Khejara Express

Khejara Express पर्यावरण से सम्बंधित सभी जानकारीया आ?

पर्यावरण, आध्यात्मिक एवं
समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य
रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व
का अग्रणी शास्त्र
खेजड़ा एक्सप्रेस पूरा पढ़ने से शास्त्र का
पूण्य मिलेगा

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस  वर्ष 38 , अंक 20दिनांक 09,6,2026वार्षिक 36 ण्रुपये ण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025,202...
09/06/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
वर्ष 38 , अंक 20
दिनांक 09,6,2026
वार्षिक 36 ण्रुपये ण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025,2025se27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहेण्
आर्य संस्कृतिए माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म ण्कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति
मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठए खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्म स्थल प्रकृति शक्ति पीठ में प्रतिदिन पर्यावरण दिवस होता है
तुलसी पीपल नीम बिल्व खेजड़े जामुन आदि पौध और खेजड़ी सहजन आदि बीज निःशुल्क वितरण का लाभ उठाओ।
पर्यावरण दिवस पर आडंबर न करें,
पेड़ पौधे लगाओ,उन्हें बचाओ।
ऊगे हुवे पेड़ों बेरी खेजड़ो आदि को बचाओ ।
यह बहुत ही पुनीत कार्य है।
स्पीकर पटाखों पॉलीथिन जलाने से पेड़ पौधे वन्य जीव घायल होते हैं जिससे घोर पाप लगता है।
अत धर्म स्थलों में स्पीकर बजता है तो वहां से पाप बढ़ता है और पुण्य क्षीण होता है।
स्पीकर बजाने वालों और सहयोग देने वालों के घर में पाप के कारण क्लेश चिंता रोग अवसाद बढ़ जाता है और मृत्यु जहर बन जाती है।
माँ प्रकृति नमः!पर्यावरण दिवस पर विशेष मानसून ने भारत में 26 मई की तारीख दी थी
उसके बाद तारीख पर तारीख देता हुआ दस दिन बाद आया यानि 4 मई को भारत आया तब तक तो हाय तोबा मच गई
जबकि
कोर्ट,सरकार प्रशासन नेता आदि सब तारीख पर तारीख देते हैं और व्यक्ति परिणाम आने से पहले मृत्य लोक प्रस्थान कर जाते।
प्रकृति के मानसून ने मानव जाति को चेतावनी दी है सुधर जाओ।
वरना स्थिति बहुत भयानक होगी। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ मत करो।
वर्तमान में सम्माननीय मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पर्यावरण प्रेमी विकास विरोधी हैं और इससे पहले 25 मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा कि पर्यावरण का नुकसान करके विकास करना विकास नहीं है विनाश है।
पर्यावरण यानि आपके शरीर को सुरक्षित रखने का घेरा। आपके चारों ओर का सुरक्षित कवच। पर्यावरण को बचाने का मतलब है आप अपने आप को बचा रहे हो आप अपने शरीर को सुरक्षित स्वस्थ रखने का कार्य कर रहे हो।
यदि आपके शरीर के बाहर का घेरा सुरक्षित नहीं है तो आप निश्चय ही बीमार पड़ोगे। कमजोर होते जाओगे। आपके शरीर पर वायरस आक्रमण करेंगे। आप अवसाद रोग चिंता भय से ग्रसित होने लगोगे।
अत आपको पर्यावरण को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए पृथ्वी हवा पानी को शुद्ध रखना होगा। आप पृथ्वी पर गन्दगी डालोगे तो वह हवा में घुलकर आप पर आक्रमण करेगी। वह गंदगी पानी में घुलकर आप पर आक्रमण करेगी। आप हवा में गंदगी डाल रहे हो तो वह सीधी आप पर आक्रमण करेगी और पानी में गंदगी डाल रहे हो तो वह भी आप पर आक्रमण करेगी।
पर्यावरण का मतलब यह है कि आपके चारों ओर का सुरक्षित कवच।
कुछ लोग प्रकृति बचाओ के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं। कुछ लोग धरती बचाओ नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं तो कुछ लोग धरती बचाओ। कुछ लोग पञ्च तत्व बचाओ के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं।
गंगा नदी शुद्ध करो अभियान तो जमुना बचाओ, नर्मदा बचाओ, अरावली बचाओ आंदोलन, पर्वत बचाओ । हिमालय बचाओ, नदियों को शुद्ध रखें, समुंद्र शुद्ध रखे, जंगल बचाओ, पेड़ बचाओ आंदोलन आदि आदि चल रहे हैं और
ये सभी लोग पर्यावरण संरक्षण का कार्य ही करते हैं। अपने को बचाने का कार्य करते हैं।
हालांकि
प्रकृति, धरती, पृथ्वी पञ्च तत्व बचाओ आंदोलन की बात करते हैं उन्हें नहीं पता कि प्रकृति धरती पृथ्वी पञ्च तत्व बचाना मनुष्य के हाथ का मनुष्य के वश का काम नहीं है। ये अक्षुण्ण है ये अरबों वर्ष स्थाई रूप सुरक्षित है और रहेंगे।
बचाना है तो अपने आपको बचना चाहिए और वह है पर्यावरण
