RBS Group Official Rajashthan

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RBS Group Official Bhilwara Rajasthan
(Rajasthan Adiwasi Bhil Samaj)

यह एक Non-Profit सामाजिक संगठन है,
जिसका उद्देश्य राजस्थान के Bhil समाज को
एकजुट करना, शिक्षा, रोजगार, सामाजिक
जागरूकता और सेवा कार्यों को बढ़ावा देना है |
जय भील समाज 🏹

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02/02/2026

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🏹 भील योद्धा एकलव्य  🏹🔥 सरल और विस्तृत परिचयएकलव्य आदिवासी समाज के महान वीर, सच्चे योद्धा और श्रेष्ठ धनुर्धर थे। वे (भील...
23/01/2026

🏹 भील योद्धा एकलव्य 🏹🔥
सरल और विस्तृत परिचय

एकलव्य आदिवासी समाज के महान वीर, सच्चे योद्धा और श्रेष्ठ धनुर्धर थे। वे (भील ) निषादराज हिरण्यधनु के पुत्र थे और वन क्षेत्र में रहने वाले एक सामान्य आदिवासी परिवार से आते थे। एकलव्य का जीवन हमें सिखाता है कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के आगे कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।

एकलव्य को बचपन से ही धनुष-बाण चलाने का बहुत शौक था। वे एक महान योद्धा बनना चाहते थे और इसके लिए गुरु द्रोणाचार्य से शिक्षा लेना चाहते थे। लेकिन उस समय समाज में भेदभाव था, इसलिए उन्हें आश्रम में शिक्षा लेने की अनुमति नहीं मिली। यह बात किसी भी इंसान को तोड़ सकती थी, लेकिन एकलव्य ने हार नहीं मानी।

एकलव्य जंगल में गए और मिट्टी से गुरु द्रोणाचार्य की एक प्रतिमा बनाई। उसी प्रतिमा को अपना गुरु मानकर उन्होंने दिन-रात अभ्यास किया। वे अकेले ही कठिन परिश्रम करते रहे। धीरे-धीरे वे धनुर्विद्या में इतने निपुण हो गए कि कोई भी निशाना उनसे नहीं चूकता था।

एक दिन अर्जुन और अन्य राजकुमार शिकार के लिए जंगल आए। वहाँ उन्होंने देखा कि एक कुत्ते के मुँह में कई तीर लगे थे, लेकिन उसे कोई चोट नहीं आई थी। यह देखकर सब हैरान रह गए। खोज करने पर उन्हें एकलव्य मिला। गुरु द्रोणाचार्य समझ गए कि एकलव्य उनसे भी श्रेष्ठ धनुर्धर बन सकता है।

इसके बाद द्रोणाचार्य ने एकलव्य से गुरु-दक्षिणा माँगी। गुरु-दक्षिणा में उन्होंने एकलव्य का दाहिना अंगूठा माँग लिया। एकलव्य ने बिना किसी सवाल के, बिना दुख जताए, अपना अंगूठा काटकर गुरु को दे दिया। यह घटना एकलव्य के त्याग, अनुशासन और गुरु-भक्ति को दिखाती है।

अंगूठा कट जाने के बाद भी एकलव्य टूटे नहीं। उनका आत्मसम्मान, साहस और मेहनत कभी खत्म नहीं हुई। आज एकलव्य आदिवासी समाज के लिए संघर्ष, सम्मान और समान अधिकार की पहचान हैं। वे यह सिखाते हैं कि हालात चाहे जैसे हों, इंसान को अपने स्वाभिमान और लक्ष्य को नहीं छोड़ना चाहिए।

एकलव्य केवल एक कहानी नहीं हैं, बल्कि वे हर उस इंसान की प्रेरणा हैं जो बिना साधनों के भी बड़ा सपना देखता है। उनका जीवन हमें बताता है कि सच्ची शिक्षा मेहनत से मिलती है और सच्चा योद्धा वही होता है जो अन्याय के सामने भी खड़ा रहे।
🏹🔥
जय भील समाज ✊
जय आदिवासी ✊
जय वीर एकलव्य 🏹

हम हमारा इतिहास नहीं मिटने देगे 🙏📍

( RBS Group Official Bhilwara)

🏹 राजा भलराज भील के नाम से ही भीलवाड़ा जिला बना — यह सच है 🛡️यह कोई कल्पना या लोककथा नहीं,बल्कि ऐतिहासिक सत्य है किभीलवा...
19/01/2026

