हमने ये अनुभव किया है कि शहर गाँव के बच्चे में ज्यादा प्रतिभा होती है लेकिन जब इन प्रतिभाओं के प्रदर्शन कि बारी आती है तो शहर के बच्चे आगे निकल आते हैं और गाँव के बच्चे पीछे छूट जाते हैं | ऐसा इस लिए होता है क्यूंकि गाँव के बच्चे के मन में मंच के प्रति एक डर होता है , बोलने में संकोच व क्षमताओं के प्रदर्शन में हिचकिचाहट होती है|
सद्भावना परिवार पिछले कुछ सालों से सरस्वती पूजा के अवसर पर
गाँव के बच्चों को एक मंच प्रदान कर रही है जिस पर वे ज्ञान, विज्ञानं, साहित्य, संगीत कला, इत्यादि के क्षेत्र में अपने अन्दर की प्रतिभाओं का प्रदर्शन कर रहे हैं और अपने आप पर गर्व कर रहे हैं ! "जाग्रति-2010" तथा "स्वाभिमान-2011" के अवसर पर आपने देखा की किस प्रकार यहाँ के बच्चों ने मेहँदी, रंगोली, क्वीज प्रतियोगिता, ऊँची कूद, लम्बी कूद , निम्बू दौड़ , तेज दौड़ ,भाषण प्रतियोगिता, पग-बाधा दौड़, नाटक, सुर-संगम, चित्रकला प्रतियोगिता, कुर्शी-रेस इत्यादि प्रतियोगिताओं में भाग लेकर अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया|
स्वाभिमान -२०११ के अवसर पर आपने ये भी देखा होगा कि इन कार्यक्रमों में लड़कों की अपेक्षा लड़कियों की सक्रियता ज्यादा थी | यह आपके लड़कियों के शिक्षा की दिशा में सकारात्मक सोच के कारण ही संभव हो सका | लड़कियों के शिक्षा एवं उनके व्यक्तित्व निर्माण के प्रति अगर आप थोडा और गंभीर हो जायेंगे तो वो दिन दूर नहीं जब लड़कियां इतनी सक्षम हो जायेंगी कि वे जीविकोपार्जन में भी लड़कों के बराबर आ जायेंगी और दहेज़-लोभी युवकों व उनके परिवार का तिरस्कार कर सकेगी |
इस मंच पर आपने ये देखा कि सद्भावना परिवार के सदस्य कैरियर निर्माण की दिशा में अर्जित अपने अनुभवों को अपने छोटे भाई-बहनों के साथ सहभागी करते हैं जिन अनुभवों को हमने अपना बहुमूल्य समय तथा धन नष्ट करके प्राप्त किया है ताकि हमारे छोटे भाई-बहनों को फिर ऐसा न करना पड़े और अपनी रूचि के अनुसार कैरियर का क्षेत्र चुन सके !