पर्यावरण बचाना अपने को बचाना है पर्यावरण का कार्य विशाल से विशाल है पर्यावरण कार्य अनगिनत हैं जैसे शरीर में जितने रोम हैं पर्यावरण कार्य भी उतने ही है।
इस प्रकार पर्यावरण कार्य अनगिनत है और यह कार्य अनवरत चल रहे हैं और चलते ही रहेंगे क्योंकि इस धरती पर सबको अपने शरीर को स्वस्थ सबल युवा बनाए रखना है तो पर्यावरण का कार्य करते ही रहना होगा। ये पर्यावरण कार्य करना प्रकृति पर कोई अहसान नहीं है पेड़ पौधे वन्य जीव पशु पक्षियों आदि को बचाना मानव जाति का दायित्व है और जो ये नहीं कर रहे है वो मानव जाति का कहलाने का अधिकार नहीं रखता।
मानव जाति को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण कार्य रचनात्मक रूप से करना चाहिए और इसके लिए आप पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर से जुड़ सकते हैं यहां वर्षों से पर्यावरण संरक्षण कार्य रचनात्मक रूप से अनवरत चल रहा है और यदि आप प्रकृति शक्ति पीठ में आओगे तो आपको प्राचीन काल वैदिक काल के आश्रम में होने का आभास होगा और असीम शांति मिलेगी।
आईए एक बार अवश्य पधारे।
पर्यावरण संरक्षण कार्य के लिए आप अपने चारों ओर शुद्ध हवा मिलती रहे इसका ध्यान रखना होगा और इस पर कार्य करोगे तो आप स्वस्थ सबल युवा बने रहेंगे और आपको सुख समृद्धि शांति मिलती रहेगी
तो आइए आपको पर्यावरण को अत्यधिक नुक़सान पहुंचाने वाले घटकों के बारे में जानकारी देते हैं।
बड़े स्तर पर पर्यावरण को नुक़सान तो बड़े बड़े कारखाने, युद्ध सामग्री निर्माण, संसार में जगह युद्ध विभीषिका आदि अनेकानेक है।
हमने पहले भी कई बार लिखा है और अब भी लिख रहे हैं कि जहां आग बरस रही है और वहां और आग लगने के कार्य करोगे तो यह बेहद खतरनाक होता है।
राजस्थान का मरू क्षेत्र गर्म क्षेत्र है और इसे खेजड़ी बेरी कैर फोग आदि बचा रहे हैं और इन्हीं का कत्ल करने से स्थिति तो भयावनी हो होगी और हो गई।
ग्रीन उर्जा के नाम पर खेजड़ी बेरी आदि का भारी तादाद में कत्ल कर दिया और इसी कारण पूरे भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ा। ये हम तो बहुत पहले से ही कह रहे हैं और कई सार्वजनिक मंचों पर कहा है।
पिछली 29 मई 2025 को गंगा सिंह विश्व विद्यालय में अंतराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में कहा था कि खेजड़ी कटाई से पूरे भारत को भारी नुक़सान होगा।
अब वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि उतर पश्चिमी मरू क्षेत्र से गर्म हवा आ रही है जिसके कारण भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ा है।
खेजड़ी के साथ बेरी गर्मी को कम करने में बहुत मदद करती है।
पेड़ों को लगाना चाहिए और उन्हें बचाना चाहिए।
पेड़ स्पीकर बजाने पटाखे छोड़ने के शोर से घायल होते हैं। स्पीकर का शोर हवा में घुलकर हवा को जहरीला बना देता है और यह हवा पेड़ों पर जाती हैं तो पेड़ पौधे घायल हो जाते हैं और शुद्ध ऑक्सीजन नहीं दे पाते और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलती है।
साथ ही पशु पक्षी वन्य जीव में भी स्पीकर के शोर से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं।
ये कार्य पॉलीथिन जलाने से होता है और पॉलीथिन के सूक्ष्म कण भी हवा में घुलकर हवा को जहरीला बना देते हैं और तापमान में वृद्धि होती है।
इस प्रकार जलवायु परिवर्तन में ये घटक बहुत ही ख़तरनाक कार्य कर रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और इसके लिए हमारे शोध के सूत्र लागू करने से तत्काल प्रभाव से जलवायु परिवर्तन में सुधार होना शुरू हो जाएगा। ये पूर्णतः सत्य है।
शीर्ष पद बैठा व्यक्ति पर्यावरण कार्यकर्ताओं को विकास विरोधी बतावे तो इसका मतलब यह है कि उनके पास पर्यावरण ज्ञान शून्य है ।पर्यावरण विशाल है और उसमें स्पीकर पटाखे छोड़ने और पोलीथीन और पॉलीथिन जलाने का विरोध कर रहा है तो क्या वह पर्यावरण प्रेमी विकास विरोधी है। पेड़ों खेजड़ो को सुरक्षित रखना और उगाना विकास विरोधी है ? जवाब दे।
पर्यावरण संरक्षण कार्य ही अध्यात्म हैं।
बाकी तो सब धन संचय के साधन हैं।।
गहराई से जानना चाहते हो तो।
दो कदम हमारे साथ चलके देखो।।
गो वध से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं और यह पर्यावरण के लिए बहुत ही ख़तरनाक है ये पीड़ा तरंगें विकसित होती हैं और हवा में घुलकर पेड़ पौधों वन्य जीवों आदि के साथ मानव जीवन पर भी प्रभाव डालती है। पीड़ा की तरंगें हर जीव वध से निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाएं आती है। यह परम वैदिक सत्य है इसे संसार का कोई वैज्ञानिक गलत नहीं कर सकता।

