NAMO Sena Bastar, chhattisgarh

NAMO Sena Bastar, chhattisgarh Contact information, map and directions, contact form, opening hours, services, ratings, photos, videos and announcements from NAMO Sena Bastar, chhattisgarh, Bastar.

शिष्य - गुरुदेव, मैं साधना करता हूँ, पर भीतर उथल-पुथल है। कभी वैराग्य, कभी वासना। कभी शांति,कभी प्रचंड विक्षोभ। क्या यही...
09/01/2026

शिष्य - गुरुदेव, मैं साधना करता हूँ, पर भीतर उथल-पुथल है। कभी वैराग्य, कभी वासना। कभी शांति,
कभी प्रचंड विक्षोभ। क्या यही मेरी असफलता है?

गुरुदेव- नही, यही प्रकृति है। और जो इससे भयभीत होता है, वह साधक नही भोगी है। प्रकृति का धर्म है
उछाल देना, हिलाना, तोड़ना।
जो हिल गया, वह उसका था।
जो अडिग रहा वही शिव है।

शिष्य- तो यह सब चल क्यों रहा है, गुरुदेव?

गुरु- क्योंकि शक्ति नृत्य करना चाहती है।
उसे रचना चाहिए, भोग चाहिए, अनुभव चाहिए।
जन्म और मृत्यु उसी के खेल हैं।
पर जो खेल को देख रहा है वह खेल में नहीं है।

शिष्य- आप कहते है आप साक्षी हैं।
पर साक्षी भी तो कुछ करता है?

गुरु - नही, साक्षी होता है, करता नहीं।
करना बंधन है। होना मुक्ति है।
मैं न निर्माण करता हूँ, न संहार।
निर्माण भी उसी का है, संहार भी उसी का।
मैं केवल उसके उन्माद को सीमा देता हूँ।

शिष्य- और जब शक्ति उग्र हो जाती है?

गुरु- तब अघोर प्रकट होता है। उग्र को उग्रता से नही
स्थिरता से बांधा जाता है। मैं दया नहीं करता,
मैं न्याय भी नहीं करता। मैं केवल संतुलन हूँ।

शिष्य- तो गुरुदेव, आपका उद्देश्य क्या है?

गुरु (हँसते हुए)- उद्देश्य? उद्देश्य तो प्रकृति का रोग है।
मैं निष्काम हूँ। मुझे कुछ पाना नहीं।
जो पाने की इच्छा करता है वह अभी शक्ति में है।
शिव में आने के लिए सब कुछ खोना पड़ता है
यहाँ तक कि खोने वाला भी।

शिष्य- और आपको कौन देखता है?

गुरु - जिसे कोई देख सके वह सीमित है।
मैं सीमा से पहले हूँ। इसलिए मेरा कोई साक्षी नहीं।
मैं स्वयं ही अंतिम बिंदु हूँ।

शिष्य (कंपित स्वर में)- यह सब किसके लिए है?

गुरु- शक्ति के लिए। उसके अनुभव के लिए।
उसके थकने के लिए। और जिस दिन
वह इस रूप-परिवर्तन से, इस जन्म-मरण से
थक जाएगी। उस दिन वह रोएगी नहीं,
माँगेगी नही सीधे मेरे भीतर गिर पड़ेगी।

शिष्य- और तब?

गुरु - तब न अघोर रहेगा, न शक्ति। न साधना,
न साधक। तब मैं उसे अपने में
पूर्णतः समाहित कर लूँगा।
वह विलय नहीं होगा वह स्मरण होगा।

शिष्य (भूमि पर नतमस्तक)
गुरुदेव, आज जान गया डर शक्ति का था,
शांति शिव की है।

गुरुदेव- जब डर भी मिट जाएगा, तब न शिव बचेगा,
न शक्ति। तब जो रहेगा। वही तुम हो।

॥  #त्रिपुर_रहस्य :  #शिव_तत्त्व ॥महादेव को त्रिपुरारी कहा जाता है, अर्थात त्रिपुर का नाश करने वाले।त्रिपुर केवल कोई पौर...
08/01/2026

