Voice of Kurmi

Voice of Kurmi एक मात्र उद्देश्य समय-समय पर कुर्मी समाज की सहायता..
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02/06/2026

The One and only Ironman Shri Sardar Vallabhbhai Patel 💪👑♥️🙏

  🤴  💪
30/05/2026

🤴 💪

28/05/2026

रीवा( M.P) के बघेली कलाकार मनीष पटेल की गिरफ्तारी सिर्फ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं, यह पूरे पिछड़े समाज की आवाज़ को दबाने की कोशिश है।

अब समय आ गया है कि रीवा का कुर्मी समाज एकजुट होकर अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद करे।
कब तक अत्याचार सहोगे पटेलों?
कब तक मनुवादी और सामंतवादी सोच हमारे समाज की आवाज़ दबाती रहेगी?

अगर आज हम चुप रहे तो आने वाली पीढ़ियाँ भी इसी अन्याय का शिकार होंगी।
संघर्ष ही सम्मान दिलाता है, और इतिहास गवाह है कि जब समाज जागता है तो सत्ता की नींव हिल जाती है।

मनीष की सबसे बड़ी “गलती” सिर्फ इतनी थी कि वह पिछड़े समाज से आता है और अपनी कला व आवाज़ से समाज की बात करता था।
अब हर नौजवान को तय करना होगा — डरकर चुप बैठना है या अन्याय के खिलाफ संघर्ष करना है।

“जेल की सलाखें आवाज़ों को कैद नहीं कर सकतीं,
जब समाज जागता है तो तख्त भी हिल जाते हैं।”

मनीष पटेल ने एक शब्द बोला तो ब्राह्मण समाज ने पूरा पुलिस- कोर्ट जगा दिया।
लेकिन पांडे जी का बेटा हु चुम्मा चिपक के लेता हूं इस पर ब्राह्मण गंध फैला रहा है तो यह किसी को नहीं दिखता है!
ये न्याय नहीं जातिवादी तानाशाह है जो कॉलेजियम सिस्टम के बल पर ये लोग कर रहे हैं!
जो संगठित है वही सब बोल सकता है बाकी सब चुप रहो!

कट जाते है शीश हमारे, पर किसी के आगे झुकते नहीं
पटेलों का इतिहास रहा है, ये किसी से डरते दबते नहीं..

जय सरदार ....
17/05/2026

जय सरदार ....

16/05/2026

Jai ho 🚩👑🙏

एक वकील की वकालत खूब चलती थी। एक बार वह हत्या का एक मुकदमा लड़ रहे थे। उन्हें खबर मिली कि गांव में उनकी पत्नी बहुत बीमार ...
13/05/2026

एक वकील की वकालत खूब चलती थी। एक बार वह हत्या का एक मुकदमा लड़ रहे थे। उन्हें खबर मिली कि गांव में उनकी पत्नी बहुत बीमार हो गई हैं। बीमारी गंभीर थी। इस कारण वकील साहब गांव आ गए। वह अपनी पत्नी की देखभाल में लगे थे। इसी बीच हत्या के उस मुकदमे की सुनवाई की तारीख पड़ी। वकील साहब असमंजस में थे। इधर पत्नी मृत्युशैया पर थी, उधर पेशी पर शहर जाना भी जरूरी था। न जाने पर मुकदमा खारिज हो जाने और मुलजिम को फांसी होने की आशंका थी।
पति को असमंजस में देख पत्नी बोलीं- आप मेरी चिंता न करें, पेशी पर जरूर जाएं। भगवान सब अच्छा करेंगे। पत्नी की बात मानकर वकील साहब शहर लौट तो आए, मगर उनका मन बड़ा दुखी होता रहा। अदालत में मुकदमा पेश हुआ। सरकारी वकील ने साबित करने की कोशिश की कि मुलजिम कसूरवार है और उसे फांसी ही होनी चाहिए। वकील साहब बचाव पक्ष की ओर से जवाब देने के लिए खड़े हुए। वह बहस कर ही रहे थे कि उनके सहायक ने एक तार लाकर उनको दिया। वकील साहब थोड़ी देर रुके।

तार पढ़कर अपने कोट की जेब में रखा और फिर बहस में लग गए। उन्होंने साबित कर दिया कि उनका मुवक्किल बेकसूर है। बहस के बाद मजिस्ट्रेट ने फैसला सुनाया कि अपराधी निरपराध है। मुवक्किल और दूसरे वकील मित्र अदालत के बाद बधाई देने वकील साहब के कमरे में आए। वकील साहब ने मित्रों को वह तार दिखाया जो उन्हें अदालत में बहस के दौरान मिला था। तार में लिखा था कि उनकी पत्नी का देहांत हो गया। मित्रों ने कहा, ‘बीमार पत्नी को छोड़कर नहीं आना चाहिए था।’ वकील साहब ने कहा, ‘दोस्तो, अपनत्व से बड़ा कर्तव्य होता है।’ यह वकील थे भारत की एकता के निर्माता लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल l

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