24/05/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
वर्ष 38 , अंक 19
दिनांक 24,5,2026
वार्षिक 36 ण्रुपये ण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025,2025se27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहेण्
आर्य संस्कृतिए माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म ण्कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति
मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठए खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
हम थार रेगिस्तान में जब से पेड़ खेजड़े कट रहे थे तब से कह रहे थे और हमारे पत्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस में भी लिख रहे थे कि राजस्थान में वन आच्छादित केवल 9 प्रतिशत है और इस मरू क्षेत्र के पर्यावरण को सुरक्षित यहां के खेजड़े बेरी कैर फोग आदि रखते हैं और इनके कत्ल से पर्यावरण को नुक़सान हो रहा है और परिणाम घातक हों रहे हैं।
अब इस तपती धूप ने साबित कर दिया है और अब वैज्ञानिक भी कह रहे हैं तो ये वैज्ञानिक सरकार को पेड़ कटने शुरू हुवे उस समय भी कह देते पर इनमें यह सामर्थ्य नहीं है कि वो सच बोल सके।
हम हमारे पत्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस में तो लिखते ही हैं तो सार्वजनिक मंचों पर भी हम कहते रहे हैं इसी संदर्भ में पिछले वर्ष 29 मई को गंगा सिंह विश्व विद्यालय में अंतराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में भी कहा था।
29 मई 2025 को जो कहा वो सच हो गया
अब वैज्ञानिक कह रहे हैं कि थार रेगिस्तान से गर्म हवा रही हैं।
थार रेगिस्तान के तापमान का संतुलन खेजड़ी बेरी कैर फोग आदि रखते हैं जिन्हें ग्रीन उर्जा के नाम से कत्ल कर दिए
इसलिए
हमने पिछले साल गंगा सिंह विश्व विद्यालय में अंतराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में कहा था कि जो गांवों में पेड़ खेजड़े कट रहे हैं उससे बीकानेर के साथ राजस्थान और भारत का पर्यावरण प्रभावित होगा।
हमारी बात को गहराई से समझने की कोशिश नहीं की और न ही पर्यावरण बचाओ आंदोलन को समझने की कोशिश की।
परिणाम सामने है और यह और भी घातक होने की संभावना है।
भारत सरकार के पास पर्यावरण के जानकार वैज्ञानिक नहीं है और न ही पर्यावरण प्रेमी। सब आडंबर करने वाले हैं।
हम यह बात वर्षों से कह रहे हैं कि यदि समुचित विकास सुचारू रूप से करना है तो हमारे शोध के सूत्र लागू करें।
शीर्ष अदालत यानि भारत का उच्चतम न्यायालय के वर्तमान मुख्य न्यायाधीश जी कहते हैं कि पर्यावरण प्रेमी विकास में बाधा डालते हैं।
क्योंकि पर्यावरण प्रेमी पेड़ों को काटने से रोकते हैं। इसी शीर्ष अदालत ने 25 मार्च 2021 को एक जनहित याचिक 25047/18 फैसले में कहा था कि पर्यावरण को नुक़सान पहुंचा कर विकास करना विकास नहीं विनाश है।
पर्यावरण और विकाश दोनों साथ साथ चलने चाहिए।
भगवानराम प्रजापति ढाणी भारती
अधिष्ठाता ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ,
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक।
संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
सत्य तो छिप नहीं सकता अन्ततः धूल पत्थरों में दबा रहकर बाहर आ ही जाता है।
हर किसी को रोजाना क्षात्र धर्म का पालन करना पड़ता है
सबसे पहले शूद्र धर्म का पालन उसके बाद वैश्य धर्म का पालन और उसके बाद क्षात्र धर्म का पालन
कुछ जाति विशेष के लोग जो संख्या में कम है वो क्षात्र धर्म के नाम से क्षत्रिय शब्द से भ्रमित कर रहे हैं और लोग भ्रमित होकर उनसे जुड़ रहे हैं पर क्या क्षत्रिय हैं वो इन मूल संस्कृति सनातन धर्म के रक्षकों को धरातल पर जोड़ कर इनके साथ समानता का व्यवहार कर सकेंगे यह सोचने का विषय है।
जब तक मूल संस्कृति सनातन धर्म के पोशकों को जान नहीं लोगे ये भटकाव चलता रहेगा विदेशियों के षडयंत्र में उलझते जाओगे।
विदेशियों ने हमारी संस्कृति को विलुप्त करने का हर संभव प्रयास किया है।
पर
विदेशियों का षडयंत्र आडंबर चरम सीमा पर था तो बुद्ध पैदा हुआ और बुद्ध बनने के लिए घोर तपस्या और त्याग करना पड़ता है।
बुद्ध ने सनातन धर्मेव जयते मूल संस्कृति को पुनः स्थापित किया था और मौर्य शासन में खूब फल फूल गई थीं।
तत्पश्चात फिर सनातन धर्म संस्कृति पर आक्रमण किया और तथाकथित ब्राह्मण धर्म थोप दिया जिसे बुद्धिष्ट शंकराचार्य स्वामी शंकर बुद्धिष्ट प्रजापति कुम्हार ने शास्त्रार्थ किया और पुनः विदेशियों को पछाड़ सनातन धर्म संस्कृति सभ्यता का पुनरुद्धार किया।
वक्त चलता रहा और फिर विदेशियों ने तथाकथित हिंदू धर्म नाम का धर्म थोप दिया जिसे अथक प्रयास से भगवान प्रजापति भारती ढाणी संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर अधिष्ठाता ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक ने 25 अगस्त 2014 को पुनः सनातन धर्म संस्कृति का पुनरुद्धार कर दिया।
भगवान प्रजापति भारती ढाणी ने संत शंकराचार्य आदि से कई प्रश्न पूछे थे और कई सत्य बताए। संत शंकराचार्य प्रश्नों के उत्तर दे नहीं पाए और संत शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती ने संत समुदाय और अखाड़ा परिषद की धर्म संसद वर्धा में घोषणा की थी कि हमारा धर्म सनातन धर्म है और जो लोग तथाकथित हिंदू धर्म बोलते हैं वो नकली हैं।
ओम शांति
सत्य की अधिक जानकारी के लिए संपर्क कर सकते हो।
_-------------------
अपने शरीर को बार बार अपमानित करना छोड़ दो कि ये किराये का घर है, इक दिन मर जायेगा, मल मूत्र का थैला है, जल कर राख हो जायेगा । जितने भी ऐसी पट्टी पढ़ा रहे हैं वह खुद मौज मस्ती में जीते हैं कि कल किसने देखा है,आज पूरी अय्याशी कर लो । यह सिर्फ लोगों को निराश करके धन दौलत रिश्तों से मोह भंग करवा कर उनसे दान निकलवाने की टेक्निक है ।