॥ #त्रिपुर_रहस्य : #शिव_तत्त्व ॥
महादेव को त्रिपुरारी कहा जाता है, अर्थात त्रिपुर का नाश करने वाले।
त्रिपुर केवल कोई पौराणिक कथा नहीं, अपितु एक गहन तत्त्व-संकेत है।
त्रिपुर का अर्थ है तीन पुर,
तीन स्वतंत्र लोक, तीन स्वतंत्र अवस्थाएँ।
इनका निर्माण ऐसा था कि
एक का विनाश दूसरे को जन्म दे सकता था, और अलग-अलग नष्ट करना संभव ही नहीं था।
इन तीनों का विनाश एक साथ ही संभव था, और वह भी केवल उसी क्षण, जब वे तीनों एक ही सीध में आ जाएँ।
यह संकेत है कि रजोगुण, तमोगुण और सत्त्वगुण तीनों एक-दूसरे से जुड़े हैं, एक के उदय से दूसरा पुष्ट होता है।
इन तीनों के चक्र से बाहर निकलना
सामान्य चेतना के लिए असंभव है।
त्रिपुर का नाश वही कर सकता है
जिसकी एकाग्रता पूर्ण हो, जो त्रिगुणों से परे साक्षी भाव में स्थित हो।
वही शिव है🙏
शिव का अर्थ है जो क्रिया और अक्रिया दोनों से परे, सदैव त्रियावस्था से मुक्त रहता है।
बाहरी विजय से पूर्व
अपने भीतर स्थित त्रिपुरों का नाश अनिवार्य है, अन्यथा गुणों का यह चक्र निरंतर चलता ही रहता है।
जो त्रिगुणों से परे है, वही शिव है🙏
वही #त्रिपुरारी है।
🕉️
हर हर महादेव🔱
जय सनातन🚩

भारतवर्ष में गंगा, यमुना, सरस्वती और  #नर्मदा ये चार नदियां  #सर्वश्रेष्ठ हैं। इनमें भी इस भूमण्डल पर गंगा की समता करने ...
08/01/2026

भारतवर्ष में गंगा, यमुना, सरस्वती और #नर्मदा ये चार नदियां #सर्वश्रेष्ठ हैं। इनमें भी इस भूमण्डल पर गंगा की समता करने वाली कोई नदी नहीं है। प्राचीनकाल में नर्मदा नदी ने बहुत वर्षों तक तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया।

प्रसन्न होकर ब्रह्माजी ने वर मांगने को कहा।

नर्मदाजी ने कहा - ’ब्रह्मा जी! यदि आप मुझ पर प्रसन्न हैं तो मुझे गंगाजी के समान कर दीजिए।’

ब्रह्माजी ने मुस्कराते हुए कहा - ’यदि कोई दूसरा देवता भगवान शिव की बराबरी कर ले, कोई दूसरा पुरुष भगवान विष्णु के समान हो जाए, कोई दूसरी नारी पार्वतीजी की समानता कर ले और कोई दूसरी नगरी काशीपुरी की बराबरी कर सके तो कोई दूसरी नदी भी गंगा के समान हो सकती है।'

ब्रह्माजी की बात सुनकर नर्मदा उनके वरदान का त्याग करके काशी चली गयीं और वहां पिलपिलातीर्थ में शिवलिंग की स्थापना करके तप करने लगीं।

भगवान शंकर उनपर बहुत प्रसन्न हुए और वर मांगने के लिए कहा।

नर्मदा ने कहा - ’भगवन्! तुच्छ वर मांगने से क्या लाभ? बस आपके चरणकमलों में मेरी भक्ति बनी रहे।'

नर्मदा की बात सुनकर भगवान शंकर बहुत प्रसन्न हो गए और बोले - ’नर्मदे! तुम्हारे तट पर जितने भी प्रस्तरखण्ड (पत्थर) हैं, वे सब मेरे वर से शिवलिंगरूप हो जाएंगे। गंगा में स्नान करने पर शीघ्र ही पाप का नाश होता है, यमुना सात दिन के स्नान से और सरस्वती तीन दिन के स्नान से सब पापों का नाश करती हैं परन्तु तुम दर्शनमात्र से सम्पूर्ण पापों का निवारण करने वाली होगी। तुमने जो नर्मदेश्वर शिवलिंग की स्थापना की है, वह पुण्य और मोक्ष देने वाला होगा।’

भगवान शंकर उसी लिंग में लीन हो गए। इतनी पवित्रता पाकर नर्मदा भी प्रसन्न हो गयीं। इसलिए कहा जाता है ‘नर्मदा का हर कंकर शंकर है।'

23/07/2025

धर्म का साथ दे धर्म आपका साथ देगा!!

