृत का है आज डाॅलर विकसित है और जब से रूपये के चिन्ह को र काटकर बनाया है जो अशुभ है तब से रूपया रसातल में जा रहा है
उपरोक्त तथ्यों पर दृश्टि डालने पर दर्पण की तरह साफ दिखाई दे रहा है, की मानव के क्रिया कलापों से ही पेड़ पोधे , पषु पक्षी प्रताड़ित हुवे और उनमें पीड़ा की तरंगे उठी जिससे माँ प्रकृति क्रोधित हो गई और मानव को समझाने के लिए प्राकृतिक आपदाओं से चेतावनी दी पर मानव नहीं माना तो छोटे छोटे वायरसों के बवंडर रूपी थप्पड़ मारे फिर भी नहीं माना ।
जीवन रक्षक पेडों की अत्यधिक कटाई से पेड़ पौधों में दूशित वायु को षुद्ध करने की तंत्र प्रक्रिया अवरुद्ध हो गई पेड़ पौधे अवसाद में आ गए ।
मानव को आवष्यकता के अनुसार षुद्ध वायु मिलना बंद हो गया। मानव भी अवसाद में आने लगा
मानव 10 प्रतिशत अवसाद में आया था तब से हमने सरकार को लिखना षुरू किया कि हमारे पर्यावरण के षोध के सूत्र अपना लो , भारत सरकार ने हमारे पत्र जो कई लोगों के हस्ताक्षर कराकर भेजा था उस पत्र को यहाँ जाँच के लिए पुलिस को भेज दिया और वह जाँच क्या हुई आज तक पता नहीं चल पाया ! यह वाकया बड़ा ही हास्यास्पद है !
हम फिर भी लिखते रहे हंै कि हमारे षोध के पर्यावरण के सूत्र अपना लो वरना स्थिति गंभीर हो जायेगी और हो गई है ! पीएमओ हाउस ,स्वास्थ्य मंत्रालय को फोन भी किया, सारी बात बताई और जबाव भी हास्यास्पद
मिला। फोन पर पूरी बात सुनकर बोले आपको क्या सहयोग चाहिये और फोन काट दिया !
जबकि सब जानते है आज तक छः लाख से अधिक तुलसी के पौधे ,हजारों पीपल व अन्य पोधे उगाकर बिना किसी राजकीय व सार्वजनिक चंदे के स्वार्जित सम्पदा से निषुल्क वितरण किये है और यह कार्य आज भी सुचारू रूप से चल रहा है !