अपना घर, गाड़ी, टीवी, फ्रीज, मोबाइल आदि भी एक दिन खत्म हो जायेगा तो क्या हररोज इसी बात का रोना धोना मचा कर चीजों का अपमान करेंगे ? नहीं न । जब तक है तब तक तो उपयोग करेंगे ही । सिर्फ़ इतना ध्यान रखना जरूरी है कि इन सब मायाओं को पाने में में अंधे नहीं होना है । इसके चक्कर में हराम का नहीं खाना । खुद को व इश्वर को भुलाना नहीं है।

जो भी है जैसा भी है, प्रसन्नता पूर्वक उसका उपयोग करना चाहिए।
धरती से न कोई कुछ लेकर गया है और न हम कुछ लेकर जा पायेंगे।
विषम परिस्थितियों में भी कुछ देर शांत मन से बैठ कर सोचा जा सकता है।
अपने शरीर को भी भगवान का ही हिस्सा समझो । पंचतत्व के देवताओं द्वारा दिया गया है । उनके बगैर तंत्र का 'त' भी नहीं चलता । शरीर ही जप, तप, साधना व अनुभव का साधन है । इसे अपमानित करके भगवान को ही अपमानित किया जाता है । माया भी ईश्वर की ही रचना है । हारे हुए कमजोर लोग दिन रात संसार को कोसते रहेंगे, रिश्ते नातों को को कोसेंगे, हर समस्या की जड़ संसार को बतायेंगे, जल्दी से जल्दी मोक्ष मिल जाये और जन्म मरण से बचा जाये । मोक्ष की कामना भी इच्छाओं या लालसा की केटेगरी में आता है।

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 16_17 वर्ष 38दिनांक 09.05..2026 वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/20...
09/05/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 16_17 वर्ष 38दिनांक 09.05..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
भारत सरकार के और संसार के वैज्ञानिकों को खुली चुनौती देकर ललकारते हैं कि वे हमारे सूत्र गलत साबित करे या स्वीकार करके लागू करें वरना भारत की गर्मी विकराल रूप धारण करेगी जो विश्व को प्रभावित करेगी।
प्रथम सूत्र _मरू क्षेत्र जो गर्म क्षेत्र है जहां के खेजड़ो बेरी कैर फोग आदिकाल से पर्यावरण की सुरक्षा करते आ रहे हैं इन पर्यावरण रक्षकों का कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए वरना भारत के पर्यावरण को भारी से भारी नुक़सान होगा।
हमने पिछले साल गंगा सिंह विश्व विद्यालय बीकानेर में पर्यावरण के अंतरास्ट्रीय सम्मेलन में कहा था कि बीकानेर के गांवों में जो पेड़ खेजड़े कत्ल हो रहे हैं उससे बीकानेर के साथ राजस्थान और भारत को प्रभावित करेंगे और जिससे विश्व में भी असर पड़ेगा।
राजस्थान वन आच्छादित 9 प्रतिशत है और यहां मरू क्षेत्र है जहां तापमान अधिक रहता है और यहां के तापमान को यहां के खेजड़े बेरी कैर फोग बावलिये आदि को सुचारू रूप से चला रहे हैं।
सरकार की नीति के तहत ग्रीन उर्जा के नाम पर विकास के नाम पर इन पर्यावरण रक्षकों पेड़ों की अंधाधुंध कटाई होने के कारण गर्म क्षेत्र और अधिक गर्म क्षेत्र बन रहा है और पेड़ो खेजड़ों में भय का वातावरण बन गया उनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी और पेड़ों खेजड़ो आदि पर सदियों से निवास करने वाले वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों आदि के भी कत्ल हो गए और कुछ घायल हो गए तो बेघर भी हो गए इनकी उदर पूर्ति के साधन छिन्न गए इनका सहारा छिन्न गया इनमें भी भय का वातावरण बन गया और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलने लगी।
साथ ही खेजड़े राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर है जो हर पावन पर्व पर खेजड़ी और खेजड़ी के रूँख से पूजा की जाती है। इस प्रकार संस्कृति सभ्यता सनातन धर्म से जुड़े लोगों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए रात्रि में खेजड़ों का चोरी से कत्ल किया जाना उनके लिए हृदय विदारक घटना से पीड़ा की तरंगें निकली और
वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों पशुओं की पीड़ा की तरंगें इतनी विकराल हो गई कि प्रकृति का संतुलन डिगमिगा गया। और चारों तरफ आग फैल गई है।
सोचने की बात यह है कि जहां आग बरस रही है उस आग को बुझाने की बजाय वहां उस आग को तीव्र करने की कोशिश करना महाविनाश करना है।
जब राजस्थान का यह मरू क्षेत्र पहले से ही सुलग रहा है तो फिर इसमें पेड़ों खेजड़ो का कत्ल करना महाविनाश है और यह आसमान से बरसती ये आग इसकी चेतावनी हमने पिछले साल दे दी थी और वर्षों से कह भी रहे हैं ।
दूसरा सूत्र _पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को पटाखे स्पीकर से प्रताड़ित करना तुरन्त प्रभाव से रोका जाए पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें वरना भारत का पर्यावरण और तहस नहस हो जाएगा । अभी भारत विश्व में प्रदूषण में अग्रणी देशों में है।
पटाखों,स्पीकर ,पॉलीथिन जलाने से धुंए और शोर से वायु में जहर घुल जाता है जिससे पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों में भी भारी वेदना होती है और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदा आती है और यह हम वर्षों से कह रहे हैं और परिणाम आपके सामने हैं आग उगलता भारत।
यह प्रश्न हमारा भारत के सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी प्रधानमंत्री जी से कर रहे।
सम्माननीय श्री नरेंद्र मोदी जी, प्रधानमंत्री जी , सादर वंदे।
आप और आपकी सरकार यह बतावे कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार इतने खतरनाक पटाखें स्पीकर है जो सब प्रकार रोग हार्ट बहरापन गूंगापन शुगर चिड़चिड़ापन आदि गंभीर रोगों को उत्पन्न करता है।
जिनसे वायरस रोग चिंता अवसाद नशा अपराध आदि बढ़ता है।
ऐसे खतरनाक पटाखें स्पीकर पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे लगता है और उनकी धर्म आस्था कैसे आहत होती है?

