05/01/2026
जहाँ स्वार्थ गल जाता है,
जहाँ मन झुककर प्रेम बन जाता है,
जहाँ “मैं” मिटता है और “तू” ही शेष रहता है —
वहीं प्रभु साकार हो जाते हैं।
प्रेम कोई शब्द नहीं,
प्रेम तो ईश्वर का अनुभव है। 💛🙏 #जहाँप्रेमहैवहींप्रभुहैं
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#प्रेमानंदमहाराजजी
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