09/06/2026
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
वर्ष 38 , अंक 20
दिनांक 09,6,2026
वार्षिक 36 ण्रुपये ण्मूल्य 1रु 50
पोण् पजिण् सण् बीकानेर025,2025se27
पर्यावरणए आध्यात्मिक एवं समसामयिक विचारों एवं स्वास्थ्य रक्षा विषयक धरती से जुड़ा विश्व का अग्रणी शास्त्र पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस
तुलसी पौध से स्वस्थ रहेण्
आर्य संस्कृतिए माता पिता गुरु प्रकृति
वनस्पति तुलसी और पर्यावरण से जोड़ने का हमारा महायज्ञ सफलता की ओर अग्रसर है। आप आज ही शामिल होवे। प्रजापति
ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
हमारा ध्येय ब्रह्माण्डिय पर्यावरण सुरक्षा व विश्व शान्ति
एवं प्राणियों की स्वास्थ्य रक्षा करनी ही है।
आप स्वस्थ रहेंगे तो धर्म ण्कर्म विद्यौपार्जन धनोपार्जन
करेंगे। घर में तुलसी पौध लगाने से सुख शान्ति
मिलती है।
प्रकृति शक्ति पीठए खेजड़ा एक्सप्रेस से तुलसी पीपल
पौध निःशुल्क ले जावें।
पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस के कार्यालय कर्म स्थल प्रकृति शक्ति पीठ में प्रतिदिन पर्यावरण दिवस होता है
तुलसी पीपल नीम बिल्व खेजड़े जामुन आदि पौध और खेजड़ी सहजन आदि बीज निःशुल्क वितरण का लाभ उठाओ।
पर्यावरण दिवस पर आडंबर न करें,
पेड़ पौधे लगाओ,उन्हें बचाओ।
ऊगे हुवे पेड़ों बेरी खेजड़ो आदि को बचाओ ।
यह बहुत ही पुनीत कार्य है।
स्पीकर पटाखों पॉलीथिन जलाने से पेड़ पौधे वन्य जीव घायल होते हैं जिससे घोर पाप लगता है।
अत धर्म स्थलों में स्पीकर बजता है तो वहां से पाप बढ़ता है और पुण्य क्षीण होता है।
स्पीकर बजाने वालों और सहयोग देने वालों के घर में पाप के कारण क्लेश चिंता रोग अवसाद बढ़ जाता है और मृत्यु जहर बन जाती है।
माँ प्रकृति नमः!पर्यावरण दिवस पर विशेष मानसून ने भारत में 26 मई की तारीख दी थी
उसके बाद तारीख पर तारीख देता हुआ दस दिन बाद आया यानि 4 मई को भारत आया तब तक तो हाय तोबा मच गई
जबकि
कोर्ट,सरकार प्रशासन नेता आदि सब तारीख पर तारीख देते हैं और व्यक्ति परिणाम आने से पहले मृत्य लोक प्रस्थान कर जाते।
प्रकृति के मानसून ने मानव जाति को चेतावनी दी है सुधर जाओ।
वरना स्थिति बहुत भयानक होगी। पर्यावरण के साथ खिलवाड़ मत करो।
वर्तमान में सम्माननीय मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पर्यावरण प्रेमी विकास विरोधी हैं और इससे पहले 25 मार्च 2021 में सुप्रीम कोर्ट ने एक फैसले में कहा कि पर्यावरण का नुकसान करके विकास करना विकास नहीं है विनाश है।
पर्यावरण यानि आपके शरीर को सुरक्षित रखने का घेरा। आपके चारों ओर का सुरक्षित कवच। पर्यावरण को बचाने का मतलब है आप अपने आप को बचा रहे हो आप अपने शरीर को सुरक्षित स्वस्थ रखने का कार्य कर रहे हो।
यदि आपके शरीर के बाहर का घेरा सुरक्षित नहीं है तो आप निश्चय ही बीमार पड़ोगे। कमजोर होते जाओगे। आपके शरीर पर वायरस आक्रमण करेंगे। आप अवसाद रोग चिंता भय से ग्रसित होने लगोगे।