आदरणीय
मुख्य मंत्री श्री भजनलाल जी,शर्मा जी, सादर वंदे।
मैं आपसे भी पूछता हूं कि
राजस्थान में अपने राज्य में स्पीकर बजता है तो उस पर पाबंदी लगाने से धर्म स्थलों को आघात कैसे पहुंचता है और उनकी आस्था कैसे आहत होती है?

भारत सरकार प्रशासन, राजस्थान सरकार प्रशासन बतावे कि स्पीकर पटाखों से धर्म का क्या संबंध है,?
स्पीकर पटाखों पर पाबंदी से आस्था विश्वास पर आघात कैसे लगता है?
ये बता दे मैं कभी इन पर पाबंदी लगाने का नहीं कहूंगा।
शास्त्रों में देव मानवों ने एकान्तता एकाग्रता का कहा है
राक्षसी मानवों का मुझे पता नहीं।
करोना में लोक डाउन में शोर कम हुआ था और करोना कमजोर हुआ था।
भारत में सभी तीज त्यौहार पर्यावरण संरक्षण के लिए ही बनाए गए थे और भारत संसार में पर्यावरण पर एक आदर्श देश था।
अब भारत प्रदूषण में संसार में शीर्ष स्थानों में है और राजस्थान भी तथा बीकानेर का तो बहुत ही ख़तरनाक हालात है।
हमारा बीकानेर बहुत ही पवित्र शहर था चारों ओर गोचर भूमियों का पहरा और शहर में अंदर बाग तालाब आदि के कारण बीकानेर पर्यावरण संरक्षण में श्रेष्ठ था जो आज दुनिया के प्रदूषित शहरों में अग्रणी बन गया है और बनता जा रहा है।
भारत सरकार प्रशासन राजस्थान सरकार प्रशासन ये भी बतावे कि स्पीकर पटाखों पॉलीथिन जलाने से कौन सा विकास होता है
स्पीकर पटाखों से यदि विकास होता है तो चारों ओर इनकी धूम मचा दी जाए।
बड़े ही शर्म की बात है कि स्पीकर पटाखों पर पाबंदी लगाने की बात करते हैं तो कहते हैं हमारे धर्म पर आघात लगाया जा रहा है हम इससे आहत हो रहे हैं।
वाह वाह पहले इन्हें पूछो कि जब स्पीकर नहीं थे तो तब तो कोई धर्म कर्म होते ही नहीं थे क्या। उस समय के धार्मिक कार्य भजन कीर्तन बिना स्पीकर से ही होते थे और उनकी आवाज रात्रि में सुखद अनुभव देती थी पेड़ पौधे पशु पक्षियों वन्य जीवों को सुखमय आनंद मिलता था।
आज के स्पीकर से गीत संगीत गजल भजन कीर्तन करते हैं तो वायु में जहर घुल जाता है और यह हर प्राणी के लिए घातक होता है।
पशु पक्षी पेड़ पौधे वन्य जीव प्रताड़ित होते है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाओं को बढ़ावा मिलता है और अवसाद वायरस रोग चिंता भय अपराध आदि को बढ़ावा मिलता है।
साथ ही जो स्पीकर बजाते हैं और जो सुनते हैं उन्हें पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों की पीड़ा की तरंगें अभिशाप का काम करती हैं उनके घर में अवसाद अशांति रोग चिंता भय क्लेश बना रहता है और उनकी मौत जहर बन जाती है ये सब अनुभूत है और आप भी यह सब अनुभव कर रहे हैं पर धर्म स्थलों में स्पीकरों को बंद कराने से डरते हो कि वहां के ईश्वर नाराज हो जाएंगे और पाप लगेगा।
बहुत खूब यदि धर्म स्थलों में ईश्वर है तो यह करोना काल में ताला लगा कर क्यों भाग गए? धर्म स्थलों के ईश्वर कह सकते थे कि धर्म स्थल बंद नहीं होंगे हमारे भक्तों को करोना कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
पर किसी धर्म स्थल ने अपने वर्चस्व को नहीं बताया सबके सब ताला लगा कर भाग गए थे और पुजारी सरकार प्रशासन और लोगों से सहयोग करने की याचना करने लगे थे।
अरे ईश्वर के धर्म स्थलों में कार्य करते थे तो उस धर्म स्थल के ईश्वर का दायित्व बनता था कि वे पुजारी को तो खाना पानी देते।
उस समय धर्म स्थल ताला लगा कर भाग गए थे तो पेड़ पौधे आपके ढाल बनकर आपको बचाने आगे आए थे।
हमने भी उस समय हमारे आश्रम प्रकृति शक्ति पीठ ओम मन्दिर बीकानेर से सैकड़ों हजारों लोगों को नहीं बल्कि लाखों लोगों को गिलोय तुलसी पपीते के पते काढ़े के लिए देकर भरपूर निःशुल्क सेवा की थी।
और आज करोना काल में दुःख में साथ देने वाले पेड़ पौधों को स्पीकर से प्रदूषण बढ़ाकर प्रताड़ित कर रहे हो।
क्या इस दुष्कर्म से आप लोगों शांति सुख समृद्धि मिलेगी?
सोचना होगा और भारत को प्रदूषण मुक्त करने के लिए स्पीकर पटाखों पर अविलंब सख्त पाबंदी लगानी होगी।
स्पीकर पटाखों से किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं होता पटाखों से हर साल अनेक लोग मर जाते हैं और पशु पक्षियों वन्य जीवों को भी भारी नुक़सान होता है और अनेक मौत के ग्रास बन जाते हैं और पॉलीथिन जलाने से हवा में खतरनाक जहर घुल जाता है जो हर प्राणी को बहुत ही ख़तरनाक नुक़सान पहुंचा रहा है।
इन सभी कृत्यों से भारत के पर्यावरण को भारी नुक़सान हो रहा है और उदाहरण है भारत में आग वर्ष रही है।
यदि इससे बचना है तो पेड़ों खेजड़ो के कत्ल तुरन्त प्रभाव से रोका जाए और पेड़ो खेजड़ों को घायल करने वाले पटाखों स्पीकर पॉलीथिन जलाने वालों पर सख्त कार्रवाई करें और इन पर पाबंदी लगाई जाए।

