01/10/2026
फिर लागू हुई भावांतर योजना, 3 से 17 तक सोयाबीन बेचने होंगे पंजीयन
किसानों और किसान संगठनों के विरोध को दरकिनार करते हुए, एक बार फिर भावांतर योजना लौट आई है। मध्यप्रदेश सरकार के किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग द्वारा भावांतर योजना के तहत मंडियों में सोयाबीन की खरीदी की जाएगी। इसकी घोषणा बुधवार को की। भारत सरकार की प्राइस डेफिसिट पेमेंट स्कीम (भावांतर योजना) के तहत ई-उपार्जन पोर्टल www. mpeuparjan.nic.in पर 3 से 17 अक्टूबर के बीच सोयाबीन के पंजीयन होंगे। किसानों को पंजीयन केंद्रों पर लगने वाली लंबी लाइनों और परेशानियों से बचाने के लिए शासन व्यापक इंतजाम कर रहा है।
मालूम हो कि इस साल सोयाबीन की एमएसपी 5708 रुपए प्रति क्विंटल तय की है। यह पिछले साल 5328 रु. से 380 रु. प्रति क्विंटल अधिक है। पिछले साल प्रदेश में इसी दौरान भावांतर योजना के तहत सोयाबीन की खरीदी के लिए ई-उपार्जन पोर्टल पर पंजीयन हुए थे। मंडियों में 24 अक्टूबर 2025 से 15 जनवरी 2026 के बीच भावांतर योजना में खरीदी की थी। किसानों को सही लाभ नहीं मिल सका। किसानों ने एमएसपी पर सोयाबीन खरीदी की मांग की है। नहीं तो आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
जिले में 1.33 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी, किसानों ने एमएसपी पर खरीदी की मांग की
हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रही सरकार : बाष्ट
प्रदेश में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर भावांतर योजना ना के के तहत सोयाबीन की एमएसपी पर खरीदी नहीं हो रही है। भावांतर योजना में भी खरीदी से कम भाव मिल रहे हैं। राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के मध्य भारत प्रांत के प्रांत महामंत्री रामजीवन बाष्ट ने कहा कि सरकार किसान विरोधी है। उसने व्यापारियों को लूट की खुली
छूट दे रखी है। देश का सबसे अच्छा एक्ट मध्यप्रदेश मंडी एक्ट है। माननीय हाईकोर्ट के आदेश का सरकार, प्रशासन और मंडी अधिकारियों द्वारा पालन नहीं कराया जा रहा है। हाईकोर्ट का आदेश है कि गुणवत्तापूर्ण उपज की बोली समर्थन मूल्य से कम पर नहीं लगनी चाहिए। इसका खुला उल्लंघन हो रहा है।
इस साल 1.33 लाख हे. रकबा, पिछले साल 31578 किसानों ने कराया था पंजीयन
कृषि विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जिले में इस साल 1.33 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई है। पिछले साल करीब 1.46 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी हुई थी। सोयाबीन का रकबा 13 हजार हेक्टेयर कम हुआ है। पिछले साल भावांतर योजना के तहत 31578 किसानों ने पंजीयन कराया था।
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