Shri mahadev sewa sansthan prayagraj.

Shri mahadev sewa sansthan prayagraj. Shri Mahadev Seva Sansthan Lok Kalyan ke liye samarpit hai�����

14/04/2026
12/04/2026

यन्मण्डलं व्याधिविनाशदक्षं,यदृग्यजु:सामसु संप्रगीतम् l
प्रकाशित येन च भूर्भुव: स्व:,पुनातु मा तत्सवितुर्वरेण्यम् ll
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भावार्थ -- जो रोगों का विनाश करने में समर्थ है, जो ऋक्, यजु और साम--इन तीनों वेदों में सम्यक् प्रकार से गाया गया है तथा जिसने भू: भुव: और स्व:--इन तीनों लोकों को प्रकाशित किया है; वह सूर्य भगवान् का श्रेष्ठ मण्डल मुझे पवित्र करें l

12/04/2026

"समय"
एक ऐसी गाड़ी है,
जिसमें न तो ब्रेक है और
न ही रिवर्स गियर..

11/04/2026
ॐ शान्ताकारं  शिखर  शयनं शुभ्रवर्णं शुभाङ्गम्      विश्वाधारं स्फटिकसदृशं श्वेतवर्णं शुभांगम् ।     गौरीकान्तं त्रितय नय...
11/04/2026

ॐ शान्ताकारं शिखर शयनं शुभ्रवर्णं शुभाङ्गम्
विश्वाधारं स्फटिकसदृशं श्वेतवर्णं शुभांगम् ।
गौरीकान्तं त्रितय नयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्
वन्दे शम्भुं भवभयहरं सर्वलोकैक नाथम् ।।
जय श्री महादेव जी🙏

11/04/2026

स्वयं महेश: श्वसुरो नगेश:, सखा धनेशस्तनयो गणेश : l
तथापि भिक्षाटनमेव शम्भो:, बलीयसी केवलमीश्वरेच्छा ll
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भावार्थ -- जो स्वयं महादेव है, ससुर पर्वतश्रेष्ठ (हिमालय) है, कुबेर उनका परम मित्र हैं और पुत्र गणों का स्वामी है l फिर भी भगवान् शंकर को भिक्षा के लिए भटकना पड़ता है l सचमुच ईश्वर की इच्छा ही बलवान है l

भाग 1: भगवान शिव के दिव्य रहस्य​१. पवित्र भस्म: वैराग्य​भगवान शिव के शरीर पर लगी राख हमें याद दिलाती है कि यह शरीर और सं...
11/04/2026

भाग 1: भगवान शिव के दिव्य रहस्य
​१. पवित्र भस्म: वैराग्य
​भगवान शिव के शरीर पर लगी राख हमें याद दिलाती है कि यह शरीर और संसार नश्वर है। यह मोह-माया के त्याग और सत्य को अपनाने का प्रतीक है।
​२. व्याघ्र चर्म: मन पर विजय
​बाघ की खाल 'अहंकार' और 'क्रोध' को दर्शाती है। शिव इस पर बैठकर यह बताते हैं कि उन्होंने अपनी सभी बुराइयों और चंचल मन को जीत लिया है।
​३. रुद्राक्ष: करुणा का भाव
​रुद्राक्ष भगवान शिव की करुणा का प्रतीक है। इसे धारण करने से मन में शांति, एकाग्रता और समस्त जीवों के प्रति प्रेम बढ़ता है।
​४. गले में नाग: जागृत शक्ति
​शिव के गले का सांप 'कुंडलिनी शक्ति' को दर्शाता है। यह संदेश देता है कि हमें अपनी आंतरिक शक्ति को जगाकर शांत और निडर रहना चाहिए।
​५. माँ गंगा: ज्ञान का प्रवाह
​जटाओं से बहती गंगा 'पवित्र ज्ञान' का रूप है। यह सिखाता है कि ज्ञान को हमेशा अनुशासन और अच्छे कार्यों में ही लगाना चाहिए।
​६. चंद्रमा: शीतल मन
​मस्तक का चंद्रमा मन की शीतलता और समय पर नियंत्रण का प्रतीक है। यह हमें हर परिस्थिति में शांत रहने की प्रेरणा देता है।
​७. त्रिशूल: कष्टों का नाश
​त्रिशूल जीवन के सभी दुखों और अज्ञान को खत्म करता है। यह हमारी इच्छा, ज्ञान और कर्म करने की शक्ति को संतुलित रखता है।
​भाग 2: सप्तरंगी ध्वज का रहस्य
​१. सात रंग: चेतना के स्तर
​यह झंडा शरीर के सात चक्रों को दर्शाता है। लाल रंग से लेकर गुलाबी रंग तक, यह मनुष्य के विकास और ईश्वर से जुड़ने का मार्ग है।
​२. सूर्य और चंद्रमा: संतुलन
​झंडे के बीच में सूर्य और चंद्रमा का मेल यह बताता है कि जीवन में शक्ति (तेज) और शांति (ठंडक) दोनों का होना बहुत जरूरी है।
​३. गुरु की कृपा (चंदन)
​सूर्य पर लगा चंदन 'गुरु' के ज्ञान का प्रतीक है। बिना गुरु के मार्गदर्शन के जीवन का प्रकाश अधूरा है।
​४. लहराता ध्वज: प्राण वायु
​जैसे हवा से झंडा लहराता है, वैसे ही शिव की शक्ति से हमारा जीवन और यह पूरी सृष्टि चलती है।
​शिव ही सत्य हैं, शिव ही सुंदर हैं।
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10/04/2026

चलते रहो विश्वास के साथ,
क्योंकि धैर्य, परिश्रम और ख़ुद पर भरोसा ही वह कुंजी है;
जो जीवन की जटिलताओं को पार करने में मदद करती है…

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