समझ गए हो तो आओ भारत को पर्यावरण संरक्षण कार्य में अग्रणी बनाने का अभियान शुरू करें जिसमें हम आपको हमारे शोध के सूत्र बताएंगे जिसे लागू करने से तत्काल जल वायु परिवर्तन में सुधार होना शुरू हो जाएगा। और किसी भी प्रकार का विकास कार्य नहीं रुकेगा बल्कि विकास कार्य भी तेज गति से होगा
प्रार्थी
भगवानाराम प्रजापति ढाणी ( भगवान भारती)
अधिष्ठाता _ओम मंदिर, प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर
संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक
7737957772

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस अंक 15 वर्ष 38दिनांक 09.04..2026 वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_...
09/04/2026

पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
अंक 15 वर्ष 38दिनांक 09.04..2026
वार्षिक 36ण्रुपयेण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025/2025_27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहे
आर्य संस्कृति माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठ खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
सर्वाधिकार सुरक्षित ओम प्रकृतयै नमः भगवानाराम प्रजापति ढाणी
आओ पर्यावरण शुद्ध करें और पर्यावरण में पृथ्वी ,आकाश, वायु ,जल अग्नि के संतुलन को बनाये रखने के लिए वन्य जीवों पेड़ पौधो के संतुलन को बनाये रखने के अभियान में शामिल होवे!
पेड़, खेजड़े वन्य जीवों के कातिल,पेड़ों वन्य जीवों को घायल करने वाले भारतीय संविधान के अधिनियमों का उल्लंघन कर अपराध रहे हैं तो परम्परागत सांस्कृतिक कानून का भी उल्लंघन करके घोर पाप के भागीदार बन गए हैं और बन रहे हैं।

पेड़ सजीव प्राणी है सजीव प्राणी का कत्ल करना जघन्य अपराध है ।मनुष्यों के प्राण पेड़ों से चलते हैं।
निम्नलिखित तथ्यों पर तत्काल शासन प्रशासन करवाई करे ,
1पेड़, खेजड़े वन्य जीवों के कातिल,पेड़ों वन्य जीवों को घायल करने वाले भारतीय संविधान के अधिनियमों का उल्लंघन कर अपराध रहे ।

एक पेड़ का कत्ल होते ही वन्य जीवों पक्षियों सरीसृपों आदि का गांव उजड़ जाता है। उनके आवास छिन्न जाते हैं उनका भोजन भी खत्म हो जाता है। पेड़ों का क़त्ल करने वालों पर सख्त करवाई हो ।
रात्रि में अचानक आरी से पेड़ कटने से पेड़ पर आवास करने वाले वन्य जीव संभल ही नहीं पाते और वे तने के प्रहार से मर जाते हैं घायल हो जाते हैं और तना धरती पर पड़ता है तो सरीसृप के बिल पर पड़ता है और उसके अंडे खत्म हो जाते हैं सरीसृप खुद पेड़ पर रहता है तो अंडे धरती पर बिला बनाकर देता है और पेड़ के ऊपर पक्षियों के घोंसले अंडे खत्म हो जाते हैं ये घोर जघन्य अपराध है
पेड़ कटने से ओक्सीजन उत्पादन में कमी आ जाती है और वायु की गुणवत कम हो जाती है। जो पेड़ खाद देता था खाद उत्पादन खत्म हो जाता है। पेड़ खेजड़ी एक उच्च कोटि का औषधीय पेड़ है इसका फल सांगरी शुगर रोगियों को लाभ देती है और हड्डियों को मजबूत करती है और कई रोगों को ठीक करती है तो इसके रूँख यानि पत्ते खाने से आंखों की ज्योति बढ़ती है और रातीअंधेरा ठीक हो जाता है। ये पेड़ राजस्थान ही नहीं पूरे भारत की सांस्कृतिक धरोहर है।इस प्रकार पेड़ कातिलों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, वायु प्रदूषण निवारण और नियंत्रण अधिनियम1981 और वन्य जीव अधिनियम 1972 की धाराओं के अनुसार करवाई होनी चाहिए और साथ ही परम्परागत सांस्कृतिक कानून का भी उल्लंघन किया है इसके तहत करवाई सख्त से सख्त होनी चाहिए । एक ओर सत्य समझे सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ों के कत्ल पर एक मूल्यांकन कमेटी बनाई है जिसके अनुसार छाती की ऊंचाई पर पेड़ का तना 80 सेमी है तो उसकी कीमत 1,33,000 एक लाख तैतीस हजार रुपए है। ये जो पेड़ खेजड़े कटे हैं यह बहुत ही बड़े हैं और इनकी कीमत लाखों रुपए है।

2 स्पीकर के शोर से पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीव घायल होते है और मानव के लिए भी घातक है ।
स्पीकर अनचाहे शोर करने वालों पर करवाई हो ।