श्रावण मास...सावन केवल एक महिना नहीं,यह भीतर के तांडव का निमंत्रण है।यह वो समय है जब शिव पहाड़ों से उतर कर हमारे भीतर की ...
11/07/2025

श्रावण मास...

सावन केवल एक महिना नहीं,यह भीतर के तांडव का निमंत्रण है।

यह वो समय है जब शिव पहाड़ों से उतर कर हमारे भीतर की गुफा में बैठते हैं।

सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना प्रतीक है...पर असली अभिषेक तब होता है, जब हम अपने भीतर के मोह, वासना, क्रोध, स्मृति और भय को जल बना कर शिव को अर्पित करते है।

यह मास व्रत का नहीं,
आत्म-त्याग का है।

यह मास जप का नहीं,
मौन का है।

यह मास पूजा का नहीं,अपने अस्तित्व को राख कर देने का है।

औघड़ कहता है...

सावन की बूंदों में माँ गंगा की नमी नहीं, शिव की मौन पुकार होती है,जो इसे सुन सका, वो संसार से मुक्त,जो नहीं सुन सका,वो बेलपत्र ही चढ़ाता रहेगा।

इस सावन,
ना फल मांगो…
ना मुक्ति…
ना कृपा।
बस खुद को समर्पित कर दो जैसे भस्म जो जलती है, फिर भी शांत है।

आप सभी को सावन मास की रहस्यभरी शुभकामनाएँ,महादेव आप सभी पर कृपा करें,आपके भीतर का ज्वर शांत हो,मोह जल जाए और अंततः आप स्वयं "शिव" हो जाएँ।

जय औघड़ बाबा की, हर हर महादेव

ॐ नमः शिवाय
ॐ बं शिवाय
ॐ अघोरेभ्यो नमः
ॐ बम

जय जय
🌷
🙏

17/05/2025

भारत-ब्लूचिस्तान के बीच ग्वादर में होगा क्रिकेट मैच! नए ऐलान ने मचाई सनसनी

नई दिल्ली 15 मई । बलूचिस्तान और भारत के बीच एक दोस्ताना क्रिकेट मैच की खबरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं. मीर यार बलोच ने 13 मई 2025 को अपने एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें उन्होंने ग्वादर क्रिकेट स्टेडियम की तस्वीर के साथ दावा किया कि जल्द ही भारत और बलूचिस्तान की क्रिकेट टीमें दिल्ली या ग्वादर में एक दोस्ताना मैच खेलेंगी.

मीर यार बलोच ने अपनी पोस्ट में ग्वादर क्रिकेट स्टेडियम की एक शानदार तस्वीर साझा की, जो बलूचिस्तान के खूबसूरत पहाड़ों से घिरा हुआ है. स्टेडियम की हरी-भरी पिच और चारों ओर फैली प्राकृतिक सुंदरता ने सभी का ध्यान खींचा है. इस स्टेडियम को 2020 में बनाया गया था और यह स्थानीय टूर्नामेंट्स की मेजबानी करता रहा है. पोस्ट में लिखा गया, "बलूचिस्तान इज नॉट पाकिस्तान, ग्वादर क्रिकेट स्टेडियम," जिसने क्षेत्र की स्वतंत्रता की मांग को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया.

भारत-बलूचिस्तान मैच को लेकर यूजर्स ने दी प्रतिक्रिया

मीर यार बलोच ने अपनी पोस्ट में लिखा, "जल्द ही बलूचिस्तान और भारत की क्रिकेट टीमें दिल्ली या ग्वादर में एक दोस्ताना मैच खेलेंगी. सभी लोग इस मैच का आनंद साथ में लेंगे. इस पोस्ट को हजारों लोगों ने देखा और इस पर कई सकारात्मक प्रतिक्रियाएं आईं. कई भारतीय यूजर्स ने बलूचिस्तान के प्रति अपना समर्थन जताया और इस दोस्ती को मजबूत करने की बात कही.

