23/08/2026
जसीडीह–पीरपैंती रेल कॉरिडोर: संताल परगना के लिए बदलते भविष्य की नई पटरी
संताल परगना में रेल कनेक्टिविटी को लेकर लंबे समय से चली आ रही उम्मीद अब जमीन पर आकार लेती दिखाई दे रही है। जसीडीह–पीरपैंती रेल कॉरिडोर के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और गोड्डा–महागामा सेक्शन में नई ब्रॉडगेज लाइन का काम शुरू हो चुका है। यह परियोजना सिर्फ एक नई रेल लाइन नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र को देश के बड़े रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली संभावित कड़ी के रूप में देखी जा रही है।
करीब 100 किलोमीटर लंबे इस रेल कॉरिडोर में जसीडीह, गोड्डा, महागामा और पीरपैंती को रेल नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। इसके लिए लगभग 391.9 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता है। भूमि अधिग्रहण के बड़े हिस्से की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और कई स्थानों पर निर्माण गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं।
गोड्डा–महागामा से शुरू हुआ बड़ा काम
परियोजना के शुरुआती हिस्से के तौर पर लगभग 28 किलोमीटर लंबे गोड्डा–महागामा रेलखंड पर निर्माण जारी है। इस हिस्से के लिए करीब 531 करोड़ रुपये का प्रावधान बताया गया है।
रेल लाइन के लिए मिट्टी भराई, ट्रैक का बेस तैयार करने और अन्य सिविल निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। इस मार्ग में नेपुरा, पथरगामा और महागामा जैसे स्थानों पर नए रेलवे स्टेशन विकसित किए जाने हैं।
जमीन और मुआवजे की तस्वीर भी बदली
परियोजना की सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण रही है, लेकिन अब इस मोर्चे पर भी काम काफी आगे बढ़ चुका है।
अब तक 69 मौजों की 168.89 हेक्टेयर भूमि पर निर्माण एजेंसी को काम शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। प्रभावित रैयतों के लिए निर्धारित करीब 245.07 करोड़ रुपये के मुआवजे में से 244.45 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। शेष भुगतान की प्रक्रिया भी आगे बढ़ रही है।
महागामा–मेहरमा हिस्से में भी भू-अर्जन का काम जारी है। 29 मौजों में से 28 के लिए अवार्ड घोषित किए जा चुके हैं। प्रशासन लंबित मामलों को जल्द निपटाकर मुआवजा भुगतान में तेजी लाने पर जोर दे रहा है।
असली बदलाव सिर्फ गोड्डा तक सीमित नहीं रहेगा
इस परियोजना की सबसे बड़ी खासियत इसका व्यापक कनेक्टिविटी प्रभाव हो सकता है।
शिवनारायणपुर और विक्रमशिला क्षेत्र से प्रस्तावित रेल संपर्क आगे कटरिया की दिशा में जुड़ता है तो गोड्डा, दुमका और देवघर जैसे झारखंड के महत्वपूर्ण शहरों के लिए कटिहार, पूर्णिया, अररिया, फारबिसगंज, जोगबनी, किशनगंज और न्यू जलपाईगुड़ी की ओर सीधा रेल मार्ग तैयार होने की संभावनाएं बढ़ेंगी।
यानी भविष्य में इस नेटवर्क का इस्तेमाल केवल स्थानीय यात्रियों के लिए नहीं, बल्कि लंबी दूरी की ट्रेनों के लिए भी किया जा सकता है।
कल्पना कीजिए—सिलीगुड़ी या जोगबनी से चलने वाली ट्रेन कटिहार–पीरपैंती–गोड्डा–देवघर के रास्ते झारखंड के रांची, धनबाद, टाटानगर और आगे दुर्ग, राउरकेला, बिलासपुर तथा दक्षिण भारत तक पहुंच सके।
अगर भविष्य में ऐसा रेल परिचालन संभव होता है, तो संताल परगना के लिए यह कनेक्टिविटी का बहुत बड़ा बदलाव होगा।
व्यापार और माल ढुलाई को भी मिलेगा फायदा
नई रेल लाइन का प्रभाव केवल यात्री ट्रेनों तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। बेहतर रेल नेटवर्क से कृषि उपज, स्थानीय उत्पाद, निर्माण सामग्री और औद्योगिक माल को बड़े बाजारों तक पहुंचाने में आसानी हो सकती है।
क्षेत्र में खनिज और कोयला आधारित माल ढुलाई की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं। इससे रेलवे की माल आय के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर परिवहन, व्यापार और रोजगार से जुड़ी गतिविधियों को भी गति मिलने की संभावना है।
प्रशासन की निगरानी में आगे बढ़ रहा प्रोजेक्ट
परियोजना की समीक्षा के दौरान उपायुक्त लोकेश मिश्रा ने भू-अर्जन, भूमि हस्तांतरण, मुआवजा भुगतान, सरकारी जमीन से जुड़े मामलों और विभिन्न विभागों से आवश्यक एनओसी की प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया है।
यही वजह है कि अब परियोजना का फोकस केवल जमीन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं, बल्कि निर्माण कार्य को निर्बाध तरीके से आगे बढ़ाने पर भी है।
संताल परगना के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रेल लाइन?
संताल परगना के कई इलाके आज भी बड़े शहरों तक पहुंच के लिए सड़क मार्ग या दूसरे स्टेशनों पर निर्भर हैं। नई रेल लाइन बनने के बाद गोड्डा, महागामा, पथरगामा, मेहरमा और आसपास के क्षेत्रों को भागलपुर, पीरपैंती, साहिबगंज, जसीडीह और आगे देश के दूसरे हिस्सों से बेहतर रेल संपर्क मिल सकता है।
इसका असर छात्रों, मरीजों, नौकरीपेशा लोगों, व्यापारियों, किसानों और आम यात्रियों—सभी पर पड़ सकता है।
दशकों से जिस रेल संपर्क का इंतजार किया जा रहा था, अब उसकी नींव जमीन पर दिखाई देने लगी है।
जसीडीह–पीरपैंती कॉरिडोर अगर तय गति से पूरा होता है और भविष्य में इससे लंबी दूरी की ट्रेनों के नए मार्ग विकसित किए जाते हैं, तो यह केवल एक रेल परियोजना नहीं रहेगी—बल्कि संताल परगना को पूर्वी भारत के बड़े रेल नेटवर्क से जोड़ने वाला एक नया परिवहन गलियारा बन सकती है।