अत आपको पर्यावरण को सुरक्षित करने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए पृथ्वी हवा पानी को शुद्ध रखना होगा। आप पृथ्वी पर गन्दगी डालोगे तो वह हवा में घुलकर आप पर आक्रमण करेगी। वह गंदगी पानी में घुलकर आप पर आक्रमण करेगी। आप हवा में गंदगी डाल रहे हो तो वह सीधी आप पर आक्रमण करेगी और पानी में गंदगी डाल रहे हो तो वह भी आप पर आक्रमण करेगी।
पर्यावरण का मतलब यह है कि आपके चारों ओर का सुरक्षित कवच।
कुछ लोग प्रकृति बचाओ के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं। कुछ लोग धरती बचाओ नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं तो कुछ लोग धरती बचाओ। कुछ लोग पञ्च तत्व बचाओ के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण कार्य करते हैं।
गंगा नदी शुद्ध करो अभियान तो जमुना बचाओ, नर्मदा बचाओ, अरावली बचाओ आंदोलन, पर्वत बचाओ । हिमालय बचाओ, नदियों को शुद्ध रखें, समुंद्र शुद्ध रखे, जंगल बचाओ, पेड़ बचाओ आंदोलन आदि आदि चल रहे हैं और
ये सभी लोग पर्यावरण संरक्षण का कार्य ही करते हैं। अपने को बचाने का कार्य करते हैं।
हालांकि
प्रकृति, धरती, पृथ्वी पञ्च तत्व बचाओ आंदोलन की बात करते हैं उन्हें नहीं पता कि प्रकृति धरती पृथ्वी पञ्च तत्व बचाना मनुष्य के हाथ का मनुष्य के वश का काम नहीं है। ये अक्षुण्ण है ये अरबों वर्ष स्थाई रूप सुरक्षित है और रहेंगे।
बचाना है तो अपने आपको बचना चाहिए और वह है पर्यावरण
पर्यावरण बचाना अपने को बचाना है पर्यावरण का कार्य विशाल से विशाल है पर्यावरण कार्य अनगिनत हैं जैसे शरीर में जितने रोम हैं पर्यावरण कार्य भी उतने ही है।
इस प्रकार पर्यावरण कार्य अनगिनत है और यह कार्य अनवरत चल रहे हैं और चलते ही रहेंगे क्योंकि इस धरती पर सबको अपने शरीर को स्वस्थ सबल युवा बनाए रखना है तो पर्यावरण का कार्य करते ही रहना होगा। ये पर्यावरण कार्य करना प्रकृति पर कोई अहसान नहीं है पेड़ पौधे वन्य जीव पशु पक्षियों आदि को बचाना मानव जाति का दायित्व है और जो ये नहीं कर रहे है वो मानव जाति का कहलाने का अधिकार नहीं रखता।
मानव जाति को सुव्यवस्थित बनाए रखने के लिए पर्यावरण संरक्षण कार्य रचनात्मक रूप से करना चाहिए और इसके लिए आप पाक्षिक खेजड़ा एक्सप्रेस बीकानेर ओम मन्दिर प्रकृति शक्ति पीठ बीकानेर से जुड़ सकते हैं यहां वर्षों से पर्यावरण संरक्षण कार्य रचनात्मक रूप से अनवरत चल रहा है और यदि आप प्रकृति शक्ति पीठ में आओगे तो आपको प्राचीन काल वैदिक काल के आश्रम में होने का आभास होगा और असीम शांति मिलेगी।
आईए एक बार अवश्य पधारे।
पर्यावरण संरक्षण कार्य के लिए आप अपने चारों ओर शुद्ध हवा मिलती रहे इसका ध्यान रखना होगा और इस पर कार्य करोगे तो आप स्वस्थ सबल युवा बने रहेंगे और आपको सुख समृद्धि शांति मिलती रहेगी
तो आइए आपको पर्यावरण को अत्यधिक नुक़सान पहुंचाने वाले घटकों के बारे में जानकारी देते हैं।