🏹 राजा भलराज भील के नाम से ही भीलवाड़ा जिला बना — यह सच है 🛡️

यह कोई कल्पना या लोककथा नहीं,
बल्कि ऐतिहासिक सत्य है कि
भीलवाड़ा जिले का नाम
भील समाज के महान शासक

राजा भलराज (बलराज) भील के नाम से ही पड़ा।
भलराज भील के शासनकाल में यह क्षेत्र
भील समाज की सशक्त राजधानी था।
यह इलाका “भीलों का वाड़ा” कहलाता था,
जो समय के साथ भीलवाड़ा के नाम से जाना गया।
इतिहास गवाह है कि

भीलवाड़ा की पहचान
किसी बाहरी शासक से नहीं,
बल्कि भील समाज के वीर राजा भलराज भील से जुड़ी है।

आज जरूरत है अपने सच्चे इतिहास को पहचानने और गर्व से कहने की—

भीलवाड़ा = भलराज भील की धरती

🙏 वीर राजा भलराज भील को शत-शत नमन 🙏

(RBS Group Bhilwara)

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*भील समाज का जलियांवाला बाग हत्याकांड*🕯️ मानगढ़ धाम – भील समाज के इतिहास का अमर बलिदान स्थल 🏹17 नवम्बर 1913 को मानगढ़ की...
18/01/2026

*भील समाज का जलियांवाला बाग हत्याकांड*

🕯️ मानगढ़ धाम – भील समाज के इतिहास का अमर बलिदान स्थल 🏹

17 नवम्बर 1913 को मानगढ़ की पावन पहाड़ी पर
हजारों निहत्थे भील स्त्री, पुरुष और बच्चों ने
जल, जंगल, जमीन, धर्म, संस्कृति और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए
अंग्रेजी हुकूमत की गोलियों के सामने
हँसते-हँसते अपने प्राण न्योछावर कर दिए।
यह कोई साधारण घटना नहीं थी,
यह था भील समाज के स्वाभिमान का महासंग्राम,
जिसका नेतृत्व किया महान समाज सुधारक और स्वतंत्रता सेनानी

🙏 गोविंद गुरु जी ने।
गोविंद गुरु जी ने भील समाज को
नशामुक्ति, शिक्षा, संगठन और आत्मनिर्भरता का रास्ता दिखाया।
मानगढ़ धाम उसी जागरण और बलिदान का
जीवित प्रमाण है।

👉 मानगढ़ धाम केवल एक स्थान नहीं है,
यह भील समाज की चेतना, एकता और संघर्ष का
पवित्र तीर्थ है।
आज हमारा कर्तव्य है कि
हम अपने शहीदों के इतिहास को जानें, मानें और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाएँ।

🖤 मानगढ़ के शहीद अमर रहें
✊ जय भील समाज – जय आदिवासी गौरव

📌 इस पोस्ट को शेयर करें,
ताकि हर भील अपने गौरवशाली इतिहास से जुड़े।

(RBS Group Official Bhilwara)








18/01/2026

भील जाती का इतिहास

✊ भील समाज के राजा और उनका सम्पूर्ण इतिहास
🇮🇳 भारत के मूलनिवासी, वीर और योद्धा समाज 🇮🇳
भील समाज भारत की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक है। इतिहासकारों के अनुसार भील समाज आर्यकाल से भी पहले भारत में निवास करता था।
“भील” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के “बिल्ल” (धनुष) शब्द से मानी जाती है, क्योंकि भील समाज धनुर्विद्या में अत्यंत निपुण था।

भील समाज केवल वनवासी नहीं था, बल्कि यह एक राज्य स्थापित करने वाला, युद्धकला में माहिर और स्वतंत्र शासन करने वाला समाज रहा है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के विशाल भूभाग पर भील राजाओं का शासन रहा।

1️⃣ प्राचीन काल में भील शासन
(क) रामायण काल
रामायण में शबरी माता का उल्लेख मिलता है, जिन्हें भील समाज से जोड़ा जाता है।
भगवान श्रीराम का वनवास काल भील बहुल क्षेत्रों से जुड़ा रहा।

इस काल में राजा निषाद का शासन मिलता है, जिन्हें भील समाज की एक उपजाति माना जाता है।
उस समय केवल एक नहीं, बल्कि जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक भील राजाओं के स्वतंत्र राज्य हुआ करते थे।
यह प्रमाणित करता है कि भील समाज अत्यंत प्राचीन, संगठित और शासकीय व्यवस्था वाला समाज था।

