05/11/2026
🌸BKSP द्वारा आयोजित Suchitra Joshi द्वारा लिखित काव्य संध्या भावनाओं, संस्कृति और साहित्य का सुंदर
सार 🌸
दुनिया का सबसे छोटा शब्द 'मॉं’
फिर भी सबसे बड़ा शब्द 'माँ',
उससे अधिक मुश्किल,
कल की काव्य संध्या के बारे में
लिख पाना, है ना माँ!
किसी ने झरझर नीर बहाए,
किसी ने थे "जुगनू " छुपाए,
कहीं शब्दों के कलश रिक्त हुए,
कहीं नयन अश्रु से सिक्त हुए,
मेरे दिल क्या बीत रहा था,
सबको कौन बताए माँ!
सब निर्बाध गति से बहते थे,
वीरों के बारे में भी कहते थे,,
समय की सीमा नहीं रक्खी
विषय था इतना विशाल माँ!
सत श्री अकाल का जयकारा था
सभी बोल कर निहाल थे माँ 🙏🏽
BKSP की स्तरीय और प्रशंसनीय काव्य संध्या को कैसे छोड़ सकते हैं ना माँ!
एक बार फिर से सबको ढेर सारी बधाई!