बड़े स्तर पर पर्यावरण को नुक़सान तो बड़े बड़े कारखाने, युद्ध सामग्री निर्माण, संसार में जगह युद्ध विभीषिका आदि अनेकानेक है।
हमने पहले भी कई बार लिखा है और अब भी लिख रहे हैं कि जहां आग बरस रही है और वहां और आग लगने के कार्य करोगे तो यह बेहद खतरनाक होता है।
राजस्थान का मरू क्षेत्र गर्म क्षेत्र है और इसे खेजड़ी बेरी कैर फोग आदि बचा रहे हैं और इन्हीं का कत्ल करने से स्थिति तो भयावनी हो होगी और हो गई।
ग्रीन उर्जा के नाम पर खेजड़ी बेरी आदि का भारी तादाद में कत्ल कर दिया और इसी कारण पूरे भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ा। ये हम तो बहुत पहले से ही कह रहे हैं और कई सार्वजनिक मंचों पर कहा है।
पिछली 29 मई 2025 को गंगा सिंह विश्व विद्यालय में अंतराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन में कहा था कि खेजड़ी कटाई से पूरे भारत को भारी नुक़सान होगा।
अब वैज्ञानिकों ने भी कहा है कि उतर पश्चिमी मरू क्षेत्र से गर्म हवा आ रही है जिसके कारण भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ा है।
खेजड़ी के साथ बेरी गर्मी को कम करने में बहुत मदद करती है।
पेड़ों को लगाना चाहिए और उन्हें बचाना चाहिए।
पेड़ स्पीकर बजाने पटाखे छोड़ने के शोर से घायल होते हैं। स्पीकर का शोर हवा में घुलकर हवा को जहरीला बना देता है और यह हवा पेड़ों पर जाती हैं तो पेड़ पौधे घायल हो जाते हैं और शुद्ध ऑक्सीजन नहीं दे पाते और इनमें पीड़ा की तरंगें निकलती है।
साथ ही पशु पक्षी वन्य जीव में भी स्पीकर के शोर से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं।
ये कार्य पॉलीथिन जलाने से होता है और पॉलीथिन के सूक्ष्म कण भी हवा में घुलकर हवा को जहरीला बना देते हैं और तापमान में वृद्धि होती है।
इस प्रकार जलवायु परिवर्तन में ये घटक बहुत ही ख़तरनाक कार्य कर रहे हैं।
जलवायु परिवर्तन को तुरंत प्रभाव से रोका जाए और इसके लिए हमारे शोध के सूत्र लागू करने से तत्काल प्रभाव से जलवायु परिवर्तन में सुधार होना शुरू हो जाएगा। ये पूर्णतः सत्य है।
शीर्ष पद बैठा व्यक्ति पर्यावरण कार्यकर्ताओं को विकास विरोधी बतावे तो इसका मतलब यह है कि उनके पास पर्यावरण ज्ञान शून्य है ।पर्यावरण विशाल है और उसमें स्पीकर पटाखे छोड़ने और पोलीथीन और पॉलीथिन जलाने का विरोध कर रहा है तो क्या वह पर्यावरण प्रेमी विकास विरोधी है। पेड़ों खेजड़ो को सुरक्षित रखना और उगाना विकास विरोधी है ? जवाब दे।
पर्यावरण संरक्षण कार्य ही अध्यात्म हैं।
बाकी तो सब धन संचय के साधन हैं।।
गहराई से जानना चाहते हो तो।
दो कदम हमारे साथ चलके देखो।।
गो वध से पीड़ा की तरंगें निकलती हैं और यह पर्यावरण के लिए बहुत ही ख़तरनाक है ये पीड़ा तरंगें विकसित होती हैं और हवा में घुलकर पेड़ पौधों वन्य जीवों आदि के साथ मानव जीवन पर भी प्रभाव डालती है। पीड़ा की तरंगें हर जीव वध से निकलती हैं जिससे प्राकृतिक आपदाएं आती है। यह परम वैदिक सत्य है इसे संसार का कोई वैज्ञानिक गलत नहीं कर सकता।