(ख) महाभारत काल
महाभारत काल में महान धनुर्धर एकलव्य, जो अर्जुन से भी श्रेष्ठ माने गए, भील/निषाद समाज से जुड़े माने जाते हैं।
एकलव्य एक राजकुमार थे, जिससे यह सिद्ध होता है कि उस समय भी भील राजा और राजवंश शासन करते थे।
इससे भील समाज की युद्धकला, अनुशासन और संगठन शक्ति स्पष्ट होती है।

2️⃣ मध्यकालीन भील राजा और उनके राज्य

🔹 इडर राज्य (गुजरात)
क्षेत्र: अरावली पर्वतमाला
प्रारंभिक शासक: भील राजा
इडर राज्य की स्थापना मूल रूप से भील राजाओं ने की थी, जो बाद में राजपूतों के अधीन चला गया।

🔹 डूंगरपुर का भील शासन (राजस्थान)
“डूंगर” शब्द का अर्थ पहाड़ होता है।
डूंगरपुर क्षेत्र पर पहले भील राजाओं का शासन था, जहाँ से पहाड़ी दुर्गों और किलों के माध्यम से शासन किया जाता था।

🔹 बांसवाड़ा – बांस राजा / भील बांसिया
क्षेत्र: बांसवाड़ा (राजस्थान)
बांसवाड़ा क्षेत्र पर प्रारंभिक शासन भील राजाओं का था।
बाद में यहाँ राजपूत सत्ता स्थापित हुई।

3️⃣ महान भील राजा और नायक
👑 राणा पूंजा भील
क्षेत्र: मेवाड़ (उदयपुर, राजस्थान)
समय: 16वीं शताब्दी
राणा पूंजा भील, महाराणा प्रताप के गुरु और सेनापति थे।
हल्दीघाटी युद्ध में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वे भील–राजपूत एकता और वीरता के प्रतीक माने जाते हैं।

👑 मानगढ़ के भील राजा / नायक
क्षेत्र:
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
धार (मध्य प्रदेश)
पंचमहल (गुजरात)
समय: 18वीं–19वीं शताब्दी
इन भील नायकों ने शोषणकारी शक्तियों और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।

👑 डूंगरिया / डूंगर राजा
क्षेत्र: डूंगरपुर (राजस्थान)
डूंगरपुर नाम का संबंध भील शासकों से जुड़ा माना जाता है।
यहाँ पहाड़ी क्षेत्रों में भील राजाओं का शासन रहा।

👑 मालवा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
खरगोन
समय: प्राचीन से मध्यकाल
मालवा क्षेत्र में भील स्वतंत्र शासक रहे, जिन्होंने जंगलों, किलों और पहाड़ों से शासन किया।

👑 विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
नर्मदा घाटी
विंध्य एवं सतपुड़ा पर्वतमाला
भील समाज गुरिल्ला युद्ध में निपुण था और मुगलों व अंग्रेजों से भी संघर्ष करता रहा।

🗺️ भील शासन के प्रमुख क्षेत्र (सारांश)
राजस्थान
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
उदयपुर (मेवाड़)
मध्य प्रदेश
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
गुजरात
पंचमहल
इडर
महाराष्ट्र
नंदुरबार
धुले
🔥 निष्कर्ष

यह इतिहास सिद्ध करता है कि भील जाति अत्यंत प्राचीन, वीर और योद्धा जाति रही है, जिसने भारत के बड़े भूभाग पर स्वतंत्र शासन किया।
बाद में विदेशी आक्रमणकारियों, सत्ता परिवर्तन और आपसी एकजुटता की कमी के कारण भील समाज से उनके राज्य छीने गए और उनका इतिहास दबा दिया गया।
लेकिन इतिहास समाप्त नहीं हुआ — केवल भुला दिया गया।
आज आवश्यकता है कि हम अपने गौरवशाली इतिहास को जानें, समझें और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।
🔥 जय आदिवासी | जय भील समाज 🔥

(RBS Group Official Bhilwara)

भील समाज की पहचान 🇮🇳यह कोई साधारण चित्र नहीं है —यह 1981 में जारी भारत सरकार का डाक टिकट है,जो हमारे भील समाज की नारी,उस...
18/01/2026

भील समाज की पहचान 🇮🇳

यह कोई साधारण चित्र नहीं है —
यह 1981 में जारी भारत सरकार का डाक टिकट है,
जो हमारे भील समाज की नारी,
उसके परिश्रम, स्वाभिमान और संस्कृति को दर्शाता है।