एक यूजर ने लिखा, "भारतीय लोग बलूचिस्तान का वैसे ही समर्थन करेंगे जैसे हम अफगानिस्तान का करते हैं. यह एक प्यारा रिश्ता है जो हमारे पड़ोस में उभर रहा है." वहीं, एक अन्य यूजर () ने कहा, "भारत को बलूचिस्तान से उतना ही प्यार है जितना अफगानिस्तान से."

🌹❤️❤️❤️🌹

PM मोदी ने मृतकों को मंच से दी श्रद्धांजलि बोले- आतंकियों को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया
24/04/2025

PM मोदी ने मृतकों को मंच से दी श्रद्धांजलि

बोले- आतंकियों को मिट्टी में मिलाने का समय आ गया

01/03/2024

आप सभी को महाशिवरात्री की हार्दिक शुभ कामनाएँ,
बाबा महाकाल की कृपा आप सब पे बनी रहे!!

्री__महाकाल
🌹🙏🙏🙏🙏🌹

20/01/2024

कितने दिन और कितने शाम,
तेरे बिन काटे हैं राम,


श्री राम जन्मभूमि - अयोध्या
अयोध्यापुरी
मेरा प्यार श्री केदार

07/01/2024

वंदे भारत एक्सप्रेस _ जहां हर क्षण विलासिता, प्रौद्योगिकी ( अत्यधुनिक) और भारत की प्रगति की जीवंत भावना का एक सहज मिश्रण है,,

25/12/2023

जब जब धर्म की हानि होगी ,
जब जब साधु संतों पर अत्याचार होगा,
मानव कल्याण और धर्म की रक्षा करने मै तब तब इस पृथ्वी पर अवतार लुंगा !!

Kiran Singh Deo

18/12/2023

बैलाडीला की पहाड़ी पर विराजित ढोलकल गणेश की प्रतिमा

राजधानी से 385 किमी दूर दक्षिण बस्तर जिला मुख्यालय दंतेवाड़ा से 24 किमी दूर बैलाडीला की एक पहाड़ी का नाम है ढोलकल। यह स्थल बचेली वन परिक्षेत्र अंतर्गत ढोलकल शिखर पर दुर्लभ गणेश प्रतिमा फूलगट्टा वन कक्ष अंतर्गत है। समुद्र तल से इस शिखर की ऊंचाई 2994 फीट है। वहीं ढोलकल शिखर के पास स्थित दूसरे शिखर में सूर्यदेव की प्रतिमा स्थापित थी जो 15 वर्षों से गायब है।

लोक मान्यता

दक्षिण बस्तर के भोगामी आदिवासी परिवार अपनी उत्पत्ति ढोलकट्टा (ढोलकल) की महिला पुजारी से मानते हैं। क्षेत्र में यह कथा प्रचलित है कि भगवान गणेश और परशूराम का युद्ध इसी शिखर पर हुआ था। युद्ध के दौरान भगवान गणेश का एक दांत यहां टूट गया। इस घटना को चिरस्थाई बनाने के लिए छिंदक नागवंशी राजाओं ने शिखर पर गणेश की प्रतिमा स्थापति की। चूंकि परशूराम के फरसे से गणेश का दांत टूटा था, इसलिए पहाड़ी की शिखर के नीचे के गांव का नाम फरसपाल रखा।

पुरातात्विक महत्व

पुरातत्ववेत्ताओं के अनुसार ढोलकल शिखर पर स्थापित दुर्लभ गणेश प्रतिमा लगभग 11वीं शताब्दी की है। इसकी स्थापना छिंदक नागवंशी राजाओं ने की थी। यह प्रतिमा पूरी तरह सुरक्षित और ललितासन मुद्रा में है।

दुर्गम पहुंचमार्ग

ढोलकल शिखर तक पहुंचने के लिए दंतेवाड़ा से करीब 18 किलोमीटर दूर फरसपाल जाना पड़ता है। यहां से कोतवाल पारा होकर जामपारा तक पहुंच मार्ग है। जामपारा में वाहन खड़ी कर तथा ग्रामीणों के सहयोग से शिखर तक पहुंचा जा सकता है। जामपारा पहाड़ के नीचे है। यहां से करीब तीन घंटे पैदल चलकर तक पहाड़ी पगडंडियों से होकर ऊपर पहुंचना पड़ता है।
Kiran Singh Deo Kedar Kashyap Lata Usendi Lata Usendi Supporter

Address

Bastar

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when NAMO Sena Bastar, chhattisgarh posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share