18/01/2026
भील जाती का इतिहास
✊ भील समाज के राजा और उनका सम्पूर्ण इतिहास
🇮🇳 भारत के मूलनिवासी, वीर और योद्धा समाज 🇮🇳
भील समाज भारत की सबसे प्राचीन जनजातियों में से एक है। इतिहासकारों के अनुसार भील समाज आर्यकाल से भी पहले भारत में निवास करता था।
“भील” शब्द की उत्पत्ति संस्कृत के “बिल्ल” (धनुष) शब्द से मानी जाती है, क्योंकि भील समाज धनुर्विद्या में अत्यंत निपुण था।
भील समाज केवल वनवासी नहीं था, बल्कि यह एक राज्य स्थापित करने वाला, युद्धकला में माहिर और स्वतंत्र शासन करने वाला समाज रहा है।
राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के विशाल भूभाग पर भील राजाओं का शासन रहा।
1️⃣ प्राचीन काल में भील शासन
(क) रामायण काल
रामायण में शबरी माता का उल्लेख मिलता है, जिन्हें भील समाज से जोड़ा जाता है।
भगवान श्रीराम का वनवास काल भील बहुल क्षेत्रों से जुड़ा रहा।
इस काल में राजा निषाद का शासन मिलता है, जिन्हें भील समाज की एक उपजाति माना जाता है।
उस समय केवल एक नहीं, बल्कि जंगलों और पर्वतीय क्षेत्रों में अनेक भील राजाओं के स्वतंत्र राज्य हुआ करते थे।
यह प्रमाणित करता है कि भील समाज अत्यंत प्राचीन, संगठित और शासकीय व्यवस्था वाला समाज था।
(ख) महाभारत काल
महाभारत काल में महान धनुर्धर एकलव्य, जो अर्जुन से भी श्रेष्ठ माने गए, भील/निषाद समाज से जुड़े माने जाते हैं।
एकलव्य एक राजकुमार थे, जिससे यह सिद्ध होता है कि उस समय भी भील राजा और राजवंश शासन करते थे।
इससे भील समाज की युद्धकला, अनुशासन और संगठन शक्ति स्पष्ट होती है।
2️⃣ मध्यकालीन भील राजा और उनके राज्य
🔹 इडर राज्य (गुजरात)
क्षेत्र: अरावली पर्वतमाला
प्रारंभिक शासक: भील राजा
इडर राज्य की स्थापना मूल रूप से भील राजाओं ने की थी, जो बाद में राजपूतों के अधीन चला गया।
🔹 डूंगरपुर का भील शासन (राजस्थान)
“डूंगर” शब्द का अर्थ पहाड़ होता है।
डूंगरपुर क्षेत्र पर पहले भील राजाओं का शासन था, जहाँ से पहाड़ी दुर्गों और किलों के माध्यम से शासन किया जाता था।
🔹 बांसवाड़ा – बांस राजा / भील बांसिया
क्षेत्र: बांसवाड़ा (राजस्थान)
बांसवाड़ा क्षेत्र पर प्रारंभिक शासन भील राजाओं का था।
बाद में यहाँ राजपूत सत्ता स्थापित हुई।
3️⃣ महान भील राजा और नायक
👑 राणा पूंजा भील
क्षेत्र: मेवाड़ (उदयपुर, राजस्थान)
समय: 16वीं शताब्दी
राणा पूंजा भील, महाराणा प्रताप के गुरु और सेनापति थे।
हल्दीघाटी युद्ध में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।
वे भील–राजपूत एकता और वीरता के प्रतीक माने जाते हैं।
👑 मानगढ़ के भील राजा / नायक
क्षेत्र:
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
धार (मध्य प्रदेश)
पंचमहल (गुजरात)
समय: 18वीं–19वीं शताब्दी
इन भील नायकों ने शोषणकारी शक्तियों और विदेशी शासन के विरुद्ध संघर्ष किया।
👑 डूंगरिया / डूंगर राजा
क्षेत्र: डूंगरपुर (राजस्थान)
डूंगरपुर नाम का संबंध भील शासकों से जुड़ा माना जाता है।
यहाँ पहाड़ी क्षेत्रों में भील राजाओं का शासन रहा।
👑 मालवा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
खरगोन
समय: प्राचीन से मध्यकाल
मालवा क्षेत्र में भील स्वतंत्र शासक रहे, जिन्होंने जंगलों, किलों और पहाड़ों से शासन किया।
👑 विंध्य और सतपुड़ा क्षेत्र के भील राजा
क्षेत्र:
नर्मदा घाटी
विंध्य एवं सतपुड़ा पर्वतमाला
भील समाज गुरिल्ला युद्ध में निपुण था और मुगलों व अंग्रेजों से भी संघर्ष करता रहा।
🗺️ भील शासन के प्रमुख क्षेत्र (सारांश)
राजस्थान
बांसवाड़ा
डूंगरपुर
उदयपुर (मेवाड़)
मध्य प्रदेश
धार
झाबुआ
अलीराजपुर
गुजरात
पंचमहल
इडर
महाराष्ट्र
नंदुरबार
धुले
🔥 निष्कर्ष
यह इतिहास सिद्ध करता है कि भील जाति अत्यंत प्राचीन, वीर और योद्धा जाति रही है, जिसने भारत के बड़े भूभाग पर स्वतंत्र शासन किया।
बाद में विदेशी आक्रमणकारियों, सत्ता परिवर्तन और आपसी एकजुटता की कमी के कारण भील समाज से उनके राज्य छीने गए और उनका इतिहास दबा दिया गया।
लेकिन इतिहास समाप्त नहीं हुआ — केवल भुला दिया गया।
आज आवश्यकता है कि हम अपने गौरवशाली इतिहास को जानें, समझें और आने वाली पीढ़ी तक पहुँचाएँ।
🔥 जय आदिवासी | जय भील समाज 🔥
(RBS Group Official Bhilwara)