वन्य जीवों में आपसी संवाद में बाधा पहुंचती है जिससे उनके प्रेम प्रजनन को भारी नुक़सान होता है तो रात्रि में बजने वाले स्पीकरों से मानव के साथ पेड़ पौधों वन्य जीवों पशु पक्षियों को रात्रि की नींद में बाधा गंभीर रूप से पहुंचती है जो स्वास्थ्य के लिए घातक है यह सर्वविदित है और उनमें पीड़ा की तरंगें निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाएं आती हैं ।
स्पीकर के शोर से हवा में जहर घुलकर दूर तक पहुंच जाता है जो मनुष्य के साथ पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को अदृश्य रूप में रहकर भारी नुक़सान पहुंचाता है।
स्पीकर के गीत संगीत के शोर से तरंगें बनकर बवंडर बन जाती हैं और जो इसकी चपेट में आते हैं वो घायल हो जाते हैं।मानव अवसाद में आ जाता है और घायल होकर आत्म हत्या करता है। नशा करता है और बलात्कार हत्या जैसे जघन्य अपराध हो रहे है । इस वन्य जीव अधिनियम और वायु प्रदूषण अधिनियम के तहत करवाई का प्रावधान है शोर से वाहन दुर्घटनाएं बढ़ रही हैं (नोट _गीत संगीत से वाहन दुर्घटनाएं होती हैं _हमने यह शोध 20 अप्रैल 2008 को उजागर की थी और 24 अप्रैल 2008 के खेजड़ा एक्सप्रेस के अंक में प्रकाशित हुई थी। शासन प्रशासन को सूचना दी थी पर किसी ने ध्यान नहीं दिया।
मेरी शोध को अमेरिका ने 2011 में अपनी बना ली और फायदा उठा रहा है।,_
वर्तमान में कई शोध हमने की है जिसमें से एक शोध के सूत्र लागू करने से तत्काल जलवायु परिवर्तन में सुचारू होने की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।)
मानव कुछ पल की शांति के लिए धर्म स्थलों में जाते हैं वहां भी स्पीकरों के शोर से उन्हें शांति नहीं मिलती ।
कोरोना काल में जहां शोर अत्यधिक था वहां मृत्युदर ज्यादा रही है ।
लोक डाउन में शोर कम हुआ था और कोरोना कमजोर हुआ था इस बात को गहराई से समझे और वाहनों दुकानों ,धर्म स्थलों ,समारोह , धरना प्रदर्शन आदि के स्पीकरों के गीत संगीत के शोर पर तत्काल उपर वर्णित अधिनियमों की धाराओं के तहत मामले दर्ज किए जावे और स्पीकर से गीत संगीत गजल आदि पर सख्त पाबंदी लगाई जाए वरना आने वाले समय में पर्यावरण में हाहाकार मच जाएगा।
अवसाद आत्महत्याओं, अचानक मौतों आदि से वातावरण भयानक बन जाएगा ।
सुप्रीम कोर्ट ने 18जुलाई 2005 के आदेश में कहा है कि स्पीकर के शोर अवसाद हार्ट बहरापन गूंगापन शुगर चिड़चिड़ापन आदि गंभीर बीमारियों को बढ़ावा मिलता तथा गर्भवती महिलाओं बच्चों बुजुर्गो के लिए घातक है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि किसी भी धर्म स्थल को ढोल नगाड़े आदि बजाने की इज्जात नहीं दी जा सकती।
साथ ही सुप्रीम कोर्ट आदेश में कहा है कि सरकार,प्रशासन, पुलिस प्रशासन जनता को शिविर लगाकर शिक्षण संस्थाओं में जाकर ध्वनि प्रदूषण की भयानकता के बारे में जानकारी देवे। _
अफसोस है कि आज तक इस बात पर किसी ने ध्यान नहीं दिया जिसका परिणाम यह है कि आज चारों ओर प्रदूषण स्पीकर बजाने वालों का तांडव है। धर्मभीरू खामोश है और प्रदूषण विकास कर रहा है।(धर्म के नाम से स्पीकरों के शोर से जीवों को दुखी करने वालों की मौत जहर बन जाती है ये हमने देखा है।)
अत सरकार प्रशासन से निवेदन है कि ध्वनि प्रदूषण की भयानकता के बारे में जानकारी देने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना करें। कानून में यह भी कहा है कि दिन में सक्षम अधिकारी के अनुमति से ही स्पीकर बज सकते हैं और सक्षम अधिकारी राष्ट्र हित में अनुमति दे सकते हैं और वह भी अपने परिसर से आवाज बाहर न निकले। अजान और मंदिरों के स्पीकर तो दूर दूर तक सुनाई देते हैं इन्होंने तो अपने ही कानून बना लिए हैं। जिसमें मंदिर वाले तो जब चाहे तब स्पीकर से शोर करने लग जाते हैं और बीमार या वृद्ध व्यक्ति बंद करने को कहते हैं तो तेज बजाते हैं । और मैं जब नया शहर थाना पुलिस को सूचित करता हूं तो पुलिस भी उसे तेज बजाने को ही कहते है। बंद नहीं कराते । विशेष _, मैं वर्षों से रात में दिन में बजने वाले स्पीकरों को बंद कराने का नया शहर थाना पुलिस को सूचित करता हूं पर पुलिस ने आज तक न तो दिन में स्पीकर बंद कराया और ना ही रात को। जबकि रात दस बजे के बाद सुबह तक अनेक बार फोन करता हूं और इन सब का रिकॉर्ड है सारे वीडियो दिन रात के यू ट्यूब पर और मेरे पास फोन में मिल जाएंगे। हां मेरे ऊपर कारवाई जरूर की है। नोट _ये शिकायतों और वीडियो इतने ज्यादा है कि वर्ल्ड रिकॉर्ड में आ जाएंगे। किसी में साहस है तो जांच करके देख लें।
3 प्राचीन धरोहरको नुकसान करने वालो पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
प्राचीन धरोहर के पास उपर नीचे वन्य जीव रहते है (बीकानेर परकोटा शफ़ील) बीकानेर परकोटा शफ़ील को तोड़ने वालों पर क़ानूनी करवाई हो