सिर पर जीवन का भार,
हाथों में मेहनत की शक्ति,
और चेहरे पर आत्मविश्वास —
यही है भारत के मूलनिवासी भील समाज की असली पहचान।

हमें अपने इतिहास, संस्कृति और विरासत पर गर्व है।
आइए, अपनी जड़ों को पहचानें और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।

जय भील समाज ✊
जय आदिवासी ✊
जय भारत 🇮🇳

(RBS Group Official Bhilwara )








*   भीलो का इतिहास *✊ भील समाज के राजा और उनका सम्पूर्ण इतिहास🇮🇳 भारत के मूलनिवासी, वीर और योद्धा समाज 🇮🇳भील समाज भारत क...
16/01/2026

* भीलो का इतिहास *

✊ भील समाज के राजा और उनका सम्पूर्ण इतिहास

🇮🇳 भारत के मूलनिवासी, वीर और योद्धा समाज 🇮🇳
भील समाज भारत की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक है। इतिहासकारों के अनुसार भील समाज आर्यकाल से भी पहले भारत में निवास करता था।
“भील” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के “बिल्ल” (धनुष) शब्द से मानी जाती है, क्योंकि भील समाज धनुर्विद्या में अत्यंत निपुण था।

भील समाज केवल वनवासी नहीं था, बल्कि यह एक राज्य स्थापित करने वाला, युद्धकला में माहिर और स्वतंत्र शासन करने वाला समाज रहा है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के विशाल भूभाग पर भील राजाओं का शासन रहा।

1️⃣ प्राचीन काल में भील शासन

(क) रामायण काल
रामायण में शबरी माता का उल्लेख मिलता है, जिन्हें भील समाज से जोड़ा जाता है।
भगवान श्रीराम का वनवास काल भील बहुल क्षेत्रों से जुड़ा रहा।

इस काल में राजा निषाद का शासन मिलता है, जिन्हें भील समाज की एक उपजाति माना जाता है।
उस समय केवल एक नहीं, बल्कि जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक भील राजाओं के स्वतंत्र राज्य हुआ करते थे।

यह प्रमाणित करता है कि भील समाज अत्यंत प्राचीन, संगठित और शासकीय व्यवस्था वाला समाज था।

(ख) महाभारत काल

महाभारत काल में महान धनुर्धर एकलव्य, जो अर्जुन से भी श्रेष्ठ माने गए, भील/निषाद समाज से जुड़े माने जाते हैं।

एकलव्य एक राजकुमार थे, जिससे यह सिद्ध होता है कि उस समय भी भील राजा और राजवंश शासन करते थे।
इससे भील समाज की युद्धकला, अनुशासन और संगठन शक्ति स्पष्ट होती है।

2️⃣ मध्यकालीन भील राजा और उनके राज्य

🔹 इडर राज्य (गुजरात)
क्षेत्र: अरावली पर्वतमाला
प्रारंभिक शासक: भील राजा
इडर राज्य की स्थापना मूल रूप से भील राजाओं ने की थी, जो बाद में राजपूतों के अधीन चला गया।

🔹 डूंगरपुर का भील शासन (राजस्थान)
“डूंगर” शब्द का अर्थ पहाड़ होता है।
डूंगरपुर क्षेत्र पर पहले भील राजाओं का शासन था, जहाँ से पहाड़ी दुर्गों और किलों के माध्यम से शासन किया जाता था।

🔹 बांसवाड़ा – बांस राजा / भील बांसिया
क्षेत्र: बांसवाड़ा (राजस्थान)
बांसवाड़ा क्षेत्र पर प्रारंभिक शासन भील राजाओं का था।
बाद में यहाँ राजपूत सत्ता स्थापित हुई।

3️⃣ महान भील राजा और नायक

👑 राणा पूंजा भील
क्षेत्र: मेवाड़ (उदयपुर, राजस्थान)
समय: 16वीं शताब्दी
राणा पूंजा भील, महाराणा प्रताप के गुरु और सेनापति थे।
हल्दीघाटी युद्ध में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वे भील–राजपूत एकता और वीरता के प्रतीक माने जाते हैं।

👑 मानगढ़ के भील राजा / नायक
क्षेत्र:
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
धार (मध्य प्रदेश)
पंचमहल (गुजरात)
समय: 18वीं–19वीं शताब्दी
इन भील नायकों ने शोषणकारी शक्तियों और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।