बीकानेर परकोटा शफ़ील प्राचीन धरोहर है इसको तोड़ कब्जा करने और परकोटे शफ़िल के पास के ऐतिहासिक रास्ते को कब्जे करने वालों पर प्राचीन धरोहर संरक्षण अधिनियम 1958( संशोधन 2010)के साथ वन्य जीव अधिनियम 1972, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 , वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981की धाराओं के अनुसार करवाई होनी चाहिए क्योंकि परकोटे शफ़िल को तोड़ने से इनमें रहने वाले सरीसृप मारे गए थे उनके आवास उजड़ गए थे और परकोटे के ऊपर झरोखे में पक्षियों सरीसृपों आदि ने घर,घोंसले बना रखे थे वो उजड़ गए उनके अंडे खत्म हो गए और पास के ऐतिहासिक रास्ते में पेड़ भी काटे गए थे उन पर भी पक्षियों के घोंसले थे वो खत्म हो गए पेड़ सजीव होने के कारण उनकी हत्या करना और पेड़ो की हत्या से ऑक्सीजन उत्पादन खत्म हुआ है जिससे प्रदूषण बढ़ा और हवा की गुणवता में भी कमी आई ।
बीकानेर परकोटा के कब्जों से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं क्योंकि कईयों के जो कमजोर है उनके कब्जे तो तुरंत हटा दिए पर मुख्य सड़क पर प्राचीन ऐतिहासिक धरोहर को तोड़ कब्जा करने वालों पर कोई करवाई नहीं होना शासन प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह है कि शासन प्रशासन?
4 शरह नथानियां गौचर से अवैध कब्जे हटाकर पर्यावरण संरक्षण कार्य करें।
शरह नथानियां गौचर में धार्मिक स्थलों की भरमार बढ़ती जा रही है और इन स्थलों में स्पीकरों से रात दिन भजन गीत संगीत चलता रहता है और मनुष्यों की आवाजाही हर समय रहती है और अनचाहा शोर होता रहता है जिससे पेड़ पौधों पशु पक्षियों वन्य जीवों को परेशानी होती है वो बहुत ही दुखी होते है उनके आपसी संवाद में बाधा पहुंचती है उनकी एकान्तता में बाधा पहुंचती है और वे भयभीत होते हैं।
मनुष्यों के साथ कुत्ते भी चले जाते हैं मनुष्य वहां खाने के समान डाल देते हैं और कुत्ते उस खाने के लिए वहीं पर रहने लगते हैं जो वन्य जीवों के लिए ख़तरनाक होते हैं ये भी सुनने में आता है कि धर्म स्थलों में नशेड़ियों का जमघट लगा रहता है।
अत शरह नथानियां गौचर से धार्मिक स्थलों के कब्जे हटा कर पर्यावरण को शुद्ध करने और वन्य जीवों को सुखमय जीवन देने की सुविधा प्रदान करे।
5 पोलीथीन जलाने वालों पर पर्यावरण संरक्षण अधिनियम वन्य जीव अधिनियम आदि की धाराओं पर कारवाई हो।
पॉलीथिन जलाने वालों दुकानदारों जनता को प्रशासन समझाने की जागरूकता अभियान शुरू करे क्योंकि दुकानदार रोजाना पॉलीथिन को जलाते हैं और सफाई कर्मचारियों को भी समझावे कि पॉलीथिन जलाने से पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीवों के साथ मानव जाति के बहुत ही ख़तरनाक है।
पॉलीथिन जलाने से जहरीला धुवां निकलता है जो पर्यावरण के लिए बहुत ही घातक है। मानव के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है यह समझाने के बाद भी नहीं मानते हैं तो पर्यावरण संरक्षण अधिनियम वन्य जीव अधिनियम आदि धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई करें।
6 मुख्य सड़क और रिहायशी इलाकों से अवैध मोटर गैरेज ऑटो गैरेज से पर्यावरण को भारी नुकसान होता है इन पर भी पर्यावरण संरक्षण के अधिनियमों की धाराओं में करवाई हो और इन्हें तुरंत हटाए जाय।
मुख्य सड़क और रिहायशी इलाकों में धड़ल्ले से सरकारी भूमि पर मोटर गैरेज चल रहे हैं जो आमजन के स्वास्थ्य के लिए बहुत ही ख़तरनाक है और पर्यावरण को भी भारी नुक़सान पहुंचा रहे है। ऐसे गैरेजो की पहचान करके उन्हें हटाया जाए और उन पर भी पर्यावरण संरक्षण अधिनियम आदि धाराओं पर कारवाई की जाय।
पेड़ो के कातिलो ,स्पीकर के शोर से वन्य जीवों पक्षियों पेड़ पौधो पशु पक्षियों को प्रताड़ित करने वालों,प्राचीन धरोहर बीकानेर परकोटा शफ़ील को तोड़कर कब्जा करने और परकोटे के पास के ऐतिहासिक रास्ते को कब्जे करने वालों पर प्राचीन धरोहर संरक्षण अधिनियम 1958( संशोधन 2010) ,वन्य जीव अधिनियम 1972, वायु( प्रदूषण निवारण और नियंत्रण )अधिनीय 1981और पर्यावरण (संरक्षण )अधिनियम 1986 के तहत सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी जो हुई क्यों नहीं ? ये सोचने का विषय है।
अत उपरोक्त पर तुरंत करवाई के साथ पोलिथिन जलाने वालों ,अवैध मोटर गैरेज पर सख्त करवाई करके पर्यावरण को शुद्ध करने के हमारे अभियान को सफल बनाने के लिए हम शसन प्रशासन के पूर्ण सहयोग की कामना करते है ।उपरोक्त पर्यावरण के कार्यों को करने से पर्यावरण को बहुत फायदा होगा पेड़ पौधे पशु पक्षी वन्य जीवों को सुखमय शांतिमय जीवन मिलेगा और कब्जे हटाने से हाइकोर्ट के आदेश की भी पालना हो जाएगी।
विशेष _मैं 76 वर्ष का हूं और पचास साल से पर्यावरण संरक्षण कार्य कर रहा हूं ।
लाखों पौधे तुलसी पीपल नीम बिल्व खेजड़े आदि उगाकर निःशुल्क वितरण किए।शासन प्रशासन से अनेकों कार्य कराए इन कार्यों में खेती, ट्रेक्टर प्रिंटिंग प्रेस आदि बिक गए।
निवेदक
भगवानाराम प्रजापति ढाणी
वैदिक पद्धति से शोधकर्ता वैज्ञानिक संपादक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर
7737957772

Address

भगवान प्रजापति प्रकृति शक्ति पीठ , खेजड़ा एक्सप्रेस विश्व कर्मागेट
Bikaner
4

Telephone

+917737957772

Website

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Khejara Express posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Contact The Organization

Send a message to Khejara Express:

Share