👑 डूंगरिया / डूंगर राजा
क्षेत्र: डूंगरपुर (राजस्थान)
डूंगरपुर नाम का संबंध भील शासकों से जुड़ा माना जाता है।
यहाँ पहाड़ी क्षेत्रों में भील राजाओं का शासन रहा।

👑 मालवा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
खरगोन
समय: प्राचीन से मध्यकाल
मालवा क्षेत्र में भील स्वतंत्र शासक रहे, जिन्होंने जंगलों, किलों और पहाड़ों से शासन किया।

👑 विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
नर्मदा घाटी
विंध्य एवं सतपुड़ा पर्वतमाला
भील समाज गुरिल्ला युद्ध में निपुण था और मुगलों व अंग्रेजों से भी संघर्ष करता रहा।

🗺️ भील शासन के प्रमुख क्षेत्र (सारांश)
राजस्थान
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
उदयपुर (मेवाड़)
मध्य प्रदेश
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
गुजरात
पंचमहल
इडर
महाराष्ट्र
नंदुरबार
धुले

🔥 सत्य यही है

यह इतिहास सिद्ध करता है कि भील जाति अत्यंत प्राचीन, वीर और योद्धा जाति रही है, जिसने भारत के बड़े भूभाग पर स्वतंत्र शासन किया।
बाद में विदेशी आक्रमणकारियों, सत्ता परिवर्तन और आपसी एकजुटता की कमी के कारण भील समाज से उनके राज्य छीने गए और उनका इतिहास दबा दिया गया।

लेकिन इतिहास समाप्त नहीं हुआ — केवल भुला दिया गया।

आज आवश्यकता है कि हम अपने गौरवशाली इतिहास को जानें, समझें और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।
🔥 जय आदिवासी | जय भील समाज 🔥

🏹 RBS Group Official Bhilwara🏹

🙏  समाज को आगे बढ़ाने का रास्ताशिक्षा, एकता और समझ से होकर जाता है।आइए, सही दिशा में कदम बढ़ाएँऔर अपने समाज को मजबूत बना...
15/01/2026

🙏 समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता
शिक्षा, एकता और समझ से होकर जाता है।

आइए, सही दिशा में कदम बढ़ाएँ
और अपने समाज को मजबूत बनाएं।

🙏 RBS Group Official Bhilwara 🏹🙏












भारत की आज़ादी सिर्फ 1857 या 1947 की कहानी नहीं है,यह आदिवासी वीरों के अनगिनत बलिदानों की अमर गाथा है।बिरसा मुंडा से लेक...
15/01/2026

भारत की आज़ादी सिर्फ 1857 या 1947 की कहानी नहीं है,
यह आदिवासी वीरों के अनगिनत बलिदानों की अमर गाथा है।

बिरसा मुंडा से लेकर
रानी गाइदिन्ल्यू,
भीमा नायक, टंट्या भील
और वीर नारायण सिंह जैसे
असंख्य आदिवासी योद्धाओं ने
सबसे पहले अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी।

जंगलों से उठी यह लड़ाई
स्वाभिमान, जल-जंगल-जमीन
और आज़ादी की थी।

इतिहास ने भले देर से पहचाना,
लेकिन आदिवासी समाज कभी नहीं भूला।

यह सिर्फ इतिहास नहीं,
हमारी पहचान और हमारा गर्व है।

🙏 जय आदिवासी 🙏 भील समाज 🏹🙏




🙏 आदिवासी इतिहास का स्वर्णिम क्षण 🙏जिस इतिहास को वर्षों तक भुला दिया गया,आज वही इतिहास सम्मान के साथ सामने आया।11वीं सदी...
14/01/2026

🙏 आदिवासी इतिहास का स्वर्णिम क्षण 🙏

जिस इतिहास को वर्षों तक भुला दिया गया,
आज वही इतिहास सम्मान के साथ सामने आया।

11वीं सदी में भीलवाड़ा के शासक रहे
आदिवासी Bhil समाज के गौरव
राजा भलराज भील जी की
अष्टधातु से बनी 6.50 फीट ऊँची प्रतिमा का अनावरण,
आदिवासी समाज के योगदान और पहचान
को सम्मान देने की दिशा में
एक ऐतिहासिक कदम है।

यह पूरे Adivasi Bhil समाज के लिए
गर्व, सम्मान और आत्मविश्वास का विषय है।

आइए अपने इतिहास को जानें,
उस पर गर्व करें
और समाज को और मजबूत बनाएं।

🙏 जय आदिवासी | जय Bhil